नेपाल ले जाकर बच्ची को मां से मिलवाया, आई ‘बजरंगी भाईजान’ की याद

बच्ची के चाचा और न्यूटाउन से तीर्थ क्लब के सदस्यों ने संयुक्ता को उसकी मां तक पहुंचाने का फैसला लिया. एक ओर कोरोना संकट (Corona Crisis), ऊपर से लॉकडाउन की समस्या थी. वहीं, मामला एक शहर से दूसरे शहर का होता तो ठीक था, यहां एक देश से दूसरे देश तक बच्ची को ले जाना था.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 3:05 pm, Sat, 26 September 20

फिल्म बजरंगी भाईजान (Bajrangi Bhaijaan) में अभिनेता सलमान खान (Salman Khan) मुन्नी को उसके परिजनों से मिलाने के लिए हिंदुस्तान से पाकिस्तान चले जाते हैं. कुछ इसी तरह का वाकया हकीकत में आसनसोल के बर्नपुर में हुआ. लेकिन यह पर्दे की कहानी से कहीं अधिक दर्दनाक और हृदय विदारक है. जहां एक 6 वर्षीय बच्ची संयुक्ता अपने पिता की मौत के बाद फंस गई थी. उसे बर्नपुर के युवकों ने नेपाल में उसकी मां से मिलाया गया. इस दौरान संयुक्ता की आंखें छलक आई. उसे छोड़ने गए लोग भी भावुक हो गए.

संयुक्ता के पिता बर्नपुर के न्यूटाउन के खिलाड़ी संजय छेत्री थे. जिनका निधन 6 सितंबर को अचानक हो गया. संजय के जाने के बाद वो अपने चाचा दीपक और राजू छेत्री की देखरेख में थी. वहीं उसकी मां नेपाल में थी. पिता के निधन और मां के दूर होने से वह मासूम किस परिस्थिति से गुजरी होगी, इसका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है. वह अपनी दोस्त फलक के साथ खेलती और पढ़ती रही.

कोरोना ने बनाया और जटिल मामला

बच्ची के चाचा और न्यूटाउन से तीर्थ क्लब के सदस्यों ने उसे उसकी मां तक पहुंचाने का फैसला लिया. एक ओर कोरोना संकट, ऊपर से लॉकडाउन की समस्या थी. वहीं, मामला एक शहर से दूसरे शहर का होता तो ठीक था, यहां एक देश से दूसरे देश तक बच्ची को ले जाना था.

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संयुक्ता के चाचा राजू और सतीर्थ क्लब के सदस्य मोनी, मृणाल, सुमन व पत्रकार निशांत ने बजरंगी भाईजान की भूमिका निभाई. वो लोग संयुक्ता को लेकर नेपाल बॉर्डर पर गए.

मां से मिलकर खुश है बच्ची

यहां पर उसकी मां से संपर्क करके उसे नेपाल बॉर्डर पर बुलाया गया. वहां आवश्यक दस्तावेज दिखाने के बाद कुछ आर्थिक सहायता भी दी गई. इस तरह संयुक्ता को उसकी मां से मिलाया. सयुंक्ता अपनी मां से मिलकर बहुत ही खुश थी.

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