व्यंग्य: गांव में ग्रीटिंग कार्ड देकर सेलिब्रेट करने वाले ने शहर में देखा ऐसा Valentine’s Day

ये उन दिनों की बात है जब स्मार्टफोन तो क्या, फोन भी लोगों के हाथ में नहीं हुआ करते थे. फोन क्या, बेसिक लैंडलाइन वाले फोन भी बहुत कम घरों में देखने को मिलते थे. उस जमाने में वेलेंटाइन्स डे के बारे में क्या और कैसे पता चलता था, दिल पर हाथ रखकर सुनना.
Satire on Valentines day, व्यंग्य: गांव में ग्रीटिंग कार्ड देकर सेलिब्रेट करने वाले ने शहर में देखा ऐसा Valentine’s Day

Valentine’s Day के बारे में अब हर किसी को पता है. जिसके हाथ में स्मार्टफोन है उसके पास सुबह व्हाट्सऐप पर दिल में स्टार चमकाते Gifs, दिल में तीर घुसे फोटो और वेलेंटाइन्स डे-बजरंग दल वाले memes आ जाते हैं. गांव में खेत की मेड़ पर बैठा लड़का भी जानता है कि इस वेलेंटाइन्स का बड़ा महत्व है, इस दिन लड़की को I Love you बोल दो तो 70 परसेंट चांस है कि वह मान जाएगी. 30 परसेंट नहीं मानने के 30 कारण हो सकते हैं.

ये उन दिनों की बात है जब स्मार्टफोन तो क्या, फोन भी लोगों के हाथ में नहीं हुआ करते थे. फोन क्या, बेसिक लैंडलाइन वाले फोन भी बहुत कम घरों में देखने को मिलते थे. उस जमाने में वेलेंटाइन्स डे के बारे में क्या और कैसे पता चलता था, दिल पर हाथ रखकर सुनना. गांव वालों को जज करना बंद कीजिए, उन्हें भी इसके बारे में पता होता है, बस मनाने का तरीका अलग होता है.

फोन और स्मार्टफोन आने से पहले वेलेंटाइन्स डे से एक दिन पहले अखबार देखकर या एफएम रेडियो पर सुनकर पता चलता था कि प्यार का त्योहार आ गया है. 2 रुपए के ग्रीटिंग कार्ड पर स्पार्कल पेन से कलाकारी, जिसमें परफ्यूम का खुशबू भा आती थी. बढ़िया सा गुलाबी दिल बनाकर, उसमें तीर घुसाकर S loves M लिखा जाता था. चार अक्षर लिखने में जो फॉन्ट इस्तेमाल किए जाते थे वो दुनिया के किसी वर्ड आर्ट में नहीं मिलते. वह क्रिएटिविटी का सर्वोच्च शिखर होता था.

वैसे ग्रीटिंग आपको अलमारियों में डायरी के बीच छिपे मिलेंगे. उन्हें कभी खराब नहीं किया जाता, बहुत सुरक्षित रखा जाता है. उसके बाद शहर आकर वहां का वेलेंटाइन्स डे देखा तो चमत्कार हो गया. यहां पूरा मार्केट सजा हुआ था. जहां गांव में सिर्फ वेलेंटाइन्स डे का पता चलता था, यहां आकर वेलेंटाइन्स वीक का पता चला.

यहां देखा कि वेलेंटाइन्स वीक अलग लेवल का त्योहार है जिसमें एक हफ्ते तक हर दिन त्योहार होता है. रोज डे, प्रपोज डे, टेडी डे, चॉकलेट डे, प्रॉमिस डे, किस डे और वेलेंटाइन्स डे. हर दिन के लिए अलग तैयारी चलती है. रोज डे को करोड़ों गुलाब बिक जाते हैं और चॉकलेट डे को चॉकलेट के गोदाम खाली हो जाते हैं. गिफ्ट शॉप महीनों पहले से स्टॉक भरकर रख लेती हैं ताकि कोई प्रेमी जोड़ा खाली हाथ न रह जाए.

वेलेंटाइन्स डे जितना तेजी से फैला उतनी ही तेजी से उसके दुश्मनों से भी पाला पड़ा. अब हर साल वेलेंटाइन्स डे के बाद अगले दिन अखबारों की सुर्खियां ऐसे होती हैं:

‘पार्क में बैठा था प्रेमी जोड़ा, जबरन करा दी शादी’

‘बाइक पर जा रहे भाई-बहन को प्रेमी जोड़ा समझकर किया प्रताड़ित’

‘रेस्टोरेंट में बैठे थे प्रेमी युगल, ** दल ने की तोड़ फोड़’

एक तरफ ये सब चलता है, दूसरी तरफ टीवी सीरियल, यूट्यूब, एफएम रेडियो, ये सब मिलकर आग लगा देते हैं और इनकी पूरी कोशिश रहती है कि इस वेलेंटाइन्स डे कोई सिंगल न रहने पाए. इतना पियर प्रेशर पैदा कर देते हैं कि चारों तरफ माहौल गुलाबी दिखाई देता है. प्यार का ये त्योहार चाहे जितना बदल गया हो, इसकी स्पिरिट वही है और इसका संदेश भी साफ है कि हर दिल प्यार से सराबोर रहे.

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