व्यंग्य: ईडी बढ़ा सकती है देश में किसानों की संख्या, अजीत पवार से शुरुआत

शरद पवार की एक और पीढ़ी राजनीति में आने से बच गई. उन पर परिवारवाद का धब्बा लगने से बच गया.

महाराष्ट्र की राजनीति में भारी जगह घेरने वाले कद्दावर नेता शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने विधानसभा से इस्तीफा दे दिया. चाचा को पता भी नहीं चला. उन्होंने अजीत के भतीजे से पता किया तो पता चला कि पापा आहत थे. उनका नाम महाराष्ट्र को-ऑपरेटिव बैंक घोटाले में आ गया था. उन्होंने अपने बेटे पार्थ से कहा कि राजनीति बहुत निचले स्तर पर चली गई है. चलो खेती-किसानी करते हैं.

अजीत पवार की ये बात बहुमुखी है. बाल की खाल निकालने वाला हो तो इस पर महाभारत लिख सकता है लेकिन यहां सिर्फ नीति की बात होगी. अजीत पवार ने राजनीति तो छोड़ी ही, अपने बेटे का मन भी उसकी तरफ से खट्टा कर दिया. अब शरद पवार की एक और पीढ़ी राजनीति में आने से बच गई. उन पर परिवारवाद का धब्बा लगने से बच गया.

NCP leader Ajit Pawar, व्यंग्य: ईडी बढ़ा सकती है देश में किसानों की संख्या, अजीत पवार से शुरुआत
शरद पवार-अजीत पवार

ईडी ने घोटाले में अजीत पवार का नाम लाकर देश में एक किसान बढ़ा दिया है. इसको पॉजिटिव तरीके से लेना चाहिए. नेताओं की बिरादरी का कोई व्यक्ति किसानी में आएगा तो उसे पता चलेगा कि कृषि प्रधान देश में किसान होना क्या होता है. यकीनन उन्होंने घोटाला न भी किया हो तो इतना बुरा हाल नहीं होगा कि वो खुदकुशी करें. उल्टा ऐसा हो सकता है कि किसानों की दुर्दशा को वो थोड़ा ऊंचे मंच पर ले जाएं.

ईडी का सॉफ्ट कॉर्नर सरकार की तरफ है या शरद पवार की तरफ ये समझ नहीं आ रहा है. विपक्ष का आरोप है कि सत्ता के इशारे पर ईडी मामले दर्ज कर रही है. ईडी ने शरद पवार से कहा है कि अभी पूछताछ की जरूरत नहीं है, आगे भी नहीं पड़ेगी. ये किसके इशारे पर हो रहा है, असली ऊपर वाला जाने.

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अजीत पवार-पार्थ पवार

ईडी ने ऐसा कोई वादा अजीत पवार से नहीं किया. लगता है इसी बात ने अजीत को खेती-किसानी में लक आजमाने के लिए प्रेरित कर दिया. नहीं तो आजकल नेताओं को मरते दम तक नहीं लगता कि राजनीति गंदी चीज है. आखिरी बार हमने अमिताभ बच्चन का राजनीति से मोह भंग होते देखा था. अमिताभ ने आगे हर सरकार से संबंध मधुर बनाए रखे ताकि उनकी किसानी भी सही से चलती रहे. अजीत पवार सक्रिय राजनीति से मुंह मोड़ने वाले पहले मेन स्ट्रीम नेता हैं.