लोकसभा में SC/ST को 10 साल के लिए और मिला आरक्षण, एंग्लो इंडियन रिजर्वेशन खत्म

लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में पिछले 70 वर्षों से दिए जा रहे एससी, एसटी और एंग्लो-इंडियन के लिए आरक्षण 25 जनवरी, 2020 को समाप्त होने वाला था.
Reservation of Anglo Indian ended, लोकसभा में SC/ST को 10 साल के लिए और मिला आरक्षण, एंग्लो इंडियन रिजर्वेशन खत्म

लोकसभा ने मंगलवार को लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एससी और एसटी के लिए आरक्षण को और दस साल के लिए बढ़ाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक (126वां) पारित किया. कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने दावा किया कि दोनों समुदायों को राजनीतिक नेतृत्व प्रदान करने के लिए विधानसभाओं में कोटा दिया जाना जरूरी है.

बिल के समर्थन में 352 सदस्यों ने वोट किया, जबकि इसके खिलाफ एक भी वोट नहीं डाला गया. मालूम हो कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में पिछले 70 वर्षों से दिए जा रहे एससी, एसटी और एंग्लो-इंडियन के लिए आरक्षण 25 जनवरी, 2020 को समाप्त होने वाला था. हालांकि, सरकार ने एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए नॉमिनेटेड सीट का समान संशोधन पेश नहीं किया है.

लोकसभा में एंग्लो इंडियन का आरक्षण खत्म!

हालांकि नॉमिनेशन के तौर पर एंग्लो इंडियन समुदाय के नागरिकों को मिलने वाला आरक्षण अब खत्म हो जाएगा. एंग्लो-इंडियन के लिए आरक्षण अगले साल 25 जनवरी को समाप्त होने वाला है क्योंकि बिल में इस समुदाय को आरक्षण नहीं दिया गया है. हालांकि रविशंकर प्रसाद ने कहा है कि दरवाजे अभी पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं और एंग्लो-इंडियन्स को नॉमिनेट किए जाने के मामले पर विचार किया जाएगा.

क्या होता है एंग्लो इंडियन?

“एंग्लो इंडियन का अर्थ है एक व्यक्ति जिसका पिता या अन्य पुरुष पूर्वजों में से कोई भी यूरोपीय वंश का है,” रविशंकर प्रसाद ने एंग्लो-इंडियन की संवैधानिक परिभाषा को पढ़ते हुए कहा कि इन समुदायों के कई लोग अब या तो विदेश चले गए या उनकी बेटियों ने अब अन्य भारतीय समुदायों में शादी कर ली है और खुद को एंग्लो-इंडियन मानते हैं.

एंग्लो-इंडियन समुदाय के लिए मनोनीत सीट 2014 से खाली है. इस समुदाय से आखिरी मनोनीत सांसद बीजेपी के जॉर्ज बेकर थे. TMC के राज्यसभा सदस्य डेरेक ओ ब्रायन भी एंग्लो-इंडियन समुदाय के सदस्य हैं.

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