बैंकों की तरफ से ब्याज में छूट नहीं देने पर SC ने कहा- आर्थिक पहलू जनता की सेहत से ऊपर नहीं

SC ने कहा कि RBI कि ओर से मोरेटोरियम पीरियड (Moratorium Period) दिया गया, लेकिन ब्याज में कोई छूट नहीं दी गई. जबकि ब्याज में छूट नहीं मुहैया कराया जाने से ज्यादा नुकसान है.
SC on not giving interest waiver by banks, बैंकों की तरफ से ब्याज में छूट नहीं देने पर SC ने कहा- आर्थिक पहलू जनता की सेहत से ऊपर नहीं

कोरोनावायरस लॉकडाउन (Coronavirus Lockdown) के कारण बैंकों की तरफ से कर्ज के ब्याज में छूट नहीं देने के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट (SC) ने गुरूवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से कहा कि आर्थिक पहलू जनता की सेहत से ऊपर नहीं हैं.

शीर्ष अदालत ने कहा कि RBI कि ओर से मोरेटोरियम पीरियड (Moratorium Period) दिया गया, लेकिन ब्याज में कोई छूट नहीं दी गई. ब्याज में छूट नहीं मुहैया कराया जाने से ज्यादा नुकसान है. हालांकि, अदालत ने वित्त मंत्रालय (Finance Ministry) और RBI को इस मुद्दे पर एक संयुक्त जवाब दाखिल करने के लिए समय दिया है.

12 जून को होगी अगली सुनवाई

जस्टिस अशोक भूषण कि अध्यक्षता वाली पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि इस मामले में दो पहलू हैं. पहला यह कि मोरेटोरियम पीरियड पर भी ब्याज लिया जाना और ब्याज पर भी ब्याज लिया जाना. इस दौरान सॉलिसीटर जनरल (SG) तुषार मेहता (Tushar Mehta) ने पीठ से वित्त मंत्रालय और आरबीआई कि ओर से संयुक्त जवाब दाखिल करने के लिए समय की मांग कि, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने समय प्रदान करते हुए 12 जून को इस मामले कि सुनवाई कि अगली तारीख तय की है.

देखिए NewsTop9 टीवी 9 भारतवर्ष पर रोज सुबह शाम 7 बजे

RBI का हलफनामा मीडिया में आने पर SC नाराज

वहीं इससे पहले मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज माफी की मांग वाली याचिका पर दाखिल आरबीआई का हलफनामा मीडिया में आ जाने पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई. आरबीआई ने 6 महीने की मोरेटोरियम अवधि के दौरान ब्याज माफी की मांग को गलत बताया है. बता दें कि आरबीआई ने ब्याज मोरेटोरियम पीरियड 3 से बढ़ाकर 6 महीने कर दिया है. मोरेटोरियम के दौरान बैंक ब्याज भी वसूल कर रहे हैं. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने पहले आरबीआई से जवाब मांगा था.

‘बैंकों को होगा 2 लाख करोड़ का नुकसान’

इसके जवाब में आरबीआई ने कहा कि ब्याज नहीं माफ हो सकता. ब्याज माफ करने से बैंकों की सेहत पर असर पड़ेगा. अगर ब्याज माफ किया जाता है तो इससे बैंकों को 2 लाख करोड़ रुपए का घाटा होगा. गौरतलब है कि Covid-19 महामारी कि वजह से आरबीआई ने 27 मार्च को एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें बैंकों को तीन महीने की अवधि के लिए किश्तों के भुगतान के लिए मोहलत दी गई थी.

इसके बाद 22 मई को आरबीआई ने 31 अगस्त तक के लिए तीन महीने की मोहलत की अवधि बढ़ाने की घोषणा की जिससे यह छह महीने की मोहलत बन गई. सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर कहा गया कि बैंक EMI पर मोहलत देने के साथ-ब्याज लगा रहे हैं, जो कि गैर-कानूनी है.

देखिये #अड़ी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर शाम 6 बजे

Related Posts