अयोध्या विवाद में मध्यस्थता फेल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में आज से शुरू हुई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्यस्थता समिति की भूमिका को खत्म करते हुए 6 नवंबर यानी आज से रोजाना सुनवाई करने का समय दिया था.

नई दिल्ली: अयोध्या ज़मीन विवाद मामले में मध्यस्थता फ़ेल होने के बाद मंगलवार से सुप्रीम कोर्ट में रोज़ाना सुनवाई शुरू हो गई है. अयोध्या मामले के एक पक्ष निर्मोही अखाड़े ने सुप्रीम कोर्ट में मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधानिक पीठ के समक्ष अपनी दलीलें पेश करनी शुरू कर दी हैं. इस पीठ में न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति अशोक भूषण और न्यायमूर्ति एस ए नजीर भी शामिल हैं.

मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई 17 नवंबर को रियाटर हो रहे हैं. यानि की शनिवार और रविवार हटा दिया जाए तो उनके पास कुल 55 कार्यदिवस ही शेष बचे हैं. हालांकि इसमें भी दिवाली, दशहरा समेत अन्य 20 दिन कि छुट्टियां हैं. मतलब यह कि इस भूमि विवाद को क़रीब 35 दिनों में ही निपटारा करना होगा.

सुनवाई के दौरान अखाड़े के वकील ने कहा कि मुस्लिम कानून के तहत कोई भी व्यक्ति जमीन पर कब्जे की अनुमति के बिना किसी दूसरे की जमीन पर मस्जिद का निर्माण नहीं कर सकता है. मुसलमानों ने 1934 के बाद मस्जिद में कभी कोई प्रार्थना नहीं की. हालांकि मुस्लिम पक्ष का कहना है कि वे 1934 के बाद भी मस्जिद में नमाज अदा कर रहे हैं.

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) विचारक के.एन. गोविंदाचार्य की याचिका खारिज कर दी, जिसमें अयोध्या मामले की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग की मांग की गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह अब संभव नहीं है. शनिवार को दाखिल की गई अपनी याचिका में गोविंदाचार्य ने मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ से अयोध्या मामले की सुनवाई की लाइव स्ट्रीमिंग कराने का आग्रह किया था. अयोध्या मामले की सुनवाई शुरू हो चुकी है.

याचिका में सुप्रीम कोर्ट के सितंबर 2018 के आदेश का हवाला दिया गया, जिसमें कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग अनिवार्य है. याचिका में कहा गया कि आदेश आने के एक साल होने के बाद भी यह अभी तक लागू नहीं हुआ है.

गोविंदाचार्य ने अपनी याचिका में कहा, “यह मामला राष्ट्रीय महत्व का है. याचिकाकर्ता समेत लाखों देशवासी इसकी कार्यवाही देखना चाहते हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान नियम के कारण वे ऐसा नहीं कर सकते.” उन्होंने कहा, “अगर लाइव स्ट्रीमिंग अभी संभव नहीं है, तो अदालत के अधिकारी कार्यवाही की ऑडियो या वीडियो रिकॉर्डिग कर सकते हैं और इसे बाद में शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर अपलोड किया जा सकता है.”उन्होंने कहा कि लोग राम मंदिर मामले में जल्द से जल्द न्याय के लिए लालायित हैं, जहां भगवान राम पिछले कई सालों से अस्थाई टेंट में रखे गए हैं.

ज़ाहिर है कि सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में मध्यस्थता समिति की भूमिका को खत्म करते हुए 6 नवंबर यानी आज से रोजाना सुनवाई करने का समय दिया था. माना जा रहा है कि मुख्य न्यायाधीश शनिवार और रविवार को भी अदालत लगा कर सुनवाई कर सकते हैं. इससे पहले पीठ ने दो अगस्त को तीन सदस्यीय मध्यस्थता समिति की रिपोर्ट को संज्ञान में लिया था.

जिसके बाद मध्यस्थता समिति के प्रमुख उच्चतम न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश एफ एम आई कलीफुल्ला थेय पीठ ने कहा था कि करीब चार महीने चली मध्यस्थता प्रक्रिया का अंतत: कोई परिणाम नहीं निकला.

और पढ़ें- आर्टिकल 370: कश्‍मीर में जमीन खरीदने की तैयारी में हैं ये BJP विधायक, देख रहे प्‍लॉट