‘राफेल लड़ाकू विमान सजा के रखने के लिए नहीं है’, पुनर्विचार याचिका पर SC ने फैसला रखा सुरक्षित

सुप्रीम कोर्ट ने राफेल से जुड़े स्तावेजों पर केंद्र सरकार के ‘विशेषाधिकार’ वाले दावे को खारिज कर दिया था. जिसके बाद कोर्ट ने इस मामले की दोबारा सुनवाई करने की बात कही थी.

नई दिल्ली: राफेल सौदे में हुई कथित घोटालेबाजी को लेकर SC में दायर की गई पुनर्विचार याचिका पर कोर्ट ने आज अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. पुनर्विचार याचिका दायर करने वाले वकील प्रशांत भूषण ने अपनी बात रखते हुए आरोप लगाया था कि सरकार की तरफ से गलत दस्तावेज पेश किए गए हैं जिस पर कार्यवाई करनी चाहिए.

मामले पर प्रशांत भूषण और अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल राव में तीखी बहस भी हुई. इस बहस के बाद सुप्रीम कोर्ट ने राफेल मामले में दायर पुनर्विचार याचिकाओं पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया है कि प्रशांत भूषण पुनर्विचार याचिका के मुद्दे पर सरकार की दलीलों का जवाब 2 हफ्ते में देना होगा.

केंद्र ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में तर्क देते हुए कहा कि राफेल सौदा राष्ट्रीय सुरक्षा का सवाल है और दुनिया भर में इस तरह के रक्षा सौदों की अदालत में जांच नहीं होती है. केंद्र की तरफ से अटॅार्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा कि, राफेल लड़ाकू विमान सजा के रखने के लिए नहीं है. उन्होंने बताया कि यह हम सभी के संरक्षम के लिए देश की आवश्यकता है. दुनिया में कहीं भी इस तरह का मामला अदालत के सामने नहीं लाया जाएगा.’

SC ने इस मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए इसकी जांच के आदेश देने से इनकार कर दिया था. इस फैसले के बाद यशवंत सिन्हा, अरुण शौरी और प्रशांत भूषण ने इस फैसले पर पुनर्विचार याचिका दायर की थी. इसके बाद केंद्र ने विशेषाधिकारों का हवाला देते हुए सुप्रीम कोर्ट में राफेल के लीक हुए दस्तावेजों को खारिज करने की मांग की थी.

इस मामले में सुनवाई से ठीक पहले केंद्र सरकार ने SC में हलफनामा दाखिल करने का वक्त मांगा था. केंद्र ने इसके लिए एक हफ्ते का समय मांगा था जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया था. जिसके बाद अब इस मामले पर सुनवाई की जा रही है.

सरकार की तरफ से अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कहा था कि बिना किसी विभाग की इजाज़त के बिना कोई भी राफेल डील से जुड़े दस्तावेज को कोर्ट में पेश नहीं किया जा सकता. इसके समर्थन में केके वेणुगोपाल ने साक्ष्य कानून की धारा 123 और सूचना के अधिकार कानून के प्रावधानों का हवाला दिया था.

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