Covid-19 की पहली वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल कामयाब, 12 शहरों में आज सेकेंड फेज का आगाज

कोरोना (Coronavirus) संक्रमण को रोकने के लिए बनाई जा रही वैक्सीन का मानव पर क्लीनिकल ट्रायल हैदराबाद के निम्स (NIMS) अस्पताल में किया जाएगा. पहले फेज के लिए आज यानी 7 जुलाई को स्क्रीनिंग की जाएगी.
COVAXIN human trials, Covid-19 की पहली वैक्सीन का क्लीनिकल ट्रायल कामयाब, 12 शहरों में आज सेकेंड फेज का आगाज

भारत की कोविड-19 की पहली संभावित वैक्सीन ‘कोवाक्सिन’ (Covaxin) को दवा नियामक DGCI ने पहले और दूसरे चरण के लिए ह्यूमन टेस्टिंग की अनुमति दे दी है. अब इसका ट्रायल हैदराबाद के निम्स (NIMS) अस्पताल समेत देशभर के 12 सेंटर में होगा. इस वैक्सीन को हैदराबाद की फार्मा कंपनी भारत बायोटेक ने तैयार किया है.

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इसे इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च (ICMR) और नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी पुणे ने मिलकर बनाया है. इसके प्री-क्लीनिकल ट्रायल कामयाब रहे हैं. अब इंसानों पर इसका ट्रायल आज यानी मंगलवार, 7 जुलाई से शुरू किया जाएगा. इस अहम ट्रायल के लिए हैदराबाद के निम्स (निज़ाम्स इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज) अस्पताल को चुना गया है.

निम्स अस्पताल के अधिकारियों के अनुसार कोरोना से बचाव के लिए बनी इस वैक्सीन को फेज-1 ट्रायल के तौर पर प्रयोग किया जाएगा. 7 जुलाई यानी आज से स्वास्थ्य सब्जेक्ट (लोगों) की स्क्रीनिंग की जाएगी. उनका ब्लड सैंपल्स और स्वाब सैंपल्स लिए जाएंगे और उसी दिन नई दिल्ली स्थित ICMR द्वारा मनोनीत लैब को भेजा जाएगा. वहां से रिपोर्ट आने के बाद, तेलंगाना का डिपार्टमेंट ऑफ मेडिसिन रिपोर्ट की जांच करेगा और फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद वैक्सीन का पहला डोज दिया जाएगा.

फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही दिया जाएगा वैक्सीन का डोज

इसी तरह सभी स्वस्थ्य लोगों की जांच करने के बाद फिटनेस सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही वैक्सीन का डोज दिया जाएगा. ट्रायल के लिए तीन तरह की वैक्सीन है. तीनों को अलग-अलग कोड दिया गया है. इसी तरह स्वस्थ्य व्यक्ति को उनके फिटनेस के अनुसार अलग-अलग कोड की वैक्सीन दी जाएगी. एक-एक व्यक्ति को दो डोज दिए जाएंगे. एक डोज देने के 14 दिनों बाद फिर उसी कोड की वैक्सीन दी जाएगी.

पहला डोज दिए जाने के बाद उन्हें दो दिनों के लिए अस्पताल में ICU में उनके द्वारा गठित डॉक्टरों की टीम की निगरानी में रखा जाएगा. उसके बाद घर भेज दिया जाएगा और 14 दिनों तक उनको फोन पर या वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए मॉनिटर किया जाएगा. पहली क्लीनिकल ट्रायल के लिए 30 से 60 सब्जेक्ट्स (लोगों) को एनरोल किया जाएगा.

कई लोग क्लीनिकल ट्रायल में हिस्सा लेने के लिए दिलचस्पी दिखा रहे हैं. कई लोग आवेदन दे चुके हैं. कई मेल आए हैं. कई फोन कॉल्स आए हैं. इनमें से हेल्दी सब्जेक्ट्स (स्वस्थ्य लोगों) को चुना जाएगा, फिर उनका परीक्षण कर, उन्हीं को वैक्सीन देने के लिए तैयार किया जाएगा.

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