देश में Coronavirus की दूसरी वैक्‍सीन भी तैयार! Human Trials की मिली मंजूरी

इससे पहले हैदराबाद की भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को भी कोरोना वैक्सीन (Corona Vaccine) के ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी दी जा चुकी है. मालूम हो कि दुनियाभर में इस समय कोरोनावायरस की करीब 17 वैक्‍सीन का टेस्‍ट इंसानों पर किया जा रहा है.
Second Pharma company approved, देश में Coronavirus की दूसरी वैक्‍सीन भी तैयार! Human Trials की मिली मंजूरी

भारत (India) में कोरोनावायरस (Coronavirus) संक्रमण की संभावित वैक्‍सीन (Vaccine) के फेज 1 और फेज 2 के ह्यूमन क्‍लीनिकल ट्रायल (Human Clinical Trials) के लिए फार्मा कंपनी जाइडस कैडिला को मंजूरी मिल गई है. ड्रग कंट्रोलर जनरल और इंडिया की ओर से यह मंजूरी दी गई है.

इससे पहले हैदराबाद की भारत बायोटेक की कोवैक्सिन को भी कोरोना वैक्सीन के ह्यूमन ट्रायल की मंजूरी दी जा चुकी है. मालूम हो कि दुनियाभर में इस समय कोरोनावायरस की करीब 17 वैक्‍सीन का टेस्‍ट इंसानों पर किया जा रहा है.

जानवरों पर ट्रायल सफल होने का दावा

रिपोर्ट के मुताबिक, जाइडस कैडिला का दावा है कि यह वैक्‍सीन जानवरों पर किए गए ट्रॉयल में कारगर साबित हुई है. कंपनी ने जानवरों पर किए गए परीक्षणों की रिपोर्ट ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया को सौंपी थी जिसके अध्‍ययन के बाद वैक्सीन के मानव परीक्षण के पहले और दूसरे चरण की मंजूरी मिली.

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बताया जा रहा है कि कंपनी जल्‍द ही इंसानों पर वैक्‍सीन के ट्रायल के लिए इंरोलमेंट शुरू करेगी. सूत्रों का कहना है कि पहले और दूसरे चरण के ट्रायल को लगभग तीन महीनों में पूरा कर लिया जाएगा.

क्लीनिकल ट्रायल के लिए 12 संस्थानों का चयन

दूसरी तरफ, भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) ने देश के पहले स्वदेशी कोविड-19 टीके के क्लीनिकल ट्रायल के लिए 12 संस्थानों का चयन किया है. क्लीनिकल ट्रायल के लिए चुने गए अन्य संस्थान विशाखापत्तनम, रोहतक, नयी दिल्ली, पटना, बेलगाम (कर्नाटक), नागपुर, गोरखपुर, ओडिशा, कट्टानकुलतुर (तमिलनाडु), हैदराबाद, आर्य नगर, कानपुर (उत्तर प्रदेश) और गोवा में स्थित हैं.

दुनियाभर में हो रहा वैक्सीन निर्माण का प्रयास

गौरतलब है कि अमेरिकी फार्मा कंपनी फाइजर और यूरोपीय जैव प्रौद्योगिकी कंपनी बायोएनटेक एसई ने कोविड-19 के एक टीके का प्रायोगिक परीक्षण किया है. इसके नतीजे में टीके को सुरक्षित और मरीजों में एंटीबॉडी बनाने में कारगर पाया गया है.

अध्ययन से पता चला कि मरीजों को टीके की दो खुराक दिए जाने के बाद उनके भीतर बनने वाले एंटीबॉडी की संख्या उन मरीजों में पैदा हुए एंटीबाडी से अधिक पाई गई जिन्हें कोविड-19 से ठीक हो चुके लोगों का प्लाज्मा दिया गया था.

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