Coronavirus के डर से SC में किसी ने नहीं की मदद, हार्ट अटैक से बेटी के सामने सीनियर वकील की मौत

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) के बाहरी परिसर में स्थित अपने चैंबर में बुधवार सुबह 80 वर्षीय वकील ढींगरा कामकाज के सिलसिले में पहुंचे थे. जहां उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई.
senior lawyer died in SC, Coronavirus के डर से SC में किसी ने नहीं की मदद, हार्ट अटैक से बेटी के सामने सीनियर वकील की मौत

कोरोनावायरस (Coronavirus) के चलते लोग बुजुर्ग, बीमार और कमजोर लोगों की मदद करने से भी कतरा रहे हैं. ऐसा ही एक वाक्या हुआ सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में, जहां 50 साल से प्रैक्टिस कर रहे वरिष्ठ वकील एसके ढींगरा की दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई. उनकी बेटी इस दौरान पिता की जान बचाने के प्रयास करती रही, लेकिन समय ने साथ नहीं दिया. कई अन्य वकील और क्लर्क उन्हें तड़पता देखते रहे, लेकिन कोरोना महामारी के डर से कोई मदद के लिए आगे नहीं आया. किसी ने उन्हें स्ट्रेचर पर नहीं लिटाया.

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कोरोना के डर से नहीं की किसी ने मदद

सुप्रीम कोर्ट के बाहरी परिसर में स्थित अपने चैंबर में बुधवार सुबह 80 वर्षीय वकील ढींगरा कामकाज के सिलसिले में पहुंचे थे. जहां उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई. उन्हें दिल का दौरा पड़ा तो क्लर्क ने कई लोगों से मदद मांगी और उनकी बेटी शेफाली को भी कॉल कर दिया, जो वकील भी हैं. इस दौरान क्लर्क ने सुप्रीम कोर्ट में स्थिति चिकित्सकों को डिस्पेंसरी से बुलाने के लिए संदेश भेजा. जहां कोई चिकित्सक नहीं होने की वजह से मदद नहीं मिल सकी.

इमरजेंसी के बावजूद नियम समझाने लगे सुरक्षाकर्मी

सुप्रीम कोर्ट पहुंचने से पहले रास्ते से बेटी ने भी आपातकाल क्लीनिक पर डॉक्टर या कोई पैरामेडिकल स्टाफ भेजकर मदद करने के लिए कॉल किया, पर बात नहीं बनी.  जब बेटी सुप्रीम कोर्ट के गेट तक पहुंच गई तो उसे गेट बी से प्रवेश नहीं करने दिया गया, क्योंकि वह निकास द्वार है और प्रवेश निषेध है. बेटी ने गेट बी पर सुरक्षा कर्मियों से आपात स्थिति की जानकारी देते हुए प्रवेश देने के लिए निवेदन भी किया. लेकिन जवाब मिला यह सुप्रीम कोर्ट है, नियम से चलिए.

इसके बाद बेटी ने सड़क पर ही कार खड़ी कर दी और अपने पति के साथ उसकी कार में दूसरे गेट से उस चैंबर में पहुंची, जहां वकील ढींगरा की दिल का दौरा पड़ने से जान आफत में थी. इस दौरान चैंबर के बाहर तक एंबुलेंस पहुंचनी थी, जिसके नहीं पहुंचने के बारे में जब बेटी ने पूछा तो पता चला कि एंबुलेंस तो कहीं और खड़ी थी, क्योंकि एंबुलेंस का ड्राइवर भटक गया था. एंबुलेंस तक पिता को पहुंचाने के लिए बेटी ने व्हीलचेयर पर बैठाने के लिए कई वकीलों और क्लर्कों से मदद मांगी, पर सिर्फ एक ही आगे आया.

अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम

एंबुलेंस के दूर खड़े होने की वजह से बेटी ने यह तय किया था कि व्हीलचेयर से चैंबर के बाहर खड़ी कार तक पिता को ले जाएगी और फिर कार से एंबुलेंस तक, लेकिन इन सबमें वक्त हाथ से फिसल गया और वकील ढींगरा कि मौत हो गई. याद रहे कि लॉकडाउन के बाद सुप्रीम कोर्ट पूरी तरह से बंद कर दिया गया था. बाद में वकीलों के चैंबर क्रम के अनुसार खोलने का निर्णय लिया गया.

हालांकि इस दौरान सुप्रीम कोर्ट प्रशासन अन्य इंतजाम करना भूल गया कि मुख्य परिसर के बंद होने पर आपात स्थिति से किस तरह से निपटा जाएगा. जबकि कोरोना महामारी के दौर में कोई व्यक्ति दूसरे व्यक्ति कि मदद करने से इसलिए कतरा रहा है, क्योंकि संक्रमण का खतरा हर किसी के सिर पर मंडरा रहा है.

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