स्कूल में थी जाति के आधार पर पानी पीने की व्यवस्था, टीचर ने नहीं माना तो प्रिंसिपल ने किया ट्रांसफर

चोटिला पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में पीड़ित कन्हैयालाल बरिया ने प्रिंसिपल पर उसे धमकी देने और उसके खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाया है.

गुजरात के सुरेंद्रनगर डिस्ट्रिक्ट से छुआछूत का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है. सरकारी स्कूल के प्रिंसिपल ने 46 वर्षीया दलित शिक्षक को नोटिस थमा दिया क्यूंकि उसने तथाकथित ऊंची जाति वाले 3 सहकर्मियों के लिए रखे घड़े से पानी पी लिया. इस भेदभाव बाद शिक्षक ने FIR दर्ज करवाई. FIR दर्ज कराने के दो हफ्ते बाद उनका दूसरे स्कूल में ट्रांसफर कर दिया गया.

चोटिला पुलिस स्टेशन में दर्ज FIR में पीड़ित कन्हैयालाल बरिया ने प्रिंसिपल पर उसे धमकी देने और उसके खिलाफ नफरत फैलाने का आरोप लगाया है. जब यह घटना हुई तब बरिया पियवा सरकारी प्राथमिक शाला-2 में पढ़ा रहे थे. कन्हैयालाल के मुताबिक जबसे उन्होंने इस स्कूल में पढ़ाना शुरू किया तब से प्रिंसिपल मसंग राठौड़ उनके साथ भेदभाव कर रहे हैं. वो आज तक बस बच्चों के खतिर चुप थे.

बरिया ने बताया की प्रिंसिपल ने दो घड़े रखे थे. एक मेरे लिए क्यूंकि मैं वाल्मीकि समुदाय से हूँ और एक घड़ा मेरे बाकि तेन सहयोगियों के लिए. वो तीनों कोली, पटेल और दरबार समुदाय से आते हैं. कन्हैयालाल ने इस व्यवस्था को ठुकरा दिया. जब प्रिंसिपल को पता चला की वो तथाकथित ऊंचे तबके वालों के घड़े से पानी पी रहे हैं, तो उसने उनके खिलाफ 3 जुलाई को नोटिस जारी कर दिया। प्रिंसिपल के खास दोस्त उन्हें धमकियाँ भी दे रहे थे. साथ ही विरोध स्वरुप बच्चों के पेरेंट्स ने 21 अगस्त को स्कूल बंद करवाया था. पेरेंट्स का कहना था की वो अपने बच्चों को ‘अछूत’ शिक्षक से नहीं पढ़वना चाहते. लोगों का विरोध तब शुरू हुआ जब स्कूल स्टाफ ने बताया की बरिया दलित समुदाय से हैं.

कन्हैयालाल 2002 से बच्चों को पढ़ा रहे हैं. उन्होंने प्रिंसिपल पर बच्चों के सामने उनके साथ गालीगलौज, अभद्र व्यवहार और शोषण करने का भी आरोप लगाया है. FIR दर्ज करवाने के बाद पुलिस ने बरिया को सुरक्षा भी प्रदान की है. सशक्त पुलिसवाले उन्हें क्लासरूम तक छोड़ने जाते हैं.

जिग्नेश मेवानी, जो वाङ्गं से निर्वाचित सांसद हैं, पहले भी गुजरात में चल रहे छुआ-छूत और भेदभाव के बारे में बोलते आये हैं जबकि वहां यह कानूनन जुर्म है.