शाह फैसल के राजनीति छोड़ने पर महबूबा मुफ्ती की बेटी ने उठाया सवाल, अचानक क्यों बदल लिया मन?

महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) का ट्विटर हैंडल उनकी बेटी इल्तिजा ऑपरेट करती हैं. उन्होंने ट्वीट करके कहा कि 'कश्मीर इस बात को लेकर चिंतित है कि जिस पार्टी JKPM को उन्होंने फरवरी 2019 में बनाई थी उसके अध्यक्ष पद से क्यों इस्तीफा दे दिया.'
Shah Faisal resigned, शाह फैसल के राजनीति छोड़ने पर महबूबा मुफ्ती की बेटी ने उठाया सवाल, अचानक क्यों बदल लिया मन?

आईएएस (IAS) की सेवा छोड़कर राजनीति में आने वाले शाह फैसल (Shah Faisal) ने जम्मू-कश्मीर पीपुल्स मूवमेंट पार्टी (JKPM) के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया. जम्मू-कश्मीर की पूर्व मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती (Mehbooba Mufti) की बेटी ने इसे लेकर सवाल खड़े किए हैं.

‘कश्मीर इस बात को लेकर चिंतित…’

महबूबा का ट्विटर हैंडल उनकी बेटी इल्तिजा ऑपरेट करती हैं. उन्होंने ट्वीट करके कहा, “कश्मीर इस बात को लेकर चिंतित है कि जिस पार्टी JKPM को उन्होंने फरवरी 2019 में बनाई थी उसके अध्यक्ष पद से क्यों इस्तीफा दे दिया. जम्मू कश्मीर में राजनीति के जरिए परिवर्तन के इच्छुक आखिर उस व्यक्ति के दिमाग में अचानक ऐसा क्यों बदलाव आ गया?”

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एक अन्य ट्वीट में उन्होंने कहा, “एक UPSC टॉपर और हार्वर्ड विद्वान जो एक सिविल ऑफिसर के तौर पर उत्कृष्ठ थे, उनके पास करियर के विकल्पों की कोई कमी नहीं थी. शाह फैसल ने 5 अगस्त को BBC को दिए इंटरव्यू में कहा था कि अब कश्मीरी नेता केवल एक अलगाववादी या कट्टर हो सकता है. इसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर पीएसए लगा दिया गया था.”


फैसल ने ट्विटर हैंडल पर बदला बायो

रिपोर्ट के मुताबिक, फैसल के अपने ट्विटर हैंडल से राजनीतिक बायो को हटाकर वापस प्रशासन सेवा में शामिल होने की संभावना जताई है. उन्होंने अपने ट्विटर बायो पर लिखा, “एडवर्ड एस फेलो, एचकेएस हार्वर्ड यूनिवर्सिटी, मेडिको. फुलब्राइट. सेंटट्रिस्ट.”

इससे यह साफ नजर आता है कि उन्होंने JKPM के संस्थापक के रूप में अपने राजनीतिक बायो हटा दिया है.

2010 की सिविल सेवा परीक्षा में किया टॉप 

गौरतलब है कि उन्होंने साल 2010 की सिविल सेवा परीक्षा में टॉप किया था और उन्हें IAS का होम कैडर आवंटित किया गया था. एक ईमानदार अधिकारी के रूप में लोकप्रिय फैसल के शुभचिंतकों ने उन्हें साल 2018 में राजनीति में शामिल होने के लिए इस्तीफा देने पर आगाह किया था कि हो सकता है राजनीति उन्हें रास न आए.

वहीं सूत्रों का यह भी कहना है कि सरकार ने हाल ही में उन्हें यह महसूस कराया कि उनके सिविल सेवा में वापस शामिल होने से ‘उन्हें कोई ऐतराज नहीं’ है.

अगर वह वापस प्रशासन सेवा में शामिल होने का विकल्प चुनते हैं, तो वह जम्मू-कश्मीर में सबसे कम राजनीतिक करियर के लिए एक और रिकॉर्ड बनाएंगे. उन्होंने JKPM की स्थापना 2019 की शुरुआत में काफी धूमधाम से की थी.

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