वतन पर मिटने वाले शहीद भगत, सुखदेव और राजगुरु का यही बाकी निशा होगा….

आज भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की 88वीं पुण्यतिथि है. आज का दिन देश में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है.
Shaheed Diwas Martyr day, वतन पर मिटने वाले शहीद भगत, सुखदेव और राजगुरु का यही बाकी निशा होगा….

कुल 23 साल की उम्र में देश के लिए कुर्बान होना बहुत बड़ी बात होती है. अंग्रेजों से भारत को मुक्त कराने के लिए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव ने फांसी के फंदे को हंसते-हंसते गले लगा लिया था. ‘शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशा होगा.’ ये पंक्तियां उन क्रांतिकारियों की है, जिन्होंने अपनी देशभक्ति दखाते हुए अंग्रेजों से लोहा मनवाया. आज भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की 88वीं पुण्यतिथि है. आज का दिन देश में शहीद दिवस के रूप में मनाया जाता है.

‘साइमन गो बैक’ का नारा देने वाले लाला लाजपत राय की मौत का बदला लेने के लिए भगत सिंह ने अपने साथियों के साथ मिलकर सुप्रींटेडेंट ऑफ पुलिस जैम्स ए. स्कॉट की गोली मारकर हत्या कर दी थी, जिसके बाद भगत सिंह और उनके साथियों को ढूंढने के लिए चप्पे-चप्पे पर पुलिस की तैनाती कर दी थी. इस घटना के बाद अंग्रेजी हुकूमत तक अपनी आवाज पहुंचाने के लिए भगत सिंह और उनके साथी बटुकेश्वर दत्त ने मिलकर असेंबली में बम धमाका कर ‘इंकलाब जिंदाबाद’ का नारा दिया. इसके पीछे उनका उद्देश्य था कि देश पर कब्जा करे बैठे अंग्रेजी सरकार को देश छोड़कर जाने को मजबूर करना.

इस केस में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त को गिरफ्तार कर लिया गया और फिर बाद में इस मामले मे संलिप्त अन्य लोगों की भी गिरफ्तारी हुई. जेल में रहते हुए भी भगत सिंह और उनके साथियों ने देश को अंग्रेजों से आजाद कराने की अपनी जंग जारी रखी. जेल के अंदर सभी क्रांतिकारियों पर अंग्रेजी हुकूमत ने हर प्रकार का जुल्म करने का भरपूर प्रयास किया, लेकिन इन नौजवानों के हौसलों को वे डगमगा नहीं पाए. अंत में भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा सुना दी गई और 23 मार्च, 1931 में इन तीनों महान क्रांतिकारियों ने हंसते-हंसते फांसी के फंदे को गले लगा लिया.

भगत सिंह की कुछ बातें, जो करती हैं प्रभावित

1.भगत सिंह के विचार बलिदान को लेकर अलग ही थे. उनका मानना था कि “मैं इस बात पर जोर देता हूं कि मैं जिंदगी के महत्वाकांक्षा, आशा और जीवन के पूर्ण आकर्षण से भरा हुआ हूं, लेकिन मैं जरूरत के समय इन सभी चीजों का त्याग कर सकता हूं और यहीं वास्तविक बलिदान है.”

2. जिंदगी के उद्देश्य को लेकर भगत सिंह कहते है, “जिंदगी का उद्देश्य दिमाग को नियंत्रण में रखना नहीं, बल्कि इसे सामंजस्यपूर्ण रूप से विकसित करना है. इसके बाद मोक्ष प्राप्त करना नहीं ,बल्कि इसका अच्छे तरीके से कैसे इस्तेमाल किया जाए, यह जिंदगी का उद्देश्य है.”

3. “क्रांति मानव जाति का एक अक्षम्य अधिकार है और स्वतंत्रता सभी का एक जन्मजात अधिकार है.”

4. प्यार को लेकर भगत सिंह मानते थे, कि “प्यार हमेशा एक आदमी के चरित्र को ऊंचा करता है. यह उसे कभी कम नहीं करता है, बशर्ते बस प्यार और प्यार हो.”

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