16 बार आतंकियों को खदेड़ने वाले शौर्य चक्र विजेता बलविंदर सिंह भिखीविंड को मारी गोली

आतंकियों ने 10 से 200 लोगों के समूह में जाकर संधू के परिवार पर हमले किए, लेकिन हर बार संधू बंधुओं ने उनकी बहादुर पत्नियों के जगदीश कौर संधू और बलराज कौर संधू के साथ मिलकर आतंकियों को मार गिराया और उनके प्रयास नाकाम कर दिए.

खालिस्तानी आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई के लिए मशहूर बलविंदर सिंह भिखीविंड की शुक्रवार तड़के उनके गांव में दो अज्ञात लोगों ने गोली मारकर हत्या कर दी. बलविंदर सिंह 62 साल के थे. भिखीविंड के बलविंदर सिंह संधू ने 1980 के दशक और 90 के दशक की शुरुआत में आतंकवाद प्रभावित तरन तारन जिले में आतंकवादियों को पकड़ने के लिए कई प्रयास किए थे. इस दौरान संधू पर कई बार हमले किए गए और हर बार वो भारी हथियारों से लैस आतंकवादियों को मारने में सफल रहे.

पंजाब में जब आतंकवाद अपने चरम पर था तब उन्होंने पूरे राज्य में लोगों को इस संकट से बचाव के लिए प्रेरित किया था. संधू का गांव भिखीविंड पंजाब में आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई का एक उदाहरण बना था और इसी गांव में शुक्रवार को उन्हें दो हमलावरों ने गोली मार दी. पुलिस ने फिलहाल ये नहीं बताया है कि मोटरसाइकिल पर हथियारबंद लोग कौन थे और क्या हमलावर खालिस्तानी आतंकवादियों से संबंधित थे. हालांकि इस मामले में जांच जारी है.

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जानकारी के मुताबिक दो आदमी मोटरसाइकिल से गांव आए और स्कूल के बाहर बलविंदर सिंह भिखीविंड का इंतजार करने लगे. जब बलविंदर सिंह वहां आए और उन्होंने गेट खोला, वैसे ही हथियारबंद लोगों ने उन्हें पांच गोलियां मारीं और मौके से भाग निकले. गोलियों की आवाज सुनते ही मौके पर गांव वाले पहुंचे और उन्होंने बलविंदर सिंह भिखीविंड को अस्पताल पहुंचाया. हालांकि अस्पताल पहुंचने पर डॉक्टरों ने बलविंदर सिंह को मृत घोषित कर दिया.

बहादुरी के लिए शौर्य चक्र से हुए थे सम्मानित

बलविंदर सिंह की बहादुरी के चलते उनके चर्चे अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी हुए और वो एक बार नेशनल जियोग्राफिक की डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाई दिए. उनके साहस के लिए उन्हें शौर्य चक्र से भी सम्मानित किया गया था. शौर्य चक्र एक भारतीय सैन्य सम्मान है, जो कि वीरता, साहसी कार्रवाई या आत्म-बलिदान के दिया जाता है. ये सम्मान नागरिकों को भी दिया जा सकता है.

एक पक्के कम्युनिस्ट बलविंदर सिंह भिखीविंड सिख युवाओं के धार्मिक कट्टरपंथीकरण के खिलाफ थे और उन्होंने खालिस्तानी आंदोलन और उसके साथ आए आतंकवाद का विरोध किया था. जब पंजाब आतंकवाद के साये में था, तो बलविंदर और उनके परिवार ने अपने गांव को एक प्रकार का किला बना दिया था. उन्होंने पत्नी और बच्चों समेत परिवार के लोगों को हथियारों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया और आतंकवादियों के खिलाफ लड़ाई लड़ी. उन्होंने कई हमलों का सामना किया और हर बार, आतंकवादियों को पीछे हटने के लिए मजबूर किया.

11 महीनों में परिवार पर हुए 16 हमले

उनके इस साहस के लिए रक्षा मंत्रालय ने उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया. एक आम नागरिक को शौर्य चक्र से सम्मानित किया जाना आम घटना नहीं है. उन्हें मिले शॉर्य चक्र के साइटेशन के मुताबिक, “बलविंदर सिंह संधू और उनके भाई रंजीत सिंह संधू आतंकवादी गतिविधियों के खिलाफ थे. वो आतंकियों की हिट लिस्ट में थे. 11 महीनों की अवधि में आतंकियों ने संधू के परिवार को खत्म करने के 16 प्रयास किए थे. आतंकियों ने 10 से 200 लोगों के समूह में जाकर संधू के परिवार पर हमले किए, लेकिन हर बार संधू बंधुओं ने उनकी बहादुर पत्नियों के जगदीश कौर संधू और बलराज कौर संधू के साथ मिलकर आतंकियों को मार गिराया और उनके प्रयास नाकाम कर दिए.”

“संधू परिवार पर पहला हमला 31 जनवरी 1990 और आखिरी हमला 28 दिसंबर 1991 को हुआ, लेकिन सबसे गंभीर हमला 30 सितंबर 1990 के दिन हुआ. उस दिन करीब 200 आतंकियों ने संधू के घर को चारों तरफ से घेर लिया और लगातार पांच घंटों तक खतरनाक हथियारों जिसमें रॉकेट लॉन्चर भी शामिल थे, से हमला किया. ये हमला पूरी प्लानिंग के साथ किया गया था और उनके घर तक पहुंचने वाले रास्ते में अंडरग्राउंड गन माइंस बिछा दी गई थीं, ताकि पुलिस बल भी मदद के लिए न पहुंच सके.”

“निडर संधू बंधुओं और उनकी पत्नियों ने सरकार द्वारा दी गई पिस्टल और स्टेन गन से उन आतंकियों का सामना किया. संधू परिवार की जवाबी फायरिंग के कारण आतंकवादियों को अपने पैर पीछे खींचने पड़े. इन सभी लोगों ने आतंकवादियों के हमले का सामना करने और उनके बार-बार किए गए जानलेवा प्रयासों को विफल करने के लिए एक उच्च क्रम के साहस और बहादुरी का प्रदर्शन किया है.”

पिछले साल ही हटाई गई थी सुरक्षा

अभी भी सक्रिय खालिस्तानी आतंकी समूहों से मिलने वाली धमकियों के चलते बलविंदर सिंह संधू को पुलिस सुरक्षा दी गई थी. हालांकि पिछले साल ही तरन तारन पुलिस की सिफारिश के बाद उनकी सुरक्षा हटाई गई थी. रिटायर्ड IAS अधिकारी केबीएस सिद्धू ने बलविंदर सिंह की मौत के बाद ट्वीट कर कहा, “वो एक बहादूर शख्स था. 1992 से 1994 के बीच अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर के तौर पर तैनाती के समय मैंने भिखिविंड गांव के उस अकेले शख्स को आतंकवाद के खिलाफ हथियार उठाते देथा था. वो बहुत निडर और बहादुर थे.”

बलविंदर सिंह की मौत की जांच को लेकर पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने SIT गठित कर दी है. SIT फिरोजपुर DIG के नेतृत्व में इस हमले की जांच कर रही है. SIT ने जांच शुरू कर दी है और 4 स्पेशल टीम बनाकर हमलावरों की पड़ताल में जुट गई है.

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