शेख हसीना को आज भी याद होगा इंदिरा गांधी का 44 साल पुराना एहसान

शेख हसीना की पार्टी का नाम अवामी लीग है. जब भी अवामी लीग की सरकार आती है बांग्लादेश और भारत के रिश्ते मधुर हो जाते हैं.
Sheikh Hasina, शेख हसीना को आज भी याद होगा इंदिरा गांधी का 44 साल पुराना एहसान

15 अगस्त, 1975 को जब हिंदुस्तान आजादी का जश्न मना रहा था तो जर्मनी में बांग्लादेश के राजदूत हुमायूं रशीद चौधरी पूरी दुनिया में फोन लगा रहे थे. उनको कहीं से भी सफलता नहीं मिल रही थी.

आखिरकार उन्होंने भारत में अपने समकक्ष अफसरों को फोन लगाकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी से बात करने की इच्छा जताई. किसी वजह से हुमायूं रशीद चौधरी की बातचीत इंदिरा गांधी से नहीं हो पा रही थी. आखिर में कोई रास्ता ना देखकर हुमायूं रशीद चौधरी ने सारे प्रोटोकॉल तोड़ते हुए पीएमओ में फोन लगा दिया. चौधरी साहब बेहद डरे हुए थे, उनको लग रहा था ये हरकत उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल साबित न हो जाए.

खैर, घंटी बजी और जब फोन उठा तो हुमायूं चौधरी हैरान रह गए, फोन भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी ने खुद रिसीव किया था. ऐसा कभी होता नहीं लेकिन उस दिन चौधरी साहब की किस्मत प्रबल रही होगी. फोन उठाते ही हुमायूं चौधरी ने अपना परिचय इंदिरा जी को दिया. प्रधानमंत्री ने उनसे फोन करने का कारण पूछा तो चौधरी साहब ने पूरा मामला समझाया. चौधरी साहब जो चाहते थे इंदिरा जी ने उसे फौरन मान लिया. ये हुमांयु रशीद चौधरी और बांग्लादेश के ऊपर किया गया बहुत बड़ा एहसान साबित होने वाला था.

Sheikh Hasina, शेख हसीना को आज भी याद होगा इंदिरा गांधी का 44 साल पुराना एहसान

अब ये फोन क्यों किया गया था वो जानिए.

दरअसल, बांग्लादेश के संस्थापक नेता शेख मुजीबुर्रहमान की हत्या कर दी गई थी और उनकी बेटियां विदेश में थीं. बड़ी बेटी शेख हसीना अपने पति वाजेद और छोटी बेटी रेहाना के साथ यूरोप में फंसी हुई थी. उनकी भी हत्या हो सकती थी और उस वक्त शेख मुजीबुर्रहमान के इशारों पर नाचने वाले बांग्लादेशी राजदूतों ने पाला बदल लिया था. कई राजदूतों ने दोनों बहनों की मदद करने से इनकार कर दिया था. यहां तक कि उनको अपनी कार तक देने से मना कर दिया था.

इस वक्त पूरी दुनिया में अगर कोई दोनों बेटियों की मदद के लिए सामने आया तो वो थीं भारत की प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी. पीएमओ से मिले निर्देश के बाद एक हफ्ते के अंदर शेख हसीना अपने पति और छोटी बहन के साथ दिल्ली में लैंड करती हैं. यहां रॉ और पुलिस ने गुप्त रुप से उनकी सुरक्षा का जिम्मा उठा रखा था. शेख हसीना को परिवार समेत सीक्रेट शरण दी गई, उनकी सुविधा की सारी व्यवस्था की गई.

भारत आने के कुछ दिनों बाद शेख हसीना और इंदिरा जी की मुलाकात हुई. शेख हसीना ने इंदिरा गांधी से पूछा, ‘क्या आपको पता है ढाका में क्या हुआ था ?’ थोड़ी सी खामोशी के बाद इंदिया ने जवाब दिया ‘मेरी जानकारी के मुताबिक आपके परिवार में कोई भी नहीं बचा है’ . इतना सुनते ही शेख हसीना के सब्र का बांध टूट गया वो फूट-फूट कर रोने लगीं.

Sheikh Hasina, शेख हसीना को आज भी याद होगा इंदिरा गांधी का 44 साल पुराना एहसान

इंदिरा जी ने एक मां की तरह उन्हें गले से लगा लिया. शेख हसीना इस एहसान को अभी तक नहीं भूली होंगी. वो करीब 6 साल हिंदुस्तान में रहीं और फिर जब ढाका पहुंची तो लाखों लोगों ने एयरपोर्ट पर उनका स्वागत किया. उसके बाद जो हुआ वो इतिहास है.

आज शेख हसीना चौथी बार बांग्लादेश की प्रधानमंत्री बन चुकी हैं और भारत के साथ बड़े करार कर रही हैं. इस वक्त भारत को बांग्लादेश जैसे पड़ोसी की जरुरत है क्योंकि पाकिस्तान लगातार इलाके में अशांति फैलाना चाहता है.

शेख हसीना की पार्टी का नाम अवामी लीग है. जब भी अवामी लीग की सरकार आती है बांग्लादेश और भारत के रिश्ते मधुर हो जाते हैं. इसकी वजह शायद इंदिरा गांधी का वो एहसान है जो उन्होंने शेख हसीना पर 44 साल पहले किया था.

अब 82 साल की शेख हसीना शायद आखिरी बार प्रधानमंत्री की कुर्सी पर बैठी हैं. ये अच्छा मौका होगा जब वो भारत के साथ विवादित मुद्दों को सुलझाकर इंदिरा गांधी को सच्ची श्रद्धांजलि अर्पित करें. खासतौर से पाकिस्तान के हर नापाक मंसूबों को नाकामयाब करने में भारत की मदद करें. पाकिस्तान घुसपैठ के लिए बांग्लादेश का इस्तेमाल करना चाहता है लेकिन शेख हसीना के रहते ऐसा होना मुश्किल है. इंदिरा गांधी का एहसान उन्हें आज तक याद होगा.

 

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