अंतिम सांस लेने से पहले शीला दीक्षित ने कांग्रेस कार्यकर्ताओं से कही थी यह बात…

शीला दीक्षित ने हाल में उत्तर पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन वह जीत नहीं पायी थीं.

दिल्ली की पूर्व सीएम शीला दीक्षित आख़िरी समय तक कांग्रेस पार्टी के लिए एक सच्चे सिपाही की तरह काम करती रहीं. शुक्रवार देर रात कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा यूपी पुलिस की निगरानी में चुनार गेस्ट हाउस में थीं. वहीं शीला दीक्षित अपने कार्यकर्ताओं को आगे की लड़ाई कैसे लड़नी है यह बता रही थी.

दिल्ली के कांग्रेस कार्यकर्ताओं से उन्होंने अपने आखिरी संदेश में कहा था कि यदि उत्तर प्रदेश में प्रियंका गांधी और प्रदेश सरकार के बीच गतिरोध समाप्त नहीं होता है तो वे बीजेपी दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करें.

शीला कैबिनेट में स्वास्थ्य मंत्री रहीं किरण वालिया ने उन्हें याद करते हुए यह बात कही. उन्होंने कहा, ‘शुक्रवार की शाम को दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष के तौर पर शीला दीक्षित ने कहा था कि यदि यूपी सरकार और प्रियंका गांधी के बीच गतिरोध समाप्त नहीं होता है तो कार्यकर्ता बीजेपी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन करें.’

उन्होंने आगे कहा, ‘वह आंदोलन के लिए मौजूद नहीं थीं, इसलिए उनकी जगह पर प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष हारुन युसूफ प्रदर्शन का नेतृत्व करने वाले थे.’

बता दें कि यूपी के सोनभद्र में जमीन विवाद में मारे गए 9 लोगों के पीड़ितों से मिलने के लिए प्रियंका गांधी पहुंची थीं. यूपी प्रशासन ने प्रियंका को पीड़ित परिवारों से मिलने से रोकते हुए हिरासत में ले लिया था और इसके विरोध में वह धरने पर बैठ गई थीं.

दिल्ली में पार्टी नेतृत्व का संकट

दिल्ली में विधानसभा चुनाव होने में कुछ ही महीने शेष हैं और ऐसे में पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के अचानक निधन से दिल्ली कांग्रेस के सामने एक ऐसे नेता की तलाश करने की चुनौती उत्पन्न हो गई है, जो उनकी जिम्मेदारी संभाल सके.

शीला दीक्षित के निधन के बाद अब दिल्ली कांग्रेस इकाई के सामने दो चुनौतियां हैं…नया नेता तलाशना और पार्टी में एकजुटता कायम करना. नए नेता को दिल्ली इकाई को एकजुट करने की चुनौती से भी जूझना पड़ सकता है.

एक नेता ने कहा, ‘नेताओं की मौजूदा जमात में कोई भी दीक्षित की लोकप्रियता से मेल नहीं खाता है. तीन कार्यकारी अध्यक्षों हारुन युसूफ, देवेंद्र यादव और राकेश लिलोठिया क्रमश: वरिष्ठ नेताओं जेपी अग्रवाल, एके वालिया और सुभाष चोपड़ा से कनिष्ठ है.’ नेता ने कहा, ‘दीक्षित के अचानक निधन से दिल्ली कांग्रेस बुरी तरह से प्रभावित हुई है.’

अजय माकन ने छोड़ दिया था दिल्ली कांग्रेस अध्यक्ष पद

वर्ष 2013 के बाद से हर प्रमुख चुनाव में तीसरे स्थान पर रह रही कांग्रेस को 2019 के लोकसभा चुनाव में दूसरे स्थान पर रहकर आम आदमी पार्टी (आप) कुछ हद तक किनारे करने में सफल रही थी और उसे कुछ उम्मीद दिखाई दी थी. कांग्रेस पांच सीटों पर दूसरे स्थान पर रही थी.

दीक्षित अगले वर्ष जनवरी-फरवरी में होने वाले विधानसभा चुनाव की तैयारी कर रही थीं. अब पार्टी को चुनाव से पहले संगठन का नेतृत्व करने के लिए एक नए नेता की तलाश करनी होगी. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस समिति के पूर्व प्रमुख अजय माकन ने स्वास्थ्य कारणों से इस्तीफा दे दिया था.

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ऐसा रहा राजनीतिक सफर

शीला दीक्षित 1998 से 2013 के बीच 15 वर्षो तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रहीं. राष्ट्रीय राजधानी में पार्टी को फिर से खड़ा करने के मकसद से उन्हें कुछ महीने पहले ही दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी का अध्यक्ष बनाया गया था.

शीला दीक्षित का जन्म 31 मार्च 1938 को पंजाब के कपूरथला में हुआ था. उन्होंने दिल्ली के कॉन्वेंट ऑफ जीसस एंड मैरी स्कूल से पढ़ाई की और फिर दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कॉलेज से उच्च शिक्षा हासिल की.

दीक्षित पहली बार साल 1984 में उत्तर प्रदेश के कन्नौज से सांसद चुनी गईं. बाद में वह दिल्ली की राजनीति में सक्रिय हुईं.

शीला के पुत्र संदीप दीक्षित भी राजनीति में हैं. वह पूर्वी दिल्ली लोकसभा सीट से 2004 से 2014 बीच दो बार सांसद रहे हैं .

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शीला दीक्षित ने हाल में उत्तर पूर्वी दिल्ली निर्वाचन क्षेत्र से लोकसभा का चुनाव लड़ा था लेकिन वह जीत नहीं पायी थीं. दिल्ली विधानसभा में उन्होंने नयी दिल्ली विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया था.