पीएम से मिलने का मतलब खिचड़ी पकाना ही होता है? शरद पवार की मीटिंग पर बोले संजय राउत

महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर राज्यसभा सांसद ने कहा कि पिछले 10-15 दिनों में सरकार बनाने को लेकर जो भी रुकावटें थी वह ख़त्म हो गई है.

Maharashtra Government formation: महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर बैठकों का दौर जारी है. बुधवार को एनसीपी और कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के बीच सियासी समीकरण को लेकर बात हो सकती है.

वहीं शिवसेना सांसद संजय सिंह राउत ने स्पष्ट किया है कि अगले 5-6 दिनों में महाराष्ट्र में सरकार बनने का रास्ता साफ़ हो जाएगा. सरकार बनाने को लेकर चर्चा जारी है और जल्द ही राज्य में एक मज़बूत सरकार बनेगी.

एनसीपी प्रमुख शरद पवार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच आज होने वाली बैठक को लेकर शिवसेना सांसद ने कहा कि ‘क्या प्रधानमंत्री से मुलाक़ात का मतलब खिचड़ी पकाना ही होता है? प्रधानमंत्री पूरे देश का होता है. महाराष्ट्र के किसान बुरे दौर से गुज़र रहे हैं. पवार साहब और उद्धव ठाकरे हमेशा किसानों के बारे में सोचते हैं.’

राउत ने आगे कहा, ‘यदि उद्धव ठाकरे किसानों के मुद्दे को लेकर दिल्ली आते हैं और सभी सांसद अगर पीएम से मिलते हैं तो क्या खिचड़ी ही पक रही है. संसद के अंदर या बाहर कोई भी प्रधानमंत्री से मुलाक़ात कर सकता है. पवार साहब किसानों के मुद्दों को जानते हैं और राज्य के हालात से भी वाक़िफ़ हैं.’

शिवसेना सांसद ने कहा, ‘हमने भी पवार साहब से किसानों के मुद्दे पर पीएम मोदी से बात करने को कहा था. महाराष्ट्र के सभी सांसद पीएम से मिलकर वहां के किसानों की हालत से उनको अवगत कराएंगे और बेहतर हालात सुनिश्चित करेंगे.’

वहीं महाराष्ट्र में सरकार बनाने को लेकर राज्यसभा सांसद ने कहा कि पिछले 10-15 दिनों में सरकार बनाने को लेकर जो भी रुकावटें थी वह ख़त्म हो गई है. गुरुवार दोपहर 12 बजे तक आपके सामने पूरी तस्वीरें साफ़ हो जाएंगीं.

गौरतलब है कि एनसीपी प्रमुख शरद पवार आज (बुधवार) दोपहर 12 बजे पीएम मोदी से मुलाक़ात करने वाले हैं. इस दौरान वो महाराष्ट्र के किसानों का मुद्दा उनके सामने रखेंगे.
हालांकि मीडिया गलियारे में यह भी कहा जा रहा है कि इस मुलाक़ात के दौरान पीएम मोदी पवार के सामने राष्ट्रपति पद का ऑफ़र दे सकते हैं.

ज़ाहिर हैं महाराष्ट्र में बीजेपी-शिवसेना ने एनडीए गठबंधन के अंतर्गत साथ चुनाव लड़ा था. लेकिन चुनाव परिणाम के बाद सराकर बनाने के फॉर्मूले पर सहमति नहीं बनने का हवाला देते हुए शिवसेना गठबंधन से अलग हो गई.

ऐसे में बीजेपी भी शिवसेना को सत्ता से दूर रखने की कोशिश कर सकती है. यह ऑफ़र उसी दिशा में सोच समझकर उठाया गया क़दम साबित हो सकता है.

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