‘भगवान इंद्र का सिंहासन लाकर दे तब भी बीजेपी के साथ नहीं जाएगी शिवसेना’

इस बीच, शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि इस महीने के आखिर तक महाराष्ट्र को नयी सरकार मिलने की पूरी संभावना है.

महाराष्ट्र में कांग्रेस और एनसीपी के सहयोग से शिवसेना सरकार बनाने जा रही है. तीनों पार्टी के बीच लगभग सभी मुद्दे तय हो गए हैं. वहीं कई राजनीतिक जानकार शिवसेना के बीजेपी से अलग होने की बात को पचा नहीं पा रहे हैं. उनका मानना है कि दोनों पार्टी हिंदुत्व के मुद्दे पर राजनीति करती है ऐसे में दोनों पार्टियां क्या भविष्य में एक नहीं हो सकती?

शिवसेना सांसद संजय राउत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया है कि उनकी पार्टी को भगवान इंद्र के सिंहासन का प्रस्ताव भी मिलेगा तब भी वह बीजेपी के साथ नहीं आएगी. कांग्रेस और राकांपा के साथ वाला त्रिदलीय गठबंधन जब सत्ता में आएगा तब महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री का पद उनकी पार्टी को ही मिलेगा.

अटकलें थी कि बीजेपी मुख्यमंत्री पद शिवसेना के साथ साझा करने को तैयार है. इस बारे में सवाल पर राउत ने कहा, ‘ प्रस्तावों के लिए वक्त अब खत्म हो चुका है. महाराष्ट्र की जनता शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहती है.’ शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि राज्य में पांच सालों के लिए मुख्यमंत्री हमारी पार्टी का ही होगा.

महाराष्ट्र में सरकार गठन की कवायद में जुटी कांग्रेस और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (राकांपा) ने मैराथन बैठकों के बाद गुरुवार को सभी मुद्दों पर सहमति बना ली है और अब नई सरकार के गठन और इसकी रूपरेखा के बारे में शुक्रवार को घोषणा की जा सकती है.

सूत्रों का कहना है कि सरकार गठन को लेकर बनने वाली रूपरेखा और साझा न्यूनतम कार्यक्रम से जुड़े बिंदुओं को अंतिम रूप देने के मकसद से कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल शुक्रवार दोपहर तक मुंबई पहुंचेंगे.

गुरूवार और राकांपा के वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण ने कहा कि कांग्रेस और राकांपा के बीच सभी मुद्दों पर बातचीत हो गई है और सहमति भी बन गई है.
चव्हाण के मुताबिक अब दोनों पार्टियां शुक्रवार को मुंबई में समाजवादी पार्टी एवं स्वाभिमानी शेतकारी संगठन जैसे अपने छोटे सहयोगी दलों और शिवसेना के साथ बातचीत करेंगी. उन्होंने कहा कि शुक्रवार को मुंबई में ही इस बारे में विचार होगा कि नई सरकार का क्या स्वरूप होगा.

सूत्रों का कहना है कि शुक्रवार को ही मुंबई में सरकार गठन तथा इसकी पूरी रूपरेखा के बारे में घोषणा की जा सकती है. इस बैठक में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, जयराम रमेश और मल्लिकार्जुन खड़गे शामिल थे. राकांपा की तरफ से प्रफुल्ल पटेल, सुप्रिया सुले, अजीत पवार, जयंत पाटिल और नवाब मलिक शामिल हुए.

इससे पहले कांग्रेस की सर्वोच्च नीति निर्धारण इकाई कांग्रेस कार्य समिति (सीडब्ल्यूसी) ने महाराष्ट्र में शिवसेना के साथ सरकार गठन के लिए आगे बढ़ने को लेकर बृहस्पतिवार को स्वीकृति प्रदान कर दी.

कांग्रेस और राकांपा के वरिष्ठ नेताओं ने बुधवार को भी मैराथन बैठक की थी और इसके बाद ऐलान किया था कि वे जल्द ही राज्य में शिवसेना के साथ मिलकर नयी सरकार का गठन करेंगे.

इस बीच, शिवसेना के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने कहा कि इस महीने के आखिर तक महाराष्ट्र को नयी सरकार मिलने की पूरी संभावना है.

कांग्रेस सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस-राकांपा के नेता शिवसेना नेताओं के साथ संपर्क में बने हुए थे और साझा न्यूनतम कार्यक्रम लगभग तैयार है. एक सूत्र ने बताया कि साझा न्यूनतम कार्यक्रम में किसानों के मुद्दों को प्राथमिकता मिलने वाली है.

गत 24 अक्टूबर को महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के नतीजे आने के बाद से सरकार गठन को लेकर लगातार असमंजस की स्थिति बनी हुई है. चुनाव में बीजेपी-शिवसेना गठबंधन को बहुमत मिला था, लेकिन ढाई साल के लिए मुख्यमंत्री पद पर शिवसेना के दावे के बाद दोनों के रास्ते अलग हो गए.

इस चुनाव में बीजेपी और शिवसेना ने क्रमश: 105 और 56 सीटों पर जीत दर्ज की जबकि कांग्रेस और राकांपा ने क्रमश: 44 और 54 सीटें हासिल कीं.