’35A पर महबूबा मुफ्ती का बयान आतंकवाद की भाषा, आतंकी घोषित कर शाह करें कार्रवाई’

कानून के अनुसार महबूबा मुफ्ती को आतंकवादी घोषित कर जेल में भेजा जाना चाहिए. नहीं तो कश्मीर में दंगे आदि कराने की उनकी योजना सफल हो जाएगी.

  • TV9.com
  • Publish Date - 9:02 am, Mon, 5 August 19
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती

आतंकवादी हमले के डर से मोदी सरकार ने अमरनाथ यात्रा बीच में ही रोक दी है. सरकार की ओर से आदेश दिया गया है कि यात्रा के लिए पहुंचे हजारों हिंदू यात्री लौट जाएं.

हमारे ही देश की भूमि पर हमारे ही नागरिकों को लौटने का आदेश दिया गया है. ये आदेश क्यों दिया गया यह भविष्य में पता चलेगा.

अमरनाथ यात्रा के पहले गृहमंत्री अमित शाह श्रीनगर गए थे. गत 25 वर्षों का इतिहास रहा कि जब-जब कोई गृहमंत्री कश्मीर पहुंचा है तब-तब आतंकवादियों और अलगाववादियों ने बंद का आह्वान कर गृहमंत्री का स्वागत किया है.

अमित शाह जब गृहमंत्री के रूप में श्रीनगर गए तब इस प्रकार के बंद का कोई आह्वान नहीं किया गया. ये आशादायक लक्षण हैं. शाह के आगमन के समय आतंकियों द्वारा दुम दबाने के ये लक्षण थे. लेकिन अब आतंकवादियों के डर से अमरनाथ यात्रा को समेटने का समय क्यों आया?

यात्रा मार्ग में आतंकवादी छावनियों का पता चला. कुछ आतंकवादी पकड़े गए और उनसे बड़ी मात्रा में शस्त्र और गोला-बारूद बरामद हुआ. इसका मतलब ये हुआ कि आतंकवादियों को अमरनाथ यात्रियों पर हमला करना था.

सरकार ने यात्रियों के प्राण भले ही बचाए हों, फिर भी आतंकवादियों की पूंछ छटपटा रही है और नाग का फन फुंफकार रहा है ये स्पष्ट हो गया है.

केंद्र में अब कांग्रेस या हिंदू विरोधी सरकार नहीं है. आतंकवादियों के सामने दबनेवाली सरकार तो बिल्कुल नहीं है.

आज कांग्रेस की कमजोर सरकार केंद्र में होती और अमरनाथ यात्रा को समेटकर श्रद्धालुओं को वापस बुलाया गया होता तो हिंदुत्ववादियों की दृष्टि से ये सरकार की अमानवीयता

साबित होती. लेकिन अब ऐसा नहीं कहा जा सकेगा क्योंकि अब हिंदुत्ववादियों की सरकार है इसलिए इस पर चिंता होती है.

अमरनाथ यात्रा के बाद सरकार ने किश्तवाड़ की चंडी माता की माछिल यात्रा को भी सुरक्षा कारणों का हवाला देकर रोक दिया है. ये उचित लक्षण नहीं हैं. कश्मीर से आतंकवादियों का समूल नाश करने के लिए सरकार सतत प्रयासरत है, इसमें कोई शक नहीं!

कश्मीर में गहमा-गहमी का माहौल दिख रहा है और सरकार कौन-सा कदम उठाएगी इस पर गोपनीयता बरकरार है.

जिस प्रकार देश में ‘नोटबंदी’ होने की जानकारी प्रधानमंत्री मोदी और अन्य दो-चार लोगों को ही थी, कहते हैं रिजर्व बैंक के गवर्नर को भी अंधेरे में रखा गया था, उसी प्रकार कश्मीर में क्या होनेवाला है ये बात दो-चार लोगों को ही पता होगी.

गत एक सप्ताह में कश्मीर में 10 हजार से अधिक सैनिकों को भेजा गया है. अब फिर से 28 हजार जवानों को अलग-अलग क्षेत्रों में तैनात किया गया है.

अगर ये आतंकवाद विरोधी कार्रवाई के लिए कड़े कदम उठाने की तैयारी है तो सरकार को नि:संदेह आगे बढ़ना चाहिए.

कश्मीर का मुद्दा चर्चा या संवाद से दूर होगा, इस भ्रम से निकलना होगा. कश्मीर का मुद्दा अब सेना की कार्रवाई से ही दूर होगा तथा अब वो समय आ चुका है.

गृहमंत्री शाह इस प्रकार की कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं तो देश उनके साथ खड़ा रहेगा.

महबूबा मुफ्ती और उमर अब्दुल्ला सहित अन्य नेता पसोपेश में हैं कि कश्मीर में इतनी बड़ी संख्या में सेना के जवान क्यों भेजे जा रहे हैं? लोगों को जो लगता है वो लगने दो लेकिन गृहमंत्री को जो लगता है वो अब होना चाहिए.

महबूबा मुफ्ती को डर है कि जम्मू-कश्मीर से ’35A’ धारा हटाने की हलचल शुरू है और उसी के लिए कश्मीर में इतनी बड़ी संख्या में सेना के जवान भेजे गए हैं.

’35A’ धारा कश्मीर को हिंदुस्तान से तोड़नेवाली और अन्य राज्यों की अपेक्षा उसे अलग दर्जा देनेवाली धारा है. ये धारा 370 से भी घातक है इसलिए ये धारा हटानी आवश्यक है और यह मोदी सरकार का कर्तव्य है. लेकिन महबूबा मुफ्ती ने धमकी दी है कि ’35A’ धारा को हाथ लगानेवालों का हाथ जला देंगे.

कश्मीर की जनता बलिदान के लिए तैयार रहे, ऐसी अलगाववादी और बागी भाषा का प्रयोग करते हुए उन्होंने चुनौती दी है. गृहमंत्री इसे बिल्कुल सहन न करें. ये आतंकवाद की भाषा है. गृहमंत्री ने आतंकवाद विरोधी कानून को कठोर किया और संसद में उसे मंजूरी दिलवाई. इस नए कानून के अनुसार किसी भी व्यक्ति को आतंकवादी घोषित करके उसे गिरफ्तार किया जा सकता है.

इस कानून के अनुसार महबूबा मुफ्ती को आतंकवादी घोषित कर जेल में भेजा जाना चाहिए. नहीं तो कश्मीर में दंगे आदि कराने की उनकी योजना सफल हो जाएगी. 15 अगस्त को जब स्वतंत्रता दिवस की सुबह होगी तब वहां के हर गांव में लटकाए हरे कपड़े को उतारकर वहां तिरंगा फहराना चाहिए.

प्रधानमंत्री मोदी लाल किले से कश्मीर के बारे में क्या घोषणा करते हैं, वे ’35A’ हटाते हैं या 370 धारा हटाकर कश्मीर को सही मायनों में हिंदुस्तान के नक्शे में लाते हैं इस बाबत उत्सुकता बनी हुई है. अमरनाथ यात्रा को समेटना टीका-टिप्पणी का विषय है लेकिन कभी-कभी चार कदम आगे बढ़ने के लिए एक कदम पीछे जाना ठीक रहता है.

कश्मीर में क्या होगा ये मोदी और शाह ही बता पाएंगे.