मुंबई ब्रिज हादसा: इन दो वजहों ने बचा ली कई लोगों की जान!

घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के वक्त फुट ओवरब्रिज के पास ट्रैफिक सिग्नल लाल था. कई लोग सिग्नल के ग्रीन होने का इंतजार कर रहे थे.

मुंबई: छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी) रेलवे स्टेशन के पास एक फुटओवर ब्रिज गिरने से कम से कम छह लोगों की मौत हो गई. साथ ही 31 लोग के घायल भी हैं. मरने वालों में तीन महिलाएं भी शामिल हैं. वहीं, BMC और रेलवे अधिकारियों के खिलाफ लापरवाही का मामला दर्ज कर लिया गया है.

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडनवीस ने इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. उन्होंने कहा, “हादसे के दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा. ब्रिज का ऑडिट कराने वालों पर कार्रवाई की जाएगी.”

हादसे के वक्त था लाल सिग्नल
घटनास्थल पर मौजूद लोगों ने बताया कि हादसे के वक्त फुट ओवरब्रिज के पास ट्रैफिक सिग्नल लाल था. कई लोग सिग्नल के ग्रीन होने का इंतजार कर रहे थे. अगर ऐसा नहीं होता तो कई सारे मोटर चालक सीएसएमटी रेलवे स्टेशन के पास हादसे के दौरान उसके नीचे से गुजर रहे होते और इसकी चपेट में आ जाते.

एक प्रत्यक्षदर्शी ने बताया,”यह ऐसा वक्त था जब पूरी मुंबई घर जाने के लिए इस ओवरब्रिज से गुजरती है. मुझे भी घर जाने की जल्दी थी. लेकिन अब मैं राहत महसूस कर रहा हूं कि उस वक्त बत्ती लाल थी. नहीं तो मैं भी उसकी चपेट में आ जाता.”

हादसा सुबह में होता तो हालात…
हादसे के कुछ समय बाद घटनास्थल पर कई सारे लोग इक्ट्ठा हो गए. एक स्थानीय नागिरक ने मीडिया को बताया कि अगर ये हादसा में सुबह में होता तो हालात और भी गंभीर हो सकते थे. शाम के समय इस ब्रिज पर ट्रैफिक बहुत ज्यादा होता है. ऐसे में ज्यादातर लोग अंदर से होकर गुजरते हैं.

उन्होंने बताया कि हादसे में ब्रिज का मलवा गाड़ियों पर गिरा है. हादसा गुरुवार शाम करीब 7.30 बजे हुआ. ब्रिज के पास ही एक स्कूल है. और सुबह के समय ब्रिज से होकर बहुत सारे स्कूली बच्चे जाते हैं.

यहां पर हुई बड़ी लापरवाही!
साल 2017 के सितंबर महीने में मुंबई में ही एलफिंस्टन ब्रिज हादसा हुआ था. ब्रिज के गिरने से 23 लोगों की मौत हो गई थी. घटना के बाद सरकार ने राज्य के सभी ओवरब्रिजों का ऑडिट कराने का आदेश दिया था. सरकार का आदेश था कि यह कार्य तीन महीने के अंदर हो जाना चाहिए. हालांकि इसमें देरी हुई थी. और ऑडिट रिपोर्ट 2018 के सितंबर माह में बीएमसी कमिश्नर को सौंपी गई.

अधिकारियों ने बताया कि यह फुटओवर ब्रिज करीब 35 साल पुराना है. साल 2010-11 के बीच इसकी आखिरी बार मरम्मत की गई थी. वहीं, साल 2016 में स्वच्छ भारत अभियान के तहत ब्रिज के उत्तरी हिस्से के सौंदर्यीकरण की काम किया गया था. हालांकि, किसी तरह का मरम्मत कार्य नहीं हुआ था.