सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सोशल मीडिया मामला, जनवरी में होगी सुनवाई

वाट्सएप, फेसबुक जैसी कंपनियों को भारत नहीं आना चाहिए था, यदि उनके पास डिक्रिप्ट करने की तकनीक नहीं थी.

मद्रास, मध्यप्रदेश, बॉम्बे हाईकोर्ट में सोशल मीडिया, फेसबुक और वाट्सएप के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में होगी. सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाओं को हाईकोर्ट से सुप्रीम कोर्ट ट्रांसफर किया है. इस मामले की सुनवाई जनवरी में होगी. याचिकाओं में सोशल मीडिया के लिए गाइडलाइन बनाने की मांग की गई है.

  • SC का कहना है कि, सवाल यह है कि क्या अदालतें वाट्सएप, फेसबुक को इन्फॉर्मेशन को डिक्रिप्ट करने के लिए बाध्य कर सकती हैं?
  • क्या डिक्रिप्शन करने के लिए सरकार की अपनी एजेंसी नहीं होनी चाहिए?
  • यह पता लगाने की आवश्यकता है कि क्या उनकी देयता सरकार की सहायता तक सीमित है, जो सरकार, कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ डिक्रिप्ट करने के लिए है.
  • क्या कानून उन पर डिक्रिप्ट का दायित्व डाल सकता है?

Social Media, सुप्रीम कोर्ट पहुंचा सोशल मीडिया मामला, जनवरी में होगी सुनवाई

अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल का कहना है कि इन कंपनियों को भारत नहीं आना चाहिए था, यदि उनके पास डिक्रिप्ट करने की तकनीक नहीं थी या वे सहायता नहीं कर सकते थे.

सुप्रीम कोर्ट यह देखता है कि यह तकनीकी पहलुओं का विशेषज्ञ नहीं है, लेकिन सवाल यह है कि तमिलनाडु सरकार का क्या बिचौलियों का कोई कानूनी दायित्व है? एजी, कहते हैं कि उनके पास विशेषज्ञ हैं लेकिन उन्हें पहुंच की आवश्यकता होगी.

फेसबुक के लिए मुकुल रोहतगी का कहना है कि बिचौलियों की कोई कानूनी बाध्यता नहीं है.