Lockdown: टीचर या डबल PhD ही नहीं, लाख रुपये सैलरी वाले टेक्नोक्रेट भी MGNREGA मजदूर

MGNREGA वर्क साइट पर हाईली क्वालीफाइड टीचर मौजूद हैं जो मज़दूरी कर रहे हैं तो एक लाख की सैलरी वाले सॉफटवेयर इंजीनियर भी. तेलंगाना में लगभग 10 हज़ार मान्यता प्राप्त और 8,000 गैर मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों ने पिछले दो महीने से अपने कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया है.

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  • Publish Date - 9:49 am, Thu, 21 May 20

कोरोनावायरस (Coronavirus) संकट से जूझ रहे देश में कुछ कहानियां ऐसी हैं जो आपको रुला देने के लिए काफी हैं. आपको शायद यकीन न हो लेकिन देश में ऐसे कई हाईली क्वालीफाइड लोग हैं जो वो सब करने को मजबूर हैं जिसके बारे में शायद उन्होंने कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा. हैदराबाद (hyderabad) के रहने वाले चिरंजीवी और उनकी पत्नी पद्मा की कहानी कुछ ऐसी ही है.

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एक ऑनलाइन मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक चिरंजीवी (Chiranjeevi) और उनकी पत्नी पद्मा (Padma) दोनों टीचर हैं, चिरंजीवी के पास पोस्ट ग्रेजुएशन के साथ ही बीएड की डिग्री है. वो पिछले 12 साल से सोशल स्टडीज के टीचर हैं, वहीं उनकी पत्नी पद्मा ने MBA किया हुआ है और वो भी प्राथमिक विद्यालय में टीचर हैं.

मजबूरी में बन गए मज़दूर

इन सबके बावजूद कोरोना की मार इस दंपति पर ऐसी पड़ी कि ये मज़दूरी करने को मजबूर हो गया. पिछले कुछ दिनों से दोनों ही अपने गांव भोनगीर-यदादरी के नज़दीक मनरेगा (MGNREGA) की साइट पर मज़दूरी कर रहे हैं. वज़ह ये है कि कोरोनावायरस संकट के चलते हुए लॉकडाउन में पिछले दो महीने से दोनों की ही सैलरी नहीं आई है. स्थिति ये है कि कोई ये बताने वाला भी नहीं है कि सैलरी कब तक आएगी.

चिरंजीवी कहते हैं कि 200-300 रुपये की मज़दूरी से कम से कम घर के लिए सब्जी का इंतज़ाम हो जाता है. दंपति कहता है कि उनका छह लोगों का परिवार है जिसमें मां-बाप और दो बच्चे हैं. बिना सैलरी के गुज़ारा करना बेहद मुश्किल हो रहा है.

हज़ारों टीचर्स को नहीं मिला वेतन

कोरोना लॉकडाउन का असर हर सेक्टर पर पड़ा है. अनुमान के मुताबिक लगभग 10 हज़ार मान्यता प्राप्त और 8,000 गैर मान्यता प्राप्त शिक्षण संस्थानों ने पिछले दो महीने से अपने कर्मचारियों का वेतन नहीं दिया है. एक जूनियर कॉलेज में जीव विज्ञान पढ़ाने वाले कृष्णा कहते हैं कि प्राइवेट स्कूलों (Private schools) में ऐसा होना असामान्य नहीं है, क्योंकि ज़्यादातर इन जगहों पर साल में 10 महीने का ही वेतन मिलता है. लेकिन इस बार लॉकडाउन के चलते हमें मार्च का भी वेतन नहीं मिला.

मुख्यमंत्री ने नहीं निभाया वादा

चिरंजीवी कहते हैं कि प्राइवेट प्राइमरी स्कूलों में जहां 5 से 10 हज़ार रुपये टीचर्स को मिलते हैं, वहीं हाईस्कूल टीचर्स को 20 हज़ार. जबकि जूनियर कॉलजे के लेक्चरर को महज़ 25 हज़ार रुपये ही मासिक वेतन मिलता है. चिरंजीवी नाराज़ होते हुए कहते हैं कि मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव (K. Chandrashekar Rao) ने सत्ता में आने से पहले शिक्षकों की भर्ती की वादा किया था, लेकिन मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्होंने वादा पूरा नहीं किया.

बेरोज़गारों को रोज़गार दे सरकार

इन सबसे अलग कई टीचर्स को प्राइवेज स्कूलों और कॉलेज से लॉकडाउन के बीच निकाल दिया गया. स्कूल बंद होने की वज़ह से इनमें से ज़्यादातर स्कूल टीचर मज़दूरी करने को मजबूर हैं, क्योंकि उन्हें नहीं पता है कि स्कूल कब खुलेंगे. चिरंजीवी आगे कहते हैं कि पिछले 12 साल से मैं सोशल साइंस के टीचर के तौर पर काम कर रहा था, लेकिन लॉकडाउन की वज़ह से मैने अपनी जॉब गंवा दी और अब मुझे मज़दूरी करनी पड़ रही है. ये सिर्फ मेरी बात नहीं है, इस वक्त हज़ारों ऐसे युवा हैं जिनकी नौकरी चली गई है और वो इस तरह के कामों में लगे हुए हैं. ऐसे में मैं सरकार से ये आग्रह करना चाहता हूं कि वो इस तरफ ध्यान दे और बेरोज़गार लोगों को रोज़गार मुहैया कराए.

डबल पीएचडी भी कर रहा मज़दूरी

MGNREGA वर्क साइट पर ऐसे और भी हाईली क्वालीफाइड टीचर मौजूद हैं जो मज़दूरी कर रहे हैं, इन्हीं में से हैं डबल पीएचडी टीचर रमेश और पीटी सर कृष्णा. रमेश कहते हैं कि उनके मां-बाप भी मज़दूरी करने जा रहे हैं. उन्हें इस चीज़ का बेहद बुरा लगता है कि उन्हें हाईली क्वालीफाइड होने के बावजूद वो काम करना पड़ रहा है जो अनपढ़ लोग कर रहे हैं. मेरे मां-बाप का अफसोस होता है कि इतनी पढ़ाई करने के बावजूद मुझे भी उनके साथ मज़दूरी करनी पड़ रही है. लेकिन हमारे पास च्वॉइस ही क्या है, इस समय घर चलाने के लिए पैसों की ज़रूरत है.

कृष्णा फिजिकल एजुकेशन के टीचर हैं और वो कहते हैं कि लॉकडाउन (Lockdown) की वज़ह उन्हें काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. कोई काम नहीं है इस वज़ह से मनरेगा की साइट पर काम करना पड़ रहा है. यही वज़ह है कि पत्नी के साथ मैं ये काम कर रहा हूं, इससे कम से कम हमारे खाने का इंतज़ाम हो जा रहा है.

दिहाड़ी मज़दूर बनी 1 लाख कमाने वाली स्वप्ना

ये सिर्फ टीचर्स की बात नहीं है, बल्कि सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल स्वप्ना भी मनरेगा के तहत मज़दूरी करने जा रही हैं. कुछ महीने पहले तक एक लाख रुपये महीना कमाने वाले स्वप्ना कहती हैं कि हमारे पास गुज़ारा करने का और कोई साधन नहीं है. मैं कब तक अपनी सेविंग्स से गुज़ारा कर सकती हूं. मैं मज़दूरी नहीं करना चाहती, लेकिन क्या करूं मेरी सेविंग्स कब तक चलेंगी. मुझे कुछ इमरजेंसी के लिए बचत करनी होगी. ऐसे में जब मेरे ससुराल वाले मज़दूरी करने जा रहे हैं तो अब मैं भी उनके साथ मज़दूरी करूंगीं मैं सोचती हूं कि किसी भी काम को करने में शर्म नहीं महसूस करनी चाहिए. गुज़ारा करने के लिए कुछ तो करना ही पड़ेगा.

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