जब आतंकी बुरहान मारा गया था तब भी 3 महीने के लिये प्रतिबंध लगे थे, SC में बोले तुषार मेहता

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में कश्मीर के आंकडे पेश किए.

कश्मीर लॉकडाउन के मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार को सुनवाई हुई. जस्टिस रमन्ना ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से कहा, ”आपको हर सवाल (जम्मू-कश्मीर प्रतिबंधों पर) का जवाब देना होगा. याचिकाकर्ताओं ने विस्तार से तर्क दिया है. आपके काउंटर हमें किसी निष्कर्ष पर आने में मदद नहीं करते हैं. आप जिस मामले पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे रहे हैं, उसे न दें.”

पढ़ें मुख्य प्वाइंट-

  • सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने पीठ से कहा- हर दिन स्थिति में सुधार हो रहा है. यहां प्रतिवादी कि ओर से प्रस्तुत तथ्य (याचिकाकर्ताओं द्वारा) तथ्यात्मक रूप से गलत हैं.
  • याचिकाकर्ताओ की तरफ से बहस कर रही वकील मीनाक्षी अरोड़ा के आरोपों पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विरोध किया.
  • मेहता ने कहा कि अरोड़ा याचिका में लगाए गए आरोपों से अलग बहस कर रही हैं और ऐसे गंभीर आरोप लगा रही हैं जो याचिका में नहीं हैं.
  • जस्टिस रमन्ना ने तुषार मेहता से कहा कि आपके जब जवाब देने का समय आएगा तो आप इन बातों को रखिएगा.
  • मीनाक्षी अरोड़ा ने कहा कि देश में संविधान के मुताबिक किसी मुद्दे पर लोगों के असहमत होने पर शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार है. लेकिन इसकी भी इजाजत कश्मीर में नहीं दी गई.

एसजी तुषार मेहता ने कश्मीर के आंकडे किए पेश 

  • कुल आतंकवादी – 71 हजार 38 की सूचना थी
  • 2019 में मारे गए आतंकवादी – 365
  • मारे गए नागरिक – 14 हजार
  • सुरक्षा के जवान शहीद हुए – 5 हजार 292
  • जो आतंकवादी अब तक मारे गए उनकी संख्या – 22 हजार 536 है.

सॉलिसिटर जनरल ने कहा, काम करने की स्थिति में अब सुधार आया है. अन्य वर्गों को रोजगार और अन्य अवसरों को प्राप्त करेंगे. 12% एसटी होने के बावजूद उनकी कोई पहचानें नहीं थी. अब उन्हें उनकी पहचान और संरक्षण मिलेगा.

संपत्ति और महिलाओं के अन्य सभी अधिकारों की रक्षा की जाएगी. महिलाओं से संबंधित सभी केंद्रीय अधिनियम लागू होंगे. बाल विवाह निषेध अधिनियम, किशोर न्याय अधिनियम, घरेलू हिंसा अधिनियम लागू होना.

सैकड़ों लोगों के अनुकूल कानून लागू होने से पहले जो उपलब्ध नहीं थे. प्रतिबंधों के कारण जम्मू-कश्मीर पर कोई केंद्र अधिनियम लागू नहीं था. अब कई कानून उनके विकास के लिए लागू होंगे शिक्षा का अधिकार पहले लागू नहीं था. अब लागू होता है. उन्होंने कहा कि सुरक्षा के लिए, हालात पर काबू रखने के लिए कुछ पाबंदियां जरूरी हैं.

‘प्रेस की स्वतंत्रता बरकरार रही’

तुषार मेहता ने कहा, प्रेस की स्वतंत्रता बरकरार रही. चार साल पहले जब आतंकी बुरहान बानी मारा गया था तब भी तीन महीने के लिये इस तरह सभी प्रतिबंध लगे थे. तब याचिकाकर्ता अनुराधा भसीन अदालत नहीं आईं.

आज अपनी सुविधा के हिसाब से अदालत में चैलेंज कर रहीं हैं. सभी न्यूज़ पेपर पब्लिश किये जा रहे हैं. सिर्फ उनको ही पब्लिश करने में समस्या है जबकि वो अपना न्यूज़ पेपर दूसरी जगह से पब्लिश कर रहीं हैं.

‘पत्रकार सावधानी बरतें’

जस्टिस रमन्ना ने कश्मीर मामले पर किये गए ट्वीट पर नाराजगी जताई. ट्वीट में मीनाक्षी अरोड़ा की तरफ से कही गई बात को जस्टिस रमन्ना के हवाले से लिखा गया था. जिसमें लिखा था कि ”जस्टिस रमन्ना ने कहा कि क्या पूरे कश्मीर की जनता को आतंकी की तरह व्यवहार किया गया”

जस्टिस रमन्ना ने लंच के बाद कोर्ट बैठते ही कहा कि पत्रकार ऐसे संवेदनशील मामले में समझदारी से रिपोर्ट करें. इससे गलत संदेश जाता है. लिहाजा पत्रकार सावधानी बरतें.

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