रूल ऑफ लॉ पर चलता है देश, पुलिस कर्मियों को दोषी या बेगुनाह तय करने का अधिकार नहीं: उज्जवल निकम

उज्जवल निकम ने कहा, "अभियुक्त अगर पुलिस का हथियार खींचते हैं तो सवाल उठता है कि इसमें पुलिस की लापरवाही तो नहीं थी."

हैदराबाद की एक पशु चिकित्सक युवती से सामूहिक दुष्कर्म करने के बाद उसकी हत्या करने के चार आरोपियों को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया. विशेष सरकारी वकील उज्जवल निकम ने हैदराबाद एनकाउंटर को लेकर पुलिस पर उठाए हैं.

उज्जवल निकम ने कहा, “हैदराबाद की घटना इतनी गंभीर थी कि आज चार अभियुक्तों के मारे जाने की खबर आते ही आम आदमी का खुश होना स्वभाविक है. आम आदमी की हैसियत से मैं जरूर कहूंगा कि पीड़ित को न्याय मिला है. लेकिन कानून के एक अभ्यासक के तौर पर मैं कहूंगा कि अगर जनता इसका स्वागत करती है तो हमें अन्तर्मुख होने की जरूरत है.”

उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों का कहना है कि अभियुक्त भाग रहे थे. भागते समय उन्होंने उन पर पत्थर फेंके और उनके हथियार खींचने की कोशिश की. अगर पुलिस का ये कहना है तो उन्हें एनकाउंटर में मार डालना न्याय उचित नहीं है.

उज्जवल निकम ने कहा, “प्रथम दृष्टया तो यह लगता है कि पुलिस ने जानकारी जुटाने के लिए इन्हें बाहर निकाला था. जाहिर है कि उस उक्त उनके हाथ हथकड़ियां रही होंगी. पुलिस ने ये कोशिश भी की होगी कि उनके पास कोई हथियार न हो. ऐसे में अभियुक्त अगर पुलिस का हथियार खींचते हैं तो सवाल उठता है कि इसमें पुलिस की लापरवाही तो नहीं थी.”

उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के मुताबिक इस पूरे मामले पर न्यायिक जांच गठित होगी. न्यायिक जांच के बाद ही इसकी सत्यता सामने आ सकती है कि फायरिंग जस्टिफाइड हुई या अनजस्टिफाइड.

उज्जवल निकम ने कहा कि ‘मैं इस बात से डर रहा हूं कि अगर इस प्रकार आम आदमी की भावना हो जाए कि शासन दंड देना ही उचित है, तो हमारी कानून व्यवस्था का क्या होगा. हमारा देश रूल ऑफ लॉ पर चलता है. ऐसे में पुलिस कर्मियों को ये अधिकार नहीं कि कौन दोषी और कौन बेगुनाह है.’

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