LAC पर जारी गतिरोध ने भारत चीन संबंधों को किया काफी प्रभावित- विदेश मंत्री

एस जयशंकर ने कहा, "सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति होनी चाहिए. अगर हम शांति बनाने को लेकर भी परेशान हैं, तो जाहिर तौर पर फिर रिश्तों पर असर पड़ेगा और हम ऐसा ही कुछ देख भी रहे हैं."

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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने शनिवार को कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर शांति बहाल करने पर तत्काल ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि चीन के साथ चल रहे सीमा विवाद को निपटाने के लिए ज्यादा समय की जरूरत है.

पूर्व राजदूत गौतम बंबावाले के साथ ऑनलाइन बातचीत के दौरान एस जयशंकर ने कहा कि भारत और चीन सीमा क्षेत्र में बरकरार शांति के कारण ही 1980 के दशक के बाद से व्यापार, पर्यटन और सामाजिक गतिविधियों जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ा रहे थे, लेकिन इस साल सीमा पर जारी गतिरोध ने स्थिति को काफी जटिल कर दिया.

एस जयशंकर ने कहा, “सीमावर्ती क्षेत्रों में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर शांति होनी चाहिए. अगर हम शांति बनाने को लेकर भी परेशान हैं, तो जाहिर तौर पर फिर रिश्तों पर असर पड़ेगा और हम ऐसा ही कुछ देख भी रहे हैं.”

“बहुत ही जटिल और बहुत ही मुश्किल मुद्दा”

उन्होंने कहा कि अब हम समझते हैं कि यह एक बहुत ही जटिल और बहुत ही मुश्किल मुद्दा है. अलग-अलग समय पर अलग-अलग स्तरों पर इसे लेकर कई बातचीत भी हुई हैं, जो कि रिश्तों को सुधारने के लिए एक बड़ा कदम है.

जयशंकर ने कहा कि चीन और भारत दोनों ही देश दुनिया में बड़ी भूमिका निभा रहे हैं और ऐसा माना भी जा रहा है, लेकिन बड़ा सवाल यह है कि दोनों देश आपसी रिश्तों में संतुलन कैसे बनाएं? उन्होंने यह भी कहा कि भारत समझता है कि सीमा विवाद एक जटिल और कठिन मुद्दा है.

चीनी सैनिकों के व्यवहार ने खड़ी की परेशानी

इससे पहले एक इवेंट में शुक्रवार को विदेश मंत्री ने कहा था कि पिछले 30 सालों में LAC पर चीनी सैनिकों के व्यवहार में काफी तेजी से बदलाव आया है. इसने भारत और चीन के बीच के संबंधों में कई तरह की परेशानियां खड़ी कर दी हैं.  उन्होंने ये भी कहा कि इस तरह की हिंसक झड़पों का बहुत गहरा सार्वजनिक और राजनीतिक प्रभाव पड़ा है. 

मालूम हो कि दोनों देश के बीच अप्रैल-मई से ही सीमा पर गतिरोध जारी हैं और चीन ने पूर्वी लद्दाख क्षेत्र में फिंगर प्वाइंट और दूसरे क्षेत्रों से पीछे हटने से इनकार कर दिया है.

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