PM मोदी की वो 50 कहानियां जो अनकही-अनसुनी हैं, देखें वीडियो

मोदी की मां को लगता था कि ज्यादातर नेता पैसे खाते हैं. वो अपने बेटे को इस बुराई से बचाना चाहती थीं...

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आज 69वां जन्मदिन है. इस मौके पर PM मोदी को देश-विदेश से बधाइयां मिल रहीं हैं. सोशल मीडिया पर भी PM मोदी का जन्मदिन ट्रेंड कर रहा है. लेकिन आज हम आपको बता रहे हैं PM मोदी के जीवन की वे कहानियां जो अनदेखी, अनसुनी और अनकही हैं.

  • कहानी-1

मोदी को मुख्यमंत्री बनने के बाद जब पहली बार अहमदाबाद जाना था तो उन्होंने किसी के भी घर रुकने से इनकार कर दिया था. मोदी ने तय किया कि वो अहमदाबाद के सर्किट हाउस में रुकेंगे. मोदी ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी थी कि किसी भी विधायक के नाम पर कमरा बुक ना किया जाए ना ही कोई पैमेंट किया जाए. जहां रुकना महंगा ना हो बल्कि सरकारी व्यवस्था हो उसे ही भावी मुख्यमंत्री के लिए बुक किया जाए.

  • कहानी-2

मुख्यमंत्री पद का ऐलान होने के बाद मोदी जब अहमदाबाद पहुंचे तो सबसे पहले अपनी मां हीराबा से मिलने गए. मोदी ने जब मां के पैर छुए तो मां बोली बेटा कुछ भी करना लेकिन पैसे मत खाना. किसी का बुरा मत करना. मोदी की मां को लगता था कि ज्यादातर नेता पैसे खाते हैं. वो अपने बेटे को इस बुराई से बचाना चाहती थीं.

  • कहानी-3

मोदी मां से मिलने के बाद जब सर्किट हाउस पहुंचे तो नेताओं के मिलने का तांता लग गया सब मोदी को सलाह दे रहे थे कि मुख्यमंत्री ना बनें क्योंकि पार्टी की हालत खराब है. अगर मोदी के मुख्यमंत्री बनने के बाद पार्टी चुनाव हार गई तो जिम्मेदारी मोदी पर डाल दी जाएगी.

स्थानीय लोगों ने कहा कि मोदी जी कुछ भी करो लेकिन शाम के खाने के समय बिजली आ जाए. बाद में मोदी ने गुजरात को बिजली में सरप्लस राज्य बना दिया. मोदी के समय में गुजरात के हर कोने में 24 घंटे बिजली आती थी. साथ ही मोदी जब तक मुख्यमंत्री रहे गुजरात में भारी बहुमत से सरकार बनाते रहे.

  • कहानी-4

मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी को अहमदाबाद सर्किट हाउस में बड़ी समस्या का सामना करना पड़ा. दरअसल मोदी को सुबह 5 बजे जल्दी उठने की आदत थी. वो उठकर अखबार पढ़ते थे लेकिन सर्किट हाउस में अखबार सुबह 8 बजे आता था. इंटनेट का कनेक्शन भी नहीं था. मोदी इंटरनेट और अखबार के बिना रह नहीं पाते थे. मोदी ने वो दिन बड़ी मुश्किलों से काटे.

  • कहानी-5

मोदी जब 1995 से लेकर 2001 तक गुजरात से बाहर रहे तो अपना मन लगाने के लिए पार्टी के काम के साथ-साथ तकनीक में भी रुचि लेने लगे. उसी दौर में मोबाइल फोन ने दस्तक दी थी. मोदी ने तकनीक की ताकत को समझना शुरू किया.

तकनीक को मोदी ने मुख्यमंत्री बनने से पहले सीखा लेकिन उसका असल उपयोग मुख्यमंत्री बनने के बाद किया. सोशल मीडिया का भारतीय राजनीति में पहला इस्तमाल मोदी ने ही किया.

  • कहानी-6

मोदी जब मुख्यमंत्री बने तो तकनीक से गुजरात के तटों पर रहने वाले मछुआरों की जिंदगी में बड़ा बदलाव किया. सैटेलाइट की मदद से पानी के प्रवाह का पता लगाया जाने लगा. इससे तूफान आने से पहले ही मछुआरों को आगाह कर दिया जाता था और उनकी जान बच जाती थी.

सैटेलाइट की मदद से आदिवासियों की जमीन की पहचान करके उन्हें मालिकानी हक दिया गया. देश में सैटेलाइट का ये अपनी तरह का पहला उपयोग था जो मोदी ने किया.

  • कहानी-7

मोदी के कार्यकाल में गुजरात के हिस्सों की सैटेलाइट से मैपिंग की जाने लगी थी. पहले लोग दबाव बनवाकर अपने इलाके में स्कूल बनवा लेते थे जिसकी वजह से दूसरी इलाकों में स्कूलों की कमी हो जाती थी लेकिन सैटेलाइट मैपिंग से ये पता किया जाने लगा कि किस इलाके में स्कूल होना चाहिए और कितनी दूरी पर होना चाहिए. इसी तकनीक से मोदी ने गुजरात में सरकारी अस्पताल भी बनवाए.

  • कहानी-8

मोदी के पास जो कारोबारी जमीन मांगने आने लगा उसे मोदी अपने दफ्तर से ही खाली जमीन दिखा दिया करते थे और जगह के हिसाब से कीमत और यातायात की जानकारी भी दे देते थे. जिस जीपीएस की मदद से आज लोग रास्ता खोजते हैं मोदी ने उस तकनीक से गुजरात में कारोबार बढ़ाना शुरू कर दिया था.

  • कहानी-9

गुजरात के गांव के कई सरकारी स्कूलों में टीचर पढ़ाने नहीं जाते थे. मोदी ने मुख्यमंत्री बनते ही हर स्कूल में बॉयोमेट्रिक अटेंडेंस शुरू करवा दी. पहले तो इसका विरोध हुआ. कुछ स्कूलों में बॉयोमेट्रिक मशीन को तोड़ा भी गया लेकिन धीरे धीरे लोगों को समझ आ गया कि ये नियम उनके विकास के लिए जरुरी है फिर लोगों ने इसे खुशी-खुशी अपनाया.

  • कहानी-10

साल 1984, 85 और 86 में गुजरात में अकाल पड़ा था. संघ के शिविर में चर्चा की जा रही थी कि गुजरात के लोगों की मदद कैसे की जा सकती है. मोदी बैठक में सबसे पीछे बैठे थे. जब सारी चर्चा समाप्त हो गई तो मोदी ने कुछ बोलने के लिए हाथ उठाया.

ये देखते ही प्रचारक केशवराव देशमुख नाराज हो गए और बोले कि तुम पूरी चर्चा में चुप रहते हो और आखिरी में बोलते हो. मोदी ने कहा कि आप बोलें तो मैं कुछ नहीं बोलूंगा लेकिन प्रचारक को पता था कि मोदी के पास कोई अच्छा आइडिया ही होगा इसलिए उन्होंने मोदी को बोलने का पूरा मौका दिया.

  • पूरी कहानियों को जानने के लिए ऊपर लिंक किए गए वीडियो को देखें