1999 में जिसे छोड़ा था, 5 CRPF जवानों के शहीद होने के पीछे है वही आतंकी

मुश्ताक अहमद जरगार उन 3 आतंकियों में से एक है जिसे 1999 में कंधार प्लेन हाईजैक के बाद यात्रियों के बदले छोड़ा गया था.

12 जून को जम्मू कश्मीर के अनंतनाग में CRPF कैंप पर आतंकी हमला हुआ. इस हमले में 5 जवान शहीद हो गए. हमले की जिम्मेदारी ‘अल उमर मुजाहिदीन’ नाम के आतंकी संगठन ने ली है. पाकिस्तान में मौजूद इस आतंकी संगठन का सरगना मुश्ताक अहमद जरगार है. 1999 में इंडियन एयरलाइंस की फ्लाइट IC 814 को आतंकी हाईजैक करके कंधार ले गए थे. उस विमान में मौजूद यात्रियों को छुड़ाने के लिए भारत को तीन आतंकवादी छोड़ने पड़े थे. जरगार इनमें से एक था. वही, जो 5 शहादतों का जिम्मेदार है.

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JKLF से शुरुआत और 1992 में गिरफ्तारी

अनंतनाग में रहे जरगार ने 1988 में सीमा पार की और पाकिस्तान के अलगाववादी संगठन JKLF यानी जम्मू कश्मीर लिबरेशन फ्रंट से ट्रेनिंग लेकर वापस आया. फिर उसी के लिए काम करने लगा और 1989 में फिर से ट्रेनिंग लेने गया. 1989 दिसंबर में AuM यानी अल उमर मुजाहिदीन संगठन बनाया. इसका मुख्य ठिकाना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद में है. इसका मुख्य मकसद कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना है.

जरगार के ऊपर भारतीय सुरक्षा बलों और कश्मीरी पंडितों पर हमले करने के आरोप हैं. 40 से ज्यादा हत्याओं का इल्जाम भी है. इसके संगठन पर फिरौती के इरादे से अपहरण करने के भी इल्जाम हैं. 1992 में भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने इसे गिरफ्तार कर लिया. लेकिन 1999 में हुआ कंधार विमान अपहरण कांड के फलस्वरूप उसे छोड़ना पड़ा था.

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