रिसर्च में खुलासा, 2017 में वायु प्रदूषण से हुई 12 लाख लोगों की मौत

भारत में वायु प्रदूषण एक गंभीर मुद्दा है. इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और बूढ़ों पर पड़ता है. इस समस्या से निजात पाने के लिए सरकार को कड़े कदम उठाने चाहिए और साथ ही लोगों की भी अपनी सतर्क रहना चाहिए.

नई दिल्ली: देश की राजधानी दिल्ली हो, या फिर महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश या बिहार, कई राज्य ऐसे हैं जहां पर प्रदुषण का स्तर बढ़ता जा रहा है. इस बढ़ते प्रदूषण के कारण लोग तरह-तरह की बीमारियों की चपेट में आ जाते हैं और ये बीमारी इतनी घातक हो जाती है कि इससे लोगों की जान भी चली जाती है. हाल ही में एक रिसर्च की गई जिसमें यह बात सामने आई है कि भारत में वायु प्रदूषण के कारण 2017 में 12 लाख लोगों की मौत हुई थी.

बुधवार को जारी की गई रिसर्च रिपोर्ट ‘स्टेट ऑफ ग्लोबल एयर-2019’ के अनुसार, वर्तमान में वायु प्रदूषण के उच्च स्तर के कारण दक्षिण एशिया में बच्चों की औसत जीवन में ढाई साल की कमी आएगी, जबकि वैश्विक जीवन में 20 महीने की कमी आएगी. इस रिसर्च में कहा गया कि भारत ने प्रदूषण की समस्या के समाधान के लिए प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना, भारत चरण-4 स्वच्छ वाहन मानक और नए राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम जैसे बड़े कदम उठाए हैं.

हेल्थ इफेक्ट्स इंस्टीट्यूट के उपाध्यक्ष रॉबर्ट ओकीफे ने एक बयान में आईएएनएस को बताया, “इन कदमों और भावी पहलों को वायु की गुणवत्ता की प्रतिबद्धता के तहत पूरी तरह लागू किया जाए तो इसमें आने वाले सालों में स्वास्थ्य संबंधी महत्वपूर्ण फायदे मिलने की संभावना है.”

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वायु प्रदूषण स्वास्थ्य संबंधी सभी खतरों से होने वाली मौतों में तीसरा सबसे बड़ा कारण है. रिपोर्ट में कहा गया है कि पूरी दुनिया में वायु प्रदूषण से जितने लोगों की मौत होती है, उसकी आधी संख्या भारत और चीन में है. भारत और चीन में 2017 में वायु प्रदूषण से क्रमश: 12-12 लाख लोगों की मौत हुई.