किसी लड़की को “कॉल-गर्ल” कहना आत्महत्या के लिए नहीं उकसाता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाई कोर्ट के उस फैसले पर मुहर भी लगा दी जिसमें हाई कोर्ट ने आरोपी को आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा के तहत बरी किया था.
call-girl, किसी लड़की को “कॉल-गर्ल” कहना आत्महत्या के लिए नहीं उकसाता : सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने अपने एक फैसले में कहा कि किसी महिला को “कॉल-गर्ल” कहकर मौखिक रूप से गाली देना आत्महत्या के लिए उकसाने के प्रयास तहत नहीं आएगा.

ये फैसला जस्टिस इंदु मल्होत्रा ​​और आर सुभाष रेड्डी की खंडपीठ की अगुवाई में सुनाया गया, जिसमें कलकत्ता उच्च न्यायालय के फैसले के खिलाफ अपील दायर की गई थी, जिसमें लड़के और पीड़िता के बीच आईपीसी की धारा 34 के साथ 306 के तहत पढ़े गए आरोपों का खंडन किया गया.

फैसले में इन बातों का जिक्र किया गया

#सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता हाई कोर्ट के उस फैसले पर मुहर भी लगा दी जिसमें हाई कोर्ट ने आरोपी को आत्महत्या के लिए उकसाने की धारा के तहत बरी किया था.

#दअरसल मृतक पीड़ित ने अपनी आत्महत्या नोट में आरोपी पर आरोप लगाया था कि वो उसने उसे “कॉल-गर्ल” कहा था. जिसके बाद पीड़ित के पिता ने पुलिस में शिकायत की थी.

#आरोपी ने अपने खिलाफ हत्या के तहत उकसाने की धारा को रद्द करने के लिए हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की थी.

#हाईकोर्ट ने हत्या के तहत उकसाने की धारा को रद्द कर दिया था.

#जिसके खिलाफ पश्चिम बंगाल सरकार सुप्रीम कोर्ट आई थी.

जाने पूरा मामला

ये मामला मार्मृच, 2004 का है, जब एक लड़की ने बॉयफ्रेंड के पैरेंट्स की तरफ से उन दोनों की शादी के लिए इंकार करने पर लड़की ने सुसाइड कर लिया. पीड़िता ने सुसाइड नोट में लड़के को दोषी ठहराया था. जिसके बाद पीड़िता के पिता ने शिकायत दर्ज कराई और कहा था कि आरोपी ने पीड़िता से शादी करने का इरादा किया था.

शादी की संभावना पर बात करने के इरादे से, पीड़ित ने आरोपी के घर का दौरा किया. हालांकि उसके माता-पिता ने इस शादी का विरोध किया और कथित तौर पर पीड़िता को “कॉल गर्ल” कहकर गाली दी.

इस घटना के अगले दिन, पीड़िता ने आत्महत्या कर ली और एक सुसाइड नोट छोड़ गई, जहां उसने इस घटना को डिटेल से लिखा. सुसाइड नोट के आधार पर आईपीसी की धारा 34 के साथ पढ़ी गई धारा 306 के तहत जवाब देने वालों के खिलाफ आरोप तय किए गए.

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