आरे कॉलोनी में बरकार रहेगी यथास्थिति, सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ काटने पर लगाई रोक

बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरे कॉलोनी को जंगल मानने से इनकार करते हुए महाराष्ट्र सरकार को पेड़ों की कटाई के लिए मंजूरी दी थी.

मुंबई के आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई को लेकर मुंबईकरों के प्रदर्शन के बावजूद 2,700 पेड़ों की बली दे दी गई. वहीं सुप्रीम कोर्ट ने अब इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए मामले की सुनवाई के लिए अलग बेंच का गठन किया है.

शीर्ष अदालत की वेबसाइट पर तत्काल सुनवाई करने के बाबत नोटिस डाला गया है जिसके अनुसार, ‘संज्ञान लिया जाए कि मामले में कल सात अक्टूबर, 2019 को सुबह 10 बजे सुनवाई के लिए विशेष पीठ का गठन किया गया है. महाराष्ट्र राज्य के आरे वन्य क्षेत्र में पेड़ गिराये जाने के संबंध में रिषव रंजन के छह अक्टूबर, 2019 के पत्र के आधार पर यह निर्णय लिया गया है और इस पत्र को जनहित याचिका के तौर पर दर्ज किया गया है.’

सुनवाई की मुख्य बातें-

# सप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार से गिरफ्तार किए गए सभी एक्टिविस्टों को जल्द रिहा करने का आदेश दिया है.

# सुप्रीम कोर्ट मामले में अगली सुनवाई 21 अक्टूबर को करेगा. महाराष्ट्र सरकार सुप्रीम कोर्ट को बताएगी कि कितने पेड़ काटे गए और कितने लगाए गए. मेट्रो के पास क्या विकल्प थे?

# जस्टिस मिश्रा ने कहा कि जो हम समझ रहे हैं उसमें आरे इलाका नॉन डेवलपमेंट एरिया है लेकिन इको सेंसटिव इलाका नहीं है.

# सुप्रीम कोर्ट ने पेड़ो की कटाई पर फिलहाल रोक लगा दी है.  कोर्ट ने यथास्थिति बरकरार रखने का आदेश दिया है.

# संजय हेगड़े और गोपाल शंकर नारायण छात्रों की तरफ से बहस कर रहे हैं-
– जस्टिस अरुण मिश्रा ने संजय हेगड़े से पूछा “आप क्या कहना चाहते है?” नट सेल में बताइए.
वहीं गोपाल शंकर नारायण ने कहा, ‘सरकार ने एक नोटिफिकेशन जारी कर इसे इको सेंसेटिव ज़ोन से हटा दिया था.
जिसके खिलाफ याचिका अभी नही लंबित है.
– संजय हेगड़े ने बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश को पढ़ना शुरू किया.
– जिसपर हाई कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार किया था.
– जस्टिस अरुण मिश्रा ने याचिकाकर्ता को कहा कि आप एक ऐसा नोटिफिकेशन कोर्ट में पेश करें कि पहले वो फारेस्ट एरिया तय इको सेंसेटिव ज़ोन था?
गोपाल शंकर नारायण ने कहा कि शनिवार और रविवार को हाई कोर्ट में मेंशन किया था कि पेड़ों की कटाई शुरू हो गई है लेकिन हाई कोर्ट ने रोक लगाने से इनकार कर दिया था.
जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि वो जानना चाहते हैं कि ये फॉरेस्ट लैंड था या इको सेंसेटिव लैंड.
जस्टिस अरुण मिश्रा ने कहा कि क्या ये ” नो डेवलपिंग ज़ोन था?” इको सेंसेटिव ज़ोन नहीं?

# सरकार के दो नोटिफिकेशन में से एक मे आरे एरिया को इको सेंसटिव ज़ोन से अलग कर दिया गया था कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील से कहा कि- आप हमें वह नोटिफिकेशन दिखाइये जिसमें आरे एरिया की एको सेंसेटिव ज़ोन से बाहर किया गया था.

# महाराष्ट्र सरकार के दो नोटिफिकेशन को कोर्ट में चुनौती दी गयी थी. कोर्ट ने याचिका खारिज कर दिया था. एक याचिका में मांग की गई थी कि पूरे आरे क्षेत्र को जंगल घोषित किया जाए. हाई कोर्ट ने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में मैटर पेंडिंग है इसलिए हम इसपर सुनवाई नहीं कर सकते.

# आरे कॉलोनी में पेड़ों की कटाई के मामले में सुनवाई शुरू हो गई है. जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस अशोक भूषण की बेंच ने सुनवाई शुरू की है.
छात्रों की तरफ से संजय हेगड़े पेश हुए हैं. फ़िलहाल याचिकाकर्ता कोर्ट को बता रहे हैं कि कब-कब क्या कदम उठाया गया.

वहीं सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश हुए है.

# इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट ने आरे कॉलोनी को जंगल मानने से इनकार करते हुए महाराष्ट्र सरकार को पेड़ों की कटाई के लिए मंजूरी दी थी. बता दें कि इन पेड़ों को मैट्रो शेड के निर्माण के लिए काटा जा रहा है.

# पर्यावरण कार्यकर्ता उत्तरी मुंबई की आरे कॉलोनी में मुंबई मेट्रो रेल निगम लिमिटेड (एमएमआरसीएल) द्वारा पेड़ काटे जाने का विरोध कर रहे हैं.