SC बार-बेंच विवाद : कपिल सिब्बल ने रखा वकीलों का पक्ष, जस्टिस मिश्रा बोले “मैं उनसे दंडवत् माफी मांगता हूं…”

दरअसल, मगंलवार को सुप्रीम कोर्ट में इंदौर विकास प्राधिकरण मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा और वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण के बीच तीखी बहस हुई थी.
supreme court bar bench conflict, SC बार-बेंच विवाद : कपिल सिब्बल ने रखा वकीलों का पक्ष, जस्टिस मिश्रा बोले “मैं उनसे दंडवत् माफी मांगता हूं…”

सुप्रीम कोर्ट बार और बेंच के बीच के विवाद में कपिल सिब्बल ने वकीलों की तरफ से अपना पक्ष रखा. उन्होंने कहा कि इस तरह घटना दुर्भाग्यपूर्ण हैं.

जिसपर जस्टिस अरूण मिश्रा ने कहा, “मैं इस बारे में कोई स्पष्टीकरण नहीं देना चाहता हूं. जो भी हुआ उसमें आप दूसरे पक्ष कि खामी भी देखें. इसपर कपिल सिब्बल ने कहा, “हम एक मामले की ही बात नहीं कर रहे हैं.”

जस्टिस मिश्रा ने कहा, “मैं सिर्फ आप लोगों से ही नहीं बल्कि दुनिया में किसी से भी अपनी गलती पर माफी मांग सकता हूं. शंकर नारायण मेरी आधी उम्र के हैं और मैं उनसे दंडवत् माफी मांगता हूं”. इसपर सिब्बल ने कहा इसकी जरूरत नहीं है और हम सब आज यहां किसी एक मामले पर एकत्र नहीं हुए हैं.

वहीं जस्टिस मिश्रा ने कहा, ” इस महान संस्थान में बार के सदस्यों का एरोगेंस उन्हें गलत राह पर ले जा रहा है. इतना हल्ला किया जाता है कि ठीक से सोचना और निर्णय लेना भी मुश्किल हो जाता है. मगर हमारे नजरअंदाज करने के रवैये को कमजोरी न समझा जाए”.

वहीं जस्टिस मिश्रा ने गोपाल शंकर नारायण के बारे में कहा, “वह एक होनहार वकील हैं. मैंने उनसे कहा कि वकील का नाम न लें . मैंने उनसे अनुरोध किया कि वे पढ़ने के दौरान टिप्पणी न करें.

क्या था मामला

दरअसल, मगंलवार को सुप्रीम कोर्ट में इंदौर विकास प्राधिकरण मामले की सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ती अरुण मिश्रा और वरिष्ठ वकील गोपाल शंकरनारायण के बीच तीखी बहस हुई थी.

सुनवाई के दौरान जस्टिस मिश्रा ने कहा कि वरिष्ठ वकील अपने तर्क बार-बार न दोहराएं, पहले से मौजूद उत्तरदाता के अधिवक्ता यह पेश कर चुके हैं.

इसपर वरिष्ठ वकील शंकरनारायण ने कहा, “मैं इस तरह की बहस का आदी नहीं हूं”. तभी न्यायमूर्ती मिश्रा ने सख्ती से कहा, “तो आप बैठ सकते हैं”.

इसके बाद जैसे ही वरिष्ठ अधिवक्ता ने अपना मामला फिर शुरु किया, तो न्यायमूर्ती मिश्रा ने फिर कहा, “आप न्याय देने वाली प्रणाली का मज़ाक बना रहे हैं. हम धैर्यपूर्वक सुनवाई कर रहे हैं. और आप हर प्रश्न पर टिप्पणी कर रहे हैं? प्रत्येक प्रश्न पर मुंह तोड़ जवाब? यदि आप एक और जवाब देते हैं तो मैं आपके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करूंगा और सुनिश्चित करूंगा कि यह दिखे. अब यदि आपके पास कोई नया बिंदु है तो आप उसे पेश करें.

इस बहस के बाद वरिष्ठ अधिवक्ता शंकर नारायणन ने खुद को सुनवाई से बाहर कर लिया. जिसपर इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट्स ऑन रिकॉर्ड एसोसिएशन ने बुधवार को एक प्रस्ताव पारित किया. जिसमें कहा गया, ” हम माननीय न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा से अनुरोध करते हैं कि वे वकीलों से निपटने में थोड़ा अधिक धैर्य रखें”.

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