केजरीवाल सरकार के फैसले पर SC ने उठाए सवाल, कहा- मेट्रो को घाटा पहुंचाने वाले फैसलों से बचें

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली मेट्रो के फेज-चार के लिए भूमि की लागत का 50 प्रतिशत केंद्र को वहन करना होगा. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली मेट्रो ने अब तक किसी भी तरह के वित्तीय घाटे का सामना नहीं किया है

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिल्ली सरकार से ऐसा कोई भी कदम उठाने से मना किया है, जिससे दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन को वित्तीय तौर पर घाटा पहुंचे. न्यायाधीश अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने यह टिप्पणी दिल्ली सरकार को फेज-चार के मेट्रो निर्माण के लिए जमीन की लागत को लेकर राहत देते हुए की.

सुप्रीम कोर्ट ने निर्देश दिया कि दिल्ली मेट्रो के फेज-चार के लिए भूमि की लागत का 50 प्रतिशत केंद्र को वहन करना होगा. कोर्ट ने कहा कि दिल्ली मेट्रो ने अब तक किसी भी तरह के वित्तीय घाटे का सामना नहीं किया है और संभावना है कि भविष्य में भी उसे कोई नुकसान नहीं होगा.

हालांकि, अदालत ने दिल्ली सरकार से यह भी कहा कि वह जनता के पैसे का सही इस्तेमाल करे. 12 जुलाई को सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली मेट्रो के 104-किलोमीटर के फेस-चार परियोजना पर काम शुरू करने के लिए अधिकारियों को निर्देश दिया. इस मेट्रो के लिए जमीन का मुद्दा केंद्र और दिल्ली सरकार के बीच झगड़े की वजह बन गई थी.

जस्टिस अरुण मिश्र की बेंच ने कहा कि दिल्ली सरकार ये सुनिश्चित करने के लिए बाध्य है कि मेट्रो को नुकसान ना उठाना पड़े. अगर मेट्रो को घाटा होता है तो दिल्ली सरकार को वहन करना होगा. बेंच ने कहा कि एक तरफ आप मुफ्त में चीजे बांट रहे हैं तो दूसरी ओर सुप्रीम कोर्ट से घाटे की बात करते हुए केंद्र सरकार से रुपये दिलाने की मांग करते हैं.

वहीं जस्टिस दीपक गुप्ता ने कहा यदि आप लोगों को मुफ्त यात्रा करने की अनुमति देते हैं तो यह समस्या होगी. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि तब हम सभी बंद कर देंगे. आप नुकसान के बारे में बात करते हैं जो आपके पास है वो जनता का पैसा है. दुरुपयोग करेगी को अदालत शक्तिहीन नहीं है. खुद की बनाई नीतियों से दिवालियापन नहीं आना चाहिए. वहीं सुनवाई के दौरान EPCA ने कहा कि पिछले पांच साल में मेट्रो को ऑपरेशन में कोई घाटा नहीं हुआ है.