SC ने EC को भेजा नोटिस, कहा- भाषण में धर्म-जाति लाने वाले नेताओं पर हो कार्रवाई

चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट बैंच ने 15 अप्रैल तक इस मामले पर चुनाव आयोग से जवाब देने को कहा है.

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को सोमवार को एक नोटिस जारी करते हुए कहा कि वह भाषण देने वाले उन राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने के लिए दिशा-निर्देश जारी करें, जो कि अपने भाषण या मीडिया में धर्म या जाति से संबंधित टिप्पणी करते हैं.

यह नोटिस सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों के प्रवक्ताओं को भी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम या चुनावी आचार संहिता के दायरे में लाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई करने के दौरान जारी किया. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट बैंच ने 15 अप्रैल तक इस मामले पर चुनाव आयोग से जवाब देने को कहा है.

यह याचिका एनआरआई हरप्रीत मनसुखानी ने कोर्ट में दायर की थी. अपनी इस याचिका में मनसुखानी ने विन्नती की थी कि सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज की अध्यक्षता में समिति बनाई जाए और इस विषय को लेकर गाइडलाइन तैयार की जाएं. याचिका में कहा गया था कि अभी राजनीतिक पार्टियों के प्रवक्ताओं के बयान चुनाव और जनमत को सबसे ज़्यादा प्रभावित करते हैं, लेकिन वो न तो जनप्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत जिम्मेदार हैं और ना ही आचार संहिता के तहत. कोर्ट इन्हें भी जनप्रतिनिधित्व अधिनियम और आचार संहिता के तहत लाने का इंतज़ाम करे.

एएनआई के अनुसार, इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने वकील अनुजा कपूर की ओर से दायर की गई उस जनहित याचिका में दखल देने से इनकार कर दिया, जिसमें कहा गया था कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और अन्य नेटवर्किंग साइट्स पर फर्जी खबरों के टेलिकास्ट और पब्लिकेशन को रोकने के लिए भारत सरकार को दिशा-निर्देश जारी किए जाएं.