दूसरे के अधिकार पर अतिक्रमण कर न हो विरोध-प्रदर्शन, एससी ने शाहीन बाग मामले में सुरक्षित रखा फैसला

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन अधिकार है, लेकिन किसी दूसरे के अधिकार पर अतिक्रमण करके नहीं होना चाहिए. लोकतांत्रिक व्यवस्था में संतुलन जरूरी है कि किस तरह से प्रदर्शन किया जा रहा है और कितने समय तक किया जाएगा.

शाहीन बाग में सीएए के विरोध में जुटी भीड़

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने शाहीन बाग (Shaheen Bagh) प्रदर्शन मामले पर सोमवार को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. कोर्ट ने याचिकाकर्ता से पूछा कि क्या आप याचिका वापस लेंगे. जवाब में नहीं मिलने पर सुनवाई शुरु हुई. आवेदक अमित साहनी ने कहा कि इस तरह के धरना प्रदर्शन पर पूरी तरह से रोक लगनी चाहिए. कोर्ट ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन अधिकार है. लेकिन किसी दूसरे के अधिकार पर अतिक्रमण करके नहीं, लोकतांत्रिक व्यवस्था में संतुलन जरूरी है कि किस तरह से प्रदर्शन किया जा रहा है और कितने समय तक किया जाएगा.

वकील महमूद प्राचा ने कहा कि इस पर एक सार्वभौमिक नीति लाई जानी चाहिए. इस पर कोर्ट ने कहा कि देखते हैं कि किस तरह से इसमें संतुलन कायम हो सकता है.

‘उचित रोक के साथ हैं नागरिक अधिकार’

एसजी तुषार मेहता ने कहा कि नागरिक अधिकार उचित रोक के साथ हैं और इस पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला भी है जो दिल्ली के जंतर-मंतर को लेकर है.

याचिका में सुप्रीम कोर्ट से सड़क जाम कर होने वाले धरना प्रदर्शन को लेकर गाइडलाइन बनाने की मांग की गई है. इस दौरान एसजी तुषार मेहता ने कोर्ट को बताया कि लोगों को हटाया जा चुका है, सुनवाई जरूरी नहीं है.

‘सुनिश्चित किया जाए कि सड़क न बंद हो’

याचिकाकर्ता अमित साहनी ने कहा कि यह सुनिश्चित किया जाए कि इस तरह से सड़क न बंद हो. साहनी ने कहा कि ऐसे विरोध जारी नहीं रह सकते, सड़कों को ब्लॉक करने के लिए एससी निर्देश के बावजूद प्रदर्शन 100 दिनों के लिए चलते रहे, इस मामले में सुनवाई होनी चाहिए और दिशानिर्देश पास करना चाहिए.

प्रदर्शनकारियों के वकील महमूद प्राचा ने कहा कि प्रदर्शन के लिए समान पॉलिसी होनी चाहिए. अगर शांतिपूर्ण तरिके से प्रदर्शन हो रहा है तो इसके लिए दिशानिर्देश की जरूरत नहीं है.

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