सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को एंट्री मिलेगी या नहीं, सुप्रीम कोर्ट कल सुनाएगा फैसला

चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने 6 फरवरी को फैसला सुरक्षित रख लिया था.

सुप्रीम कोर्ट सबरीमाला मंदिर मामले पर कल यानी गुरुवार को फैसला सुनाएगा. कोर्ट तय करेगा कि सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश दिया जाएगा या नहीं. केरल के सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने आदेश पर पुनर्विचार करने को लेकर 64 याचिकाएं दाखिल की गई हैं.

त्रावणकोर देवासम बोर्ड ने लिया यू-टर्न
कोर्ट ने 6 फरवरी को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया. वहीं, त्रावणकोर देवासम बोर्ड ने इस मामले में यू-टर्न ले लिया है. बोर्ड का अब यह कहना है कि वह पिछले साल 28 सितंबर के फैसले का समर्थन करता है.

चीफ जस्टिस रंजन गोगई की अध्यक्षता वाली पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने फैसला सुरक्षित रख लिया था. सुनवाई के दौरान केरल सरकार और त्रावणकोर देवासम बोर्डने पुनर्विचार याचिकाओं का पुरजोर विरोध किया.

सुनवाई के दौरान केरल सरकार की ओर से पेश वरिष्ठ वकील जयदीप गुप्ता और विजय हंसारिया ने कहा कि पुनर्विचार याचिकाओं में ऐसा कोई तथ्य नहीं है जिनके आधार पर फैसले पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए.

‘शांति व्यवस्था हो रही प्रभावित’
केरल सरकार ने यह भी कहा कि इस आधार पर कि फैसले के कारण शांति व्यवस्था प्रभावित हो रही है. फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया जा सकता है. सरकार ने कहा कि सबरीमाला मंदिर सार्वजनिक मंदिर है. मंदिर में प्रवेश के लिए किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जा सकता.

वहीं, त्रावणकोर देवासम बोर्ड की ओर से पेश वरिष्ठ वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि बोर्ड सभी उम्र की महिलाओं को मंदिर में प्रवेश देने की इजाजत देने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सम्मान करता है. द्विवेदी ने कहा कि बोर्ड ने अपना रुख बदल दिया है. मालूम हो कि बोर्ड पहले सभी उम्र की महिलाओं को प्रवेश की इजाजत देने केफैसले का विरोध कर रहा था.

फैसले पर पुनर्विचार करने की गुहार
इससे पहले विभिन्न याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकील के परासरन, वी गिरी, अभिषेक मनु सिंघवी, मोहन परासरन आदि ने पिछले साल 28 सितंबर के फैसले पर पुनर्विचार करने की गुहार की थी.

दरअसल पिछले साल 28 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने सभी उम्र की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश करने की अनुमति दे दी थी.

संविधान पीठ ने 10 से 50 आयुवर्ग की महिलाओं को सबरीमाला मंदिर में प्रवेश पर पाबंदी के सदियों पुरानी प्रथा को गैरकानूनी व असंवैधानिक करार दे दिया था. लेकिन इस आदेश के बावजूद महिलाओं के मंदिर में प्रवेश को लेकर लगातार विरोध हो रहा है.

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