कौन करेगा जांच? SC ने सुरक्षित रखा फैसला, वकील बोले- “रिया सुशांत से प्‍यार करती थी”, पढ़ें सारी दलीलें

CBI की ओर से पेश हुए एसजी तुषार मेहता‌ का कहना है कि महाराष्ट्र सरकार ने अपने हलफनामे में सही जानकारी नहीं दी है. सीबीआई द्वारा जांच सही दिशा में और निष्पक्ष होगी और जल्द ही सच्चाई सबके सामने होगी.

सुशांत सिंह मौत मामले (Sushant Death Case) में रिया चक्रवर्ती (Rhea Chakraborty) पर सुप्रीम कोर्ट (Supreme court) में सुनवाई हुई, इस मामले पर SC ने अपना फैसला सुरखित रखा है. इस दौरान रिया की तरफ से वकील श्याम दीवान, बिहार सरकार की तरफ से वकील मनिंदर सिंह, महाराष्ट्र सरकार की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी, सुशांत के पिता की ओर से विकास सिंह और CBI की ओर से एसजी तुषार मेहता पेश हुए. जानिए इस मामले में सभी पक्षों के के वकीलों ने क्या दलीलें सामने रखीं हैं…

देखिए NewsTop9 टीवी 9 भारतवर्ष पर रोज सुबह शाम 7 बजे

रिया के वकील श्याम दीवान ने क्या कहा?

  • मुंबई पुलिस हर पहलू पर जांच कर रही है. प्रोफेशनल मैनर में जांच हो रही है. 56 लोगों के बयान दर्ज हो चुके हैं. मुझे लगता है कि जांच काफी आगे बढ़ गई है.
  • मुंबई पुलिस का दृष्टिकोण यह है कि याचिकाकर्ता के लिए पटना में प्राथमिकी दर्ज करना आवश्यक नहीं था.
  • सुशांत के परिजनों ने पहले CBI जांच की मांग नहीं की थी लेकिन जब मीडिया में सूत्रों के‌ हवाले से खबरें आने लगी, तब बिहार में FIR दर्ज हो गई. अचानक नीतिश कुमार और बिहार पुलिस सक्रिय हो गए.
  • रिया‌ जांच और ट्रायल में पूरा सहयोग करेंगी लेकिन अदालत इस मामले को राजनीति से दूर करते हुए FIR मुंबई ट्रांसफर करे और मीडिया को इस मामले में ताकिद करे.
  • जांच‌ करायी जाए लेकिन जिस‌ तरह से‌ CBI को‌ यह मामला सौंपा गया और‌ महाराष्ट्र से पूछा तक नहीं गया. FIR को पहले मुंबई ट्रांसफर किया जाए फिर आगे का तय किया जाए.
  • पटना में दर्ज FIR का घटना से कोई संबंध नहीं है, 38 दिन बाद पटना FIR दर्ज हुई, बिहार सरकार मामले में ज़्यादा दखल दे रही है.
  • FIR दर्ज होने के पीछे राजनैतिक वजह, बिहार पुलिस ने एक ऐसे मामले के लिए FIR दर्ज की, जिसका पटना से कोई कनेक्शन ही नहीं.
  • अगर मामले को पटना से मुंबई पुलिस के पास ट्रांसफर नहीं होगा, तो रिया को इंसाफ नही मिल पायेगा.
  • बिहार पुलिस का इस मामले से कोई लेनादेना नहीं है लेकिन बिहार के मुख्यमंत्री इस मामले में राजनैतिक लाभ लेने के लिए खुद ही सक्रिय हुए हैं.
  • रिया, सुशांत से प्यार करती थी, उसे ट्रोल किया जा रहा है, उसको प्रताड़ित किया जा रहा है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा आप विश्वास रखिए सही और सटीक जांच ही होगी.

बिहार सरकार की तरफ से पेश वकील मनिंदर सिंह ने क्या कहा?

  • राज्य पुलिस इस‌ मामले में तब आगे आई, जब लंबे समय तक मुंबई पुलिस ने कोई FIR ‌नहीं दर्ज की. आखिर FIR क्यों नहीं दर्ज की गई. दरअसल यह मामले को रफा दफा करने के लिए किया गया. जबकि FIR पोस्टमार्टम से पहले की जानी चाहिए थी.
  • राजनैतिक दबाव में बिहार सरकार नहीं, बल्कि महाराष्ट्र सरकार है जिसने अभी तक भी सुशांत सिंह राजपूत की मौत के मामले में FIR दर्ज नहीं की है.
  • जब आत्महत्या ‌और हत्या के बीच‌ की आशंका को महाराष्ट्र पुलिस ने स्वीकार किया था तो FIR क्यों नहीं दर्ज की.
  • बिहार को पूरी तरह से अधिकार है FIR‌ दर्ज करने और‌ उसकी जांच करने का, क्योंकि मुंबई पुलिस तो मामला रफा दफा करने में लगी थी. ऐसे में अब उसका सटीक जांच करने का दावा छल है. मुंबई पुलिस पर सही जांच नहीं करने का राजनीतिक दबाव है.
  • महाराष्ट्र पुलिस ने मामले से जुड़े एक भी कागजात को बिहार पुलिस के साथ शेयर नहीं किया. महाराष्ट्र पुलिस इस मामले में किसको बचाना चाहती है.
  • महाराष्ट्र पुलिस ने बिहार के सीनियर जांच अधिकारी को होम क्वारंटीन कर दिया. क्या महाराष्ट पुलिस की यह करवाई तर्कसंगत है? बिहार पुलिस की जांच में मुंबई पुलिस ने कोई सहयोग नहीं किया. सुप्रीम कोर्ट को इस मामले में विचार करने की जरूरत है.
  • बिहार पुलिस के खिलाफ अजय नामक व्यक्ति ने मुंबई पुलिस को ऑनलाइन शिकायत की है और उनके ऊपर कार्रवाई करने की मांग की है. शिकायतकर्ता का आरोप है कि बिहार पुलिस द्वारा मुंबई पुलिस के कामकाज में गड़बड़ी की गई. साथ ही महाराष्ट्र की बदनामी की गई ऐसे में उनके खिलाफ केस दर्ज किया जाए. यह हमारा दायित्व था कि हम जांच से आगे बढ़ें क्योंकि किसी प्राधिकरण को जांच करनी है.
  • अगर सुशांत के बैंक खाते से 15 करोड़ रुपए गायब हुए हैं तो सुशांत के पिता को पटना में रिपोर्ट दर्ज करवाने का हक था. मुंबई पुलिस ने सिर्फ मीडिया को दिखाने के लिए जांच का दिखावा किया. हकीकत में कोई जांच नहीं की. सही मायनों में 25 जून के बाद कानूनन मुंबई में कोई जांच लंबित नहीं है.

महाराष्ट्र सरकार की तरफ से वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या कहा?

  • पहले सुप्रीम कोर्ट को इस पर सुनवाई करनी चाहिए कि बिहार के पास यह अधिकार है कि वह इस मामले में FIR दर्ज कर सकती है या फिर नहीं.
  • एक ट्रांसफर याचिका को इतना सनसनीखेज बनाया जा रहा है. हर एंकर और रिपोर्टर एक्सपर्ट बन गए हैं. इसका नतीजा जांच और सच्चाई भुगत रहे हैं.
  • जांच करने में बिहार पुलिस का अधिकार क्षेत्र नहीं है. अब यह ट्रांसफर का मामला नहीं है. इसमें अब CBI जांच की बात है. बिहार ने अपने हलफनामे में कहा कि राजपूत बिहार से ताल्लुक रखते हैं.
  • मीडिया इस सामान्य केस को असामान्य केस बना रही है. हमारी स्टेटस रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट के समक्ष सीलबंद कवर में दाखिल की गई है. इस मामले में CrPc की हत्या का प्रयास किया जा रहा है.
  • घटना जहां पर हुई है उस राज्य की सहमति CBI जांच के लिए जरूरी है. अपवाद यह है कि हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट अपनी ओर से भी CBI जांच का आदेश दे सकता है लेकिन ऐसा बेहद रेयर केस में होता है.
  • मान लीजिए कल कोई मुंबई में कोई हिट रन केस हो जाये. अगर पीड़ित और आरोपी दोनों ये कहने लगे कि हमें‌ मुंबई पुलिस पंसद नहीं है. जांच केरल या किसी राज्य पुलिस करे, तब क्या होगा.
  • इस देश में संघीय ढांचा है, क्या शिकायतकर्ता की सुविधा के लिए कहीं भी मुक़दमा दर्ज कर दिया जाएगा. इस मामले में आपराधिक दंड प्रकिया की हत्या हो रही है. क्या पीड़ित पक्ष तय करेगा कि किस राज्य की पुलिस जांच करेगी. एक राज्य में घटना होती है और उसकी FIR और जांच दूसरे राज्य में होती है?

सुशांत के पिता कि ओर से विकास सिंह ने क्या कहा?

  • जीरो FIR के मामले में जैसे आसाराम केस में पीड़िता राजस्थान से आई थी और शिकायत दिल्ली में दर्ज करवाई गई थी. जिसके बाद मामले में जांच की गई थी. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक इस मामले में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री के बेटे का नाम आया है इसपर विचार की जरूरत है.
  • सुशांत से उसके पिता बात करना चाहते थे लेकिन रिया की तरफ से जवाब नहीं दिया गया.
  • जांच में जितनी देरी हो रही है, उतने ही साक्ष्य नष्ट हो रहे हैं. इस मामले इंसाफ के लिए यह जरूरी है कि जांच में मुंबई पुलिस का दखल नहीं हो.
  • मामले में कई पहलू जांच के लायक हैं. ऐसा लग रहा है कि सुशांत के गले पर निशान बेल्ट के थे. सुशांत की बॉडी को किसी ने पंखे से लटका हुआ नहीं देखा. सुशांत के पैसे को लेकर धोखाधड़ी और आपराधिक विश्वासघात पटना में हुआ था इसलिए FIR पटना में दर्ज कराई गई है.

CBI की ओर से एसजी तुषार मेहता‌ ने क्या कहा?

  • महाराष्ट्र सरकार ने अपने हलफनामे में सही जानकारी नहीं दी है. सीबीआई ने इस मामले में केस दर्ज कर लिया है. बिहार सरकार की सिफारिश को मान लिया गया है.
  • सीबीआई द्वारा जांच सही दिशा में और निष्पक्ष होगी और जल्द ही सच्चाई सबके सामने होगी.
  • इस मामले‌ में सच्चाई सबके सामने आनी चाहिए. जब सुशांत के‌ पोस्टमार्टम में चोट‌ और अन्य परिस्थितिजन्य‌ साक्ष्य आशंका को बढ़ा रहे थे तो मुंबई पुलिस ने तत्काल FIR दर्ज क्यों नहीं की.
  • मुंबई में कोई केस नहीं दर्ज हुआ. ऐसे में बिहार में दर्ज FIR ट्रांसफर करने का कोई मतलब नहीं है जबकि मुंबई पुलिस का लापरवाह रवैया साफ है.
  • मुंबई पुलिस ने 56 लोगों के बयान दर्ज किए जिनका कानून की नजर में कोई मतलब नहीं था यानी वह बेजा कार्यवाही थी.
  • CrPC 174 के तहत शुरू दुर्घटना में मौत की जांच बहुत कम समय तक चलती है. बॉडी देख कर और स्पॉट पर जाकर देखा जाता है कि मौत की वजह संदिग्ध है या नहीं, फिर FIR दर्ज होती है. मुंबई पुलिस जो कर रही है, वह सही नहीं.
  • जांच केवल बिहार में हो रही है. FIR की वैधता पर सवाल हो सकता है लेकिन मुंबई में इसकी कोई जांच नहीं की गई है.

सुनवाई के अंत में रिया के वकील ने कहा कि हमारी मांग के मुताबिक केस मुंबई ट्रांसफर हो, आगे जो किए जाने की ज़रूरत हो वो इसके बाद हो, इस मामले में जैसे दूसरे राज्य में FIR दर्ज हुई है और फिर उसे CBI को ट्रांसफर किया गया, इसकी अनुमति नहीं दी जाए.

देखिये #अड़ी सोमवार से शुक्रवार टीवी 9 भारतवर्ष पर शाम 6 बजे

Related Posts