मसखरी के अलावा कुछ बोलना नहीं आता.. जब लालू के अंदाज में सुषमा ने कर दी उनकी बोलती बंद

आमतौर पर लालू यादव भाषणों में अपने विरोधियों पर भारी पड़ते थे लेकिन एक बार उनका मुक़ाबला सुषमा स्वराज से पड़ गया.

नई दिल्ली: बीजेपी (भारतीय जनता पार्टी) की दिग्गज नेता सुषमा स्वराज के निधन पर राजद (राष्ट्रीय जनता दल) प्रमुख लालू यादव ने शोक व्यक्त किया है.

उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर सुषमा स्वराज को श्रद्धांजलि देते हुए लिखा, ‘सुषमा स्वराज जी के निधन पर गहरा दुःख हुआ. एक प्रभावी संचालक, सांसद और नेता जिन्हें हमेशा याद किया जाएगा.’

सुषमा स्वराज सदन के अंदर अपनी शनदार और जानदार प्रस्तुती की वजह से जानी जाती थीं. वहीं लालू प्रसाद अपनी बातों को हल्के-फुल्के अंदाज़ में रखने के लिए जाने जाते थे. आमतौर पर लालू यादव भाषणों में अपने विरोधियों पर भारी पड़ते थे लेकिन एक बार उनका मुक़ाबला सुषमा स्वराज से पड़ गया. फिर क्या था सुषमा ने लालू यादव को उनके अंदाज़ में ही सुनाया.

लालू यादव को उम्मीद नहीं रही होगी कि सुषमा उनपर इस तरह से प्रहार करेंगी.

दरअसल एफडीआई पर सदन में चर्चा के दौरान लालू प्रसाद यादव ने संसद में सुषमा स्वराज को संबोधित करते हुए कहा, “आपको मैं बड़ी बहन मानता हूं. इसे अनादर मत समझिएगा. मुझे आपको देख कर एक शेर याद आ रहा है, मोहब्बत में तुम्हें आंसू बहाने नहीं आता, बनारस में आकर तुम्हें पान खाने नहीं आता.”

इसके जवाब में सुषमा स्वराज ने कहा, मैं उनके भाषण का जवाब उनके जुगाड़ु शेर के जरिए दे दूं तो ज्यादा बेहतर होगा, क्योंकि उनको भाषा वही समझ में आती है. स्वराज ने कहा कि मैं आपके ही तर्ज पढ़ एक शेर पढ़ देती हूं. उन्होंने लालू को संबोधित करते हुए कहा, आपको गांठें खोलना नहीं आता, मसखरी के अलावा कुछ बोलना नहीं आता.

साल 2013 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज के बीच शेर और शायरी का मौक़ा देखने को मिला था.

दरअसल, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने बीजेपी पर निशाना साधते हुए शेर पढ़ा, ‘हमें है उनसे वफा की उम्मीद, जो नहीं जानते वफा क्या है.’

इसके बाद सुषमा स्वराज ने दो शेर पढ़कर मनमोहन सिंह को जवाब दिया. सुषमा स्वराज ने तत्कालीन लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार को मुखातिब होते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की एक शायरी का जवाब वे दो शेरों से देंगी. अपने पहले शेर में उन्होंने कहा, ‘कुछ तो मजबूरियां रही होंगी, यूं ही कोई बेवफा नहीं होता.’ सुषमा स्वराज ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री जी देश के साथ बेवफाई कर रहे हैं.

इसके बाद उन्होंने दूसरा शेर पढ़ा, ‘तुम्हें वफा याद नहीं हमें जफा याद नहीं, जिंदगी और मौत के दो ही तराने हैं एक तुम्हें याद नहीं, एक हमें याद नहीं.’ सुषमा स्वराज के इस शेर के बाद पूरे सदन का माहौल हल्का हो गया और संसद सदस्य हंस पड़े थे.

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