सुषमा स्‍वराज ने जब UN में लगाई थी दहाड़, पूरी दुनिया के आगे बेनक़ाब हो गया था पाकिस्‍तान

सुषमा स्‍वराज का भाषण इतना धारदार था कि पाकिस्‍तानी प्रतिनिधि को जवाब ढूंढे नहीं मिला. पाकिस्‍तान प्रायोजित आतंकवाद पर वार करते इस भाषण की खूब तारीफ हुई थी.

नई दिल्‍ली: पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्‍वराज का बीती रात AIIMS में निधन हो गया. एक विदुषी राजनेता के रूप में ख्‍याति बटोरने वाली सुषमा की पहचान बनी अपने धारदार भाषणों से. चाहे वह 1996 में अविश्‍वास प्रस्‍ताव के दौरान उनका भाषण हो या 2011-12 महंगाई के मुद्दे पर विरोध करते हुए की गई तक़रीर, सुषमा स्‍वराज ने अपनी वाकपटुता से विरोधियों को चित करने में कोई कसर नहीं छोड़ी.

पिछले साल बतौर विदेश मंत्री उन्‍होंने संयुक्‍त राष्‍ट्र महासभा (UNGA) में भारत का पक्ष रखा था. आतंकवाद पर आधारित यह भाषण सुषमा स्‍वराज के वाक-कौशल और सटीक सोच का उदाहरण है. अपने भाषण से सुषमा स्‍वराज ने पाकिस्‍तान को पूरी दुनिया के सामने बेनक़ाब कर दिया था.

संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 73वें अधिवेशन को संबोधित करते हुए सुषमा स्‍वराज ने संयुक्त राष्ट्र से भारत की पहल अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद पर व्यापक समझौता को शीघ्र स्वीकार करने की अपील की थी. ऐसा इसलिए ताकि ‘इस वैश्विक अभिशाप को स्पष्ट शब्दों में परिभाषित किया जा सके क्योंकि पाकिस्तान आतंकियों को स्वतंत्रता सेनानी कहता है.’

सुषमा स्वराज ने कहा था, “हमारे मामले में आतंकवाद कहीं दूर में पैदा नहीं होता है बल्कि सीमा पार से आता है. हमारे पड़ोसी को न सिर्फ आतंकवाद को पैदा करने की विशेषज्ञता है बल्कि वह दोरंगापन की भाषा बोलते हुए नकाब ओढ़कर दुष्टता करने की कोशिश करने में भी माहिर है.”

UN में सुषमा स्‍वराज ने खोल दी थी पाक की पोल

सुषमा ने कहा था कि भारत पर वार्ता की प्रक्रिया को नाकाम करने का आरोप झूठा है. उन्होंने कहा था, “हमारा मानना है कि वार्ता विवादों को हल करने का महज एक उचित जरिया है. पाकिस्तान के साथ वार्ता कई बार शुरू हुई. अगर वार्ता रुकी तो सिर्फ उनके व्यवहार के कारण.”

“जो युद्ध की तलाश में या अन्य साधनों से निर्दोष लोगों की जान लेते हैं वे मानवाधिकार के नहीं बल्कि अमानवीय व्यवहार के समर्थक हैं. पाकिस्तान हत्यारों का महिमामंडन करता है और बेगुनगाहों के खून को देखने से इनकार करता है.” उन्होंने संयुक्त राष्ट्र से सीसीआईटी पर शीघ्र अमल करने की अपील की थी. भारत ने संयुक्त राष्ट्र के पास इसका मसौदा 1996 में पेश किया था.

सुषमा स्वराज ने कहा, “आज तक वह मसौदा एक मसौदा बनकर ही पड़ा हुआ है क्योंकि हम समान भाषा पर सहमत नहीं हो सकते हैं.” उन्होंने कहा, “एक तरफ हम आतंकवाद का मुकाबला करना चाहते हैं और दूसरी तरफ जब पाकिस्तान आतंकियों को स्वतंत्रता सेनानी कहता है तो हम इसे परिभाषित नहीं कर पाते हैं.”

सुषमा ने अपने अंतिम ट्वीट में कश्मीर पर सरकार के कदम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी थी. उन्होंने कहा था कि वह इस दिन का पूरे जीवनभर इंतजार कर रही थीं. सुषमा ने पिछला लोकसभा चुनाव लड़ने से इंकार कर दिया था.

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