10 साल की उम्र में सैनिकों को देशभक्ति गीत सुनाती थीं सुषमा स्वराज, देखें 25 अनसुनी कहानियां

सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली सुषमा स्वराज इंदिरा गांधी के खिलाफ भी प्रचार कर चुकी हैं.


नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी की मुखर नेता और पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का मंगलवार को दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया. स्वराज के दिल्ली के एम्स अस्पताल में भर्ती कराया गया था लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका. फिलहाल स्वराज का पार्थिव शरीर पार्टी कार्यालय ले जाया जा रहा है. पार्टी कार्यालय के पास भारी संख्या में लोग जमा हैं.

आज भले ही सुषमा स्वराज हमारे बीच में न हों लेकिन उनसे जुड़ी ऐसी कई कहानियां हैं जो हमेशा याद की जाएंगी. हम आपके लिए सुषमा स्वराज की ऐसी ही 25 कहानियां लेकर आए हैं.

1. देश की पूर्व विदेशमंत्री सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हरियाणा के अंबाला में हुआ था, सुषमा स्वराज के पिता और दादा, दोनों आरएसएस से जुड़े थे, सुषमा स्वराज भी बचपन के दिनों में संघ के कार्यक्रमों में अपने पिता के साथ जाया करती थीं..

2. सुषमा स्वराज एक बार अपने पिता के साथ पलवल के मेले में गई, जहां आरएसएस के कार्यकर्ताओं ने अंताक्षरी का आयोजन किया, अंताक्षरी प्रतियोगिता फिल्मी गीतों के बजाए कविताओं पर खेला जाना था, वहां सुषमा स्वराज अपने पिता के साथ वाले ग्रुप में बैठी थीं, तब गाने के लिए ‘अक्षर आया ‘था’, लेकिन किसी को भी था से कोई कविता नहीं सूझी तब पांच साल की सुषमा स्वराज ने था से कविता सुना कर अपनी ग्रुप को हारने से बचाया था.

3. सुषमा स्वराज जब 10 साल की थी, तब उन दिनों भारत-चीन के बीच जंग छिड़ी, उस दौरान सुषमा अपने पिता के साथ रेलवे स्टेशन जाया करती थी. उन दिनों अंबाला एक बड़ा रेलवे स्टेशन हुआ करता था, वहां गाड़ियां काफी देर तक रुकती थी, और सेनाओं के मनोबल को बढ़ाने के लिए देशभक्ति गाने बजाए जाते थे, तब सुषमा स्वराज सैनिकों को देशभक्ति के जोशीले गीत सुनाया करती थी.

4. सुषमा स्वराज ने सनातन धर्म कॉलेज से संस्कृत और राजनीति विज्ञान में स्नातक किया, 1970 में सुषमा स्वराज को अपने कालेज में सर्वश्रेष्ठ छात्रा के सम्मान से सम्मानित किया गया था, इसके बाद सुषमा स्वराज चण्डीगढ़ के पंजाब यूनिवर्सिटी से लॉ की पढाई की. पंजाब विश्वविद्यालय से भी उन्हें 1973 में सर्वोच्च वक्ता का सम्मान मिला था, 1973 में ही सुषमा स्वराज सुप्रीम कोर्ट में अधिवक्ता के पद पर काम करने लगी.

5. सुषमा स्वराज के पति का नाम स्वराज कौशल है. दोनों का प्यार कॉलेज के दिनों में परवान चढ़ा था. 13 जुलाई 1975 को इनकी शादी हुई. पति स्वराज कौशल सुप्रीम कोर्ट के जाने-माने लॉयर हैं. उन्हें महज 34 साल की उम्र में देश का सबसे युवा एडवोकेट जनरल बना दिया गया था. स्वराज कौशल 37 साल की उम्र में मिजोरम के गवर्नर भी बन गए थे.

6. सुषमा और स्वराज की प्रेम कहानी पंजाब यूनिवर्सिटी चंडीगढ़ के लॉ डिपार्टमेंट में शुरू हुई थी. वहां दोनों पहली बार मिले जिसके बाद दोनों के मुलाकातों का दौर शुरू हुआ था.

7. भले ही 1973 में सुषमा स्वराज ने अपनी वकालत सुप्रीम कोर्ट में शुरु कर दी, लेकिन असल जिंदगी में सुषमा का झुकाव राजनीति में बचपन से ही था, 1970 में सुषमा स्वराज ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद से अपना राजनीतिक करियर शुरू किया. 1975 के दौरान उनके पति स्वराज कौशल सोशलिस्ट लीडर जॉर्ज फर्नांडिस से जुड़े हुए थे तब सुषमा स्वराज भी साल 1975 में फर्नांडिस की लीगल डिफेंस टीम का हिस्सा बन गईं.

8. आपातकाल के बाद सुषमा स्वराज जनता पार्टी में शामिल हो गईं और धीरे-धीरे पार्टी में उनका कद बढ़ता चला गया. जुलाई 1977 में सुषमा देवी लाल की अगुवाई वाली जनता पार्टी सरकार में कैबिनेट मंत्री बनीं. उस वक्त उनकी उम्र महज 25 साल थी. इसके बाद सुषमा 1987 से 1990 तक हरियाणा की शिक्षा मंत्री भी रहीं. 27 साल की उम्र में सुषमा स्वराज को जनता पार्टी हरियाणा का प्रदेश अध्यक्ष भी बनाया गया था.

9. सुषमा स्वराज ने अप्रैल 1990 को राष्ट्रीय राजनीति में कदम रखा. उन्हें पहली बार बीजेपी ने राज्यसभा का सदस्य बनाया. इसके बाद 1996 में सुषमा दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र से सांसद चुनी गईं. उन्हें अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में सूचना प्रसारण मंत्री बनाया गया था. अक्टूबर 1998 में उन्होंने केंद्रीय कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं.

10. सुषमा स्वराज के लिए साल 1999 काफी महत्वपूर्ण रहा, जब तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी कर्नाटक के बेल्लारी सीट से चुनाव लड़ रही थी, उस दौरान बीजेपी को सोनिया के खिलाफ कोई उम्मीदवार नहीं मिल रहा था, तब पार्टी ने सुषमा को बेल्लारी से उतारा, सुषमा स्वराज के बारे में बताया जाता है कि महज 30 दिनों के अंदर उन्होने कन्नड़ भाषा सीखी और लोगों को स्थानीय भाषा में संबोधित किया, हालांकि इस चुनाव में सोनिया गांधी से महज 7 प्रतिशत वोटों के अंतर से हार गई.

11. सोनिया गांधी के खिलाफ चुनाव लड़ने वाली सुषमा स्वराज इंदिरा गांधी के खिलाफ भी प्रचार कर चुकी हैं, 1978 में इंदिरा गांधी जब कर्नाटक के चिकमंगलूर से उपचुनाव लड़ रही थी, तब जनसंघ ने 26 साल की सुषमा स्वराज को कर्नाटक भेजा था, ताकि सुषमा अपने ओजस्वी भाषण से इंदिरा के प्रभाव को रोक सके.

12. हर दिन के हिसाब से अलग-अलग रंगों की साड़ी पहनना और खाने का चयन करना सुषमा की पहचान थी, सुषमा स्वराज का ज्योतिष और रत्नों के असर में गहरा विश्वास था, सोमवार के दिन सुषमा स्वराज सफेद साड़ी पहनती थी और सफेद चीजें खाती थीं, पाकिस्तान दौरे के दौरान सुषमा ने खासतौर पर हरी साड़ी पहनी थी, आलोचना होने पर सुषमा ने अपने आलोचकों को बुधवार का दिन याद दिलाते हुए चुप कराया था, क्योंकि बुधवार के दिन सुषमा हरी साड़ी ही पहनती थी. उनके किचन में भी दिनों के हिसाब से खाने के सामान अलग-अलग डिब्बे रखे होते थे.

13. 2004 में जब कांग्रेस के नेतृत्व वाली यूपीए को लोकसभा में बहुमत मिला, तो सोनिया गांधी के प्रधानमंत्री बनने के कयास लगाए जा रहे थे, ऐसे में सुषमा स्वराज के एक एलान से सारा देश चौंक गया था, सुषमा ने कहा था, अगर इटली में जन्मीं सोनिया गांधी प्रधानमंत्री बनती हैं, तो वो अपना सिर मुंडाकर सफेद साड़ी पहनने लगेंगी, तब सुषमा ने ही सोनिया के विदेशी मूल के होने का मुद्दा पूरजोर तरीके से उठाया था, इस विरोध के बाद ही सोनिया ने अपनी जगह मनमोहन सिंह को देश का प्रधानमंत्री बनवाया.

14. सुषमा स्वराज फिल्म अभिनेता और बीजेपी के पूर्व नेता शत्रुघ्न सिन्हा की जबरदस्त फैन थी, सुषमा स्वराज शत्रुघ्न सिन्हा की फिल्मों को देखा करती थी, दूसरी तरफ शत्रुघ्न सिन्हा भी सुषमा की काबिलियत के प्रशंसक हैं. शत्रुघ्न सिन्हा छोटे कद की सुषमा स्वराज को ‘द लॉन्ग एंड शॉर्ट ऑफ बीजेपी कहते थें.

15. 2014 में एनडीए की सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में सुषमा स्वराज को विदेश मंत्री बनाया था, तब सुषमा स्वराज ने पीएम मोदी की विदेश नीति को लागू कराने में अहम भूमिका निभाई. विदेशमंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज के संयुक्त राष्ट्र में दिए गए भाषण को हमेशा याद किया जाएगा. सुषमा स्वराज 7 बार सांसद और तीन बार विधायक रहीं.

16. सुषमा स्वराज ने विदेशमंत्री रहते हुए अपने कामकाज की अमीट छाप छोड़ी और कई बार इंसानियत की मिसाल पेश की, विदेशमंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ने यमुना एक्सप्रेसवे पर सड़क दुर्घटना में घायल इतालवी नागरिक की मदद की, ये मदद सुषमा ने ट्विटर पर मिली सूचना के आधार पर पहुंचाई थी और कहा था कि हिन्दुस्तान में कोई अकेला नहीं है, उसके साथ पूरा देश खड़ा है.

17. संकट में घिरे लोगों तक मदद पहुंचाना सुषमा स्वराज का स्वभाव था, एक बार एक भारतीय परिवार पासपोर्ट खोने की वजह से कुआलालंपुर में फंस गया, तब परिवार की एक गुहार पर सुषमा स्वराज ने मलेशिया में भारतीय दूतावास को मदद देने का आदेश दिया, दूतावास अधिकारियों के अवकाश पर होने के बावजूद मलेशिया में फंसे भारतीय परिवार को मदद पहुंचाई गई और मामले को सुलझाया गया.

18. अमेरिका में पढने वाली अनुषा धुलिपाला की कहानी भी कुछ इसी तरह की है, अनुषा के मुताबिक जब उसका पासपोर्ट खो गया था, तब अमेरिका के अधिकारियों ने उसे वापस भारत जाकर वीजा लाने को कहा था, तब सुषमा स्वराज ने अनुषा की मदद की और पासपोर्ट खोने के बाद भी अनुषा अपने एग्जाम दे सकीं.

19. विदेश मंत्री के तौर पर सुषमा स्वराज की सबसे बड़ी कामयाबी यमन में फंसे भारतीयों को बचाने के लिए याद किया जाएगा. यमन के इस बड़े मिशन को ‘ऑपरेशन राहत’ का नाम दिया गया था, जिसमें 4,741 भारतीय नागरिकों और 48 देशों के 1,947 लोगों को बचाया गया था. सुषमा स्वराज की पहल पर इसी तरह के रेस्क्यू ऑपरेशन लीबिया और इराक में भी किए गए, जहां से सैकड़ों भारतीय नागरिकों को बचाया गया

20. पांच साल की एक पाकिस्तानी लड़की को जब लीवर ट्रांसप्लांट की जरूरत पड़ी, तब तत्कालीन विदेशमंत्री सुषमा स्वराज ने उसकी मदद करके इंसानियत की मिसाल पेश की.

21. भारत पाकिस्तान के संबंध कभी भी अच्छे नहीं रहे, फिर भी सुषमा स्वराज ने पाकिस्तान में फंसी भारतीय लड़की गीता की मदद की, सुषमा स्वराज के प्रसाय से बाद सुनने और बोलने में असमर्थ गीता 2015 में भारत आ सकी

22. पाकिस्तान की महिला नीलिमा गफ्फार के पति ने सुषमा स्वराज से अपनी बीमार पत्नी को भारत में इलाज के लिए वीजा को मंजूरी देने की गुजारिश की थी, जिस पर सुषमा स्वराज ने तुरंत एक्शन लेते हुए नीलिमा और उनके पति का वीजा मंजूर किया, जिसके बाद नीलिमा गफ्फार इलाज के लिए पाकिस्तान से भारत आई.

23. विदेश मंत्री रहते हुए सुषमा स्वराज ने यूएन की महासभा में हिन्दी में भाषण के देकर पाकिस्तान पर करारा प्रहार किया था, पाकिस्तान पर 9 मिनट तक बोलते हुए सुषमा स्वराज ने गुड और बैड आतंकवाद पर दुनिया को चेताया.

24. अंतरर्राष्ट्रीय कोर्ट में कुलभूषण जाधव का केस लड़ने वाले वकील हरीश साल्वे से एक दिन पहले सुषमा स्वराज ने बात की और उन्हे घर आने का निमंत्रण दिया था, इस दौरान सुषमा स्वराज ने हरीश साल्वे के एक रूपए के फीस का भी जिक्र किया, सुषमा स्वराज ने साल्वे से कहा था आपको एक रुपए बतौर फीस भी देनी है.

25. बेहतरीन वक्ता और बेहतरीन नेता सुषमा स्वराज मोदी सरकार पार्ट टू में किसी ओहदे पर नहीं थी, वजह उसकी सेहत से जुड़ा था, हालांकि देश की राजनीति हालात पर पैनी नजर रखने वाली सुषमा स्वराज ने तीन तलाक और धारा 370 के मुद्दे पर ट्वीट कर मोदी सरकार को बधाई भी दी थी, लेकिन 6 अगस्त की रात दिल का दौरा पड़ने की वजह से सुषमा स्वराज का निधन हो गया.

गौरतलब है कि सुषमा स्वराज के निधन पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी समेत तमाम नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी है. साथ ही आम लोगों ने भी सोशल मीडिया पर लोगों ने सुषमा स्वराज के लिए शोक व्यक्त किया है. लोग उन्हें भारत की आयरन लेडी कहकर याद कर रहे हैं.

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