‘लॉकडाउन की वजह से लोगों को वापस नहीं भेज पाए,’ पढ़िए तबलीगी जमात की पूरी सफाई

दिल्ली में हैरान कर देने वाला मामला सामने आने के बाद निजामुद्दीन (Nizamuddin) स्थित तब्लीगी जमात (tabligh-e-jamaat) के मरकज को खाली करा लिया गया है. पढ़िए जमात ने अपनी सफाई में क्या कहा है.
tabligh e jamaat coronavirus, ‘लॉकडाउन की वजह से लोगों को वापस नहीं भेज पाए,’ पढ़िए तबलीगी जमात की पूरी सफाई

दिल्ली में हैरान कर देने वाला मामला सामने आने के बाद निजामुद्दीन (Nizamuddin) स्थित तब्लीगी जमात (tabligh-e-jamaat) के मरकज को खाली करा लिया गया है. यहां करीब 14 सौ लोग ठहरे हुए थे जिसमें विदेशी भी शामिल थे. दिल्ली नगरनिगम से 40 लोगों की टीम निजामुद्दीन दरगाह इलाके में पहुंचकर सैनिटाइज कर रही है और ड्रोन कैमरों से इस पर नजर रखी जा रही है. इस पूरे मामले पर तबलीगी जमात की तरफ से आधिकारिक बयान आया है.

पढ़िए तबलीगी जमात का पूरे स्टेटमेंट-

तबलीगी जमात 100 साल से पुरानी संस्था है जिसका हेडक्वार्टर दिल्ली की बस्ती निज़ामुद्दीन में है. यहां देश और विदेश से लोग लगातार सालों भर आते रहते है. ये सिलसिला लगातार चलता है जिसमें लोग दो दिन, पांच दिन या 40 दिन के लिए आते है. लोग मरकज में ही रहते है. और यहीं से तबलीग का काम करते है.

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जब भारत में जनता कर्फ्यू का ऐलान हुआ उस वक्त बहोत सारे लोग मरकज में रह रहे थे. 22 मार्च को प्रधान मंत्री ने जनता कर्फ्यू का ऐलान किया. उसी दिन मरकज को बन्द कर दिया गया. बाहर से किसी भी आदमी को नहीं आने दिया गया. जो लोग मरकज में रह रहे थे उन्हें घर भेजने का इंतजाम किया जाने लगा.

21 मार्च से ही रेल सेवाएं बन्द होने लगी थी. इसलिए बाहर के लोगों को भेजना मुश्किल था. फिर भी दिल्ली और आस पास के करीब 1500 लोगों को घर भेजा गया. अब करीब 1000 लोग मरकज में बच गए थे. जनता कर्फ्यू के साथ साथ 22 मार्च से 31 मार्च तक के लिए दिल्ली के मुख्य मंत्री ने लॉकडाउन का ऐलान किया. इस वजह से बस या निजी वाहन भी मिलने बन्द हो गए. लोगों को उनके घर भेजना मुश्किल हो गया. ये लोग पूरे देश से आए हुए थे.

प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री का आदेश मानते हुए हम लोगों ने लोगों को बाहर भेजना सही नहीं समझा. उनको मरकज में ही रखना बेहतर था. 24 मार्च को अचानक SHO निज़ामुद्दीन ने हमे नोटिस भेजा कि हम धारा 144 का उलंघन कर रहे है. हमने उसी दिन उनको जवाब दिया की मरकज को बन्द कर दिया गया है. 1500 लोगों को उनके घर भेज दिया गया है. अब 1000 बच गए हैं जिनको भेजना मुश्किल है क्योंकि ये दूसरे राज्यों से आए है.

हमने ये भी बताया कि हमारे यहां विदेशी नागरिक भी है. हमने SDM को अर्जी दे कर 17 गाड़ियों के लिए कर्फ्यू पास मांगा. ताकि लोगों को घर भेजा जा सके. हमे अभी तक को पास जारी नहीं हुई है. 25 मार्च को तहसीलदार और एक मेडिकल कि टीम आई. उन्होंने लोगों कि जांच की. 26 मार्च को हमें SDM के ऑफिस में बुलाया गया और DM से भी मुलाकात कराया गया. हमने फंसे हुए लोगों की जानकारी दी और कर्फ्यू पास मांगा.

27 मार्च को 6 लोगों की तबीयत खराब होने की वजह से मेडिकल जांच के लिए ले जाया गया. 28 मार्च को SDM और WHO की टीम 33 लोगों को जांच के लिए ले गई जिन्हें राजीव गांधी कैंसर अस्पताल में रखा गया. 28 मार्च को ACP लाजपत नगर के पास से नोटिस आया कि हम गाइडलाइंस और कानून का उलंघन कर रहे है. हमने इसका पूरा जवाब दूसरे ही दिन भेज दिया.

30 मार्च को अचानक ये खबर सोशल मीडिया में फैल गई की कोराना के मरीजों की मरकज में रखा गया है और टीम वहा रेड कर रही है. मुख्यमंत्री ने भी मुकदमा दर्ज करने के आदेश दे दिए. अगर उनको हकीकत मालूम होती तो वह ऐसा नहीं करते.

हमने लगातार पुलिस और अधिकारियों को जानकारी दी के हमारे यहां लोग रुके हुए है. वह लोग पहले से यहां आए हुए थे. उन्हें अचानक इस बीमारी की जानकारी मिली. हमने किसी को भी बस अड्डा या सड़कों पर घूमने नहीं दिया और मरकज में बन्द रखा जैसा के प्रधानमंत्री का आदेश था. हमने ज़िम्मेदारी से काम किया.

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