जम्मू-कश्मीर: अज्ञात बीमारी से हुई 10 बच्चों की मौत, मचा हड़कंप

स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कमिटी गठित की है. साथ ही बीमारी और मौत का पता लगाने के लिए ब्लॉक रैपिड रेस्पांस टीम का गठन किया गया है.

ten children have died, जम्मू-कश्मीर: अज्ञात बीमारी से हुई 10 बच्चों की मौत, मचा हड़कंप

जम्मू-कश्मीर के उधमपुर जिले में अज्ञात बीमारी से 10 बच्चों की मौत हो गई है. बच्चों की मौत से उधमपुर के रामनगर तेहसील में हड़कंप मचा हुआ है. कुछ बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है. बच्चों को पहले बुखार, फिर उल्टी और फिर उसके बाद किडनी फेल होने के चलते मौत हुई है.

स्वास्थ्य विभाग ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच कमिटी गठित की है. साथ ही बीमारी और मौत का पता लगाने के लिए ब्लॉक रैपिड रेस्पांस टीम का गठन किया है. साथ में केंद्र से स्वास्थ्य विभाग की टीम भी जम्मू आई हुई है. यह टीम पता लगाने की कोशिश में है कि यह अज्ञात बीमारी क्या है.

इन मामलों के सामने आने के बाद इलाके के लोगों में दहशत का माहौल है. सुबह के सबसे बड़े हॉस्पिटल एसएमजीएस में अज्ञात बीमारी के चलते एक बच्चे का इलाज चल रहा है.

स्वास्थ्य विभाग की मानें तो इस बच्चे की हालत गंभीर बनी हुई है. डॉक्टरों का कहना है कि केंद्र से भी जो टीम गठित की गई है वह भी यहां का दौरा कर चुकी है. तमाम सैंपल टेस्ट ले चुके हैं. हमको उम्मीद है कि इस अज्ञात बीमारी का पता जल्दी चल जाएगा.

दूसरी तरफ, जम्मू के सबसे बड़े जच्चा-बच्चा अस्पताल एसएमजीएस में ही दो माह में 122 बच्चों की विभिन्न बीमारियों से जान गई है. ज्यादातर बच्चे दूसरे अस्पतालों से रेफर होकर यहां आए थे. एसएमजीएस अस्पताल में रोजाना औसतन दो बच्चों की मौत हो रही है. कई दिन यह आंकड़ा बढ़ भी जाता है.

अस्पताल के पीडियाट्रिक यूनिट में नवंबर-दिसंबर माह में 122 से अधिक बच्चे दम तोड़ चुके हैं. यह हाल तब है जब एसएमजीएस अस्पताल में पीडियाट्रिक सेक्शन के साथ थैलेसीमिया, कैंसर, हीमोफीलिया, न्यूट्रिशन आदि केंद्र काम कर रहे हैं. इसके अलावा आठ वार्डों में बच्चों का इलाज किया जाता है.

जम्मू संभाग के दस जिलों से बच्चे यहां रेफर होकर आते हैं.अस्पताल की ओपीडी में रोजाना 500-600 बच्चे आते हैं, जिसमें 80-90 बच्चे भर्ती किए जाते हैं. पीडियाट्रिक सेक्शन में नवंबर में 2100 और दिसंबर में 1800 से अधिक बीमार शिशु भर्ती कराए गए.

वहीं, इस पूरे मामले को लेकर जब अस्पताल के पीडियाट्रिक डिपार्टमेंट के एचओडी घनश्याम सैनी से हमने बात की तो उनका कहना था कि जो भी आंकड़े सामने आए हैं, इसका फिगर तो मैं आपको कह नहीं सकता, लेकिन एक बात जरूर है कि हमारे पास हॉस्पिटल और फेस्टिविटीज की कमी है.

उन्होंने कहा कि जब भी किसी और डिस्ट्रिक्ट से यहां पर बच्चों को रेफर किया जाता है या तो वह काफी सीरियस होते हैं या फिर उनकी रास्ते में ही मौत हो जाती है. जरूरत इस बात की है कि सरकार प्रदेश में हॉस्पिटल फैसिलिटी को और ज्यादा सही करे. साथ में बच्चों के लिए हर जिले में एक बेहतर अस्पताल बनाया जाए.

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