कश्मीर को अपनी जागीर और सियासी दुकान समझने वालों के भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा

पिछले पांच दिनों में सुरक्षाबलों ने घाटी में 10 आतंकवादियों को मार गिराया है. 2020 में अब तक 75 ऑपरेशन में 180 आतंकियों का सफाया किया गया. राजधानी श्रीनगर में 8 एनकाउंटर हुए जिनमें सुरक्षाबलों ने 18 आतंकियों को ढेर कर दिया.

अब हम आपको बताते हैं पिछले 14 महीने में कश्मीर में क्या बदला है. किताबों के पन्नों में जिस जन्नत का जिक्र भर रहा गया था, कैसे उसे जमीन पर उतारने की कोशिश शुरू हो चुकी है. साथ ही हम आज कश्मीर को अपनी जागीर और सियासी दुकान समझने वाले अबदुल्ला और मुफ्ती परिवार के भ्रष्टाचार का काला चिट्ठा भी खोलेंगे. इनकी सरकारों के दौरान लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की लिस्ट आपके सामने रखेंगे.

अनुच्छेद 370 हटने से आतंकवाद का अंत

5 अगस्त 2019 को जम्मू-कश्मीर को विशेषाधिकार देने वाले आर्टिकल 370 को निरस्त करने के बाद राज्य में आतंकवादी वारदातों में भारी गिरावट देखी गई है. 22 सितंबर 2020 को केन्द्रीय गृह राज्य मंत्री जी किशन रेड्डी ने बताया कि पिछले साल 5 अगस्त से लेकर इस साल 31 अगस्त तक 393 दिनों में आतंकवादी घटनाओं में पिछले साल के मुकाबले 53 फीसदी कमी आई. सबसे बड़ी बात ये कि आतंक के गढ़ माने जाने वाले इलाकों में भी कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ.

पिछले पांच दिनों में सुरक्षाबलों ने घाटी में 10 आतंकवादियों को मार गिराया है. 2020 में अब तक 75 ऑपरेशन में 180 आतंकियों का सफाया किया गया. राजधानी श्रीनगर में 8 एनकाउंटर हुए जिनमें सुरक्षाबलों ने 18 आतंकियों को ढेर कर दिया.

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चार मुख्य आतंकी संगठनों हिजबुल मुजाहिदीन, श्कर-ए-तैय्यबा, जैश-ए- मुहम्मद और अंसर गजवत- उल-हिंद के टॉप कमांडर मारे जा चुके हैं.

अनुच्छेद 370 हटने से पत्थरबाजी पर लगाम

विशेष राज्य का दर्जा हटाए जाने के बाद अब कश्मीर में एनकाउंटर की जगहों पर पथराव की घटनाएं नहीं होतीं. जो कि एक बड़ी कामयाबी है. केन्द्र सरकार के मुताबिक 2018-19 के मुकाबले 2019-20 में पत्थरबाजी की घटनाओं में 56 फीसदी की गिरावट आई है.

अनुच्छेद 370 हटने से युवाओं ने छोड़ा आतंक का रास्ता

पिछले 14 महीनों में बड़ी तादाद में कश्मीरी युवाओं ने आतंकवाद से तौबा कर लिया है. एक आंकड़े के मुताबिक इस साल जुलाई तक 67 युवा आतंकी संगठनों में भर्ती हुए. जबकि 2019 में पहले सात महीने में यह संख्या 105 थी.

इसके अलावा रोजगार और पर्यटन में बढ़ोतरी, रोड और पुल जैसे सरकारी प्रोजेक्ट्स का विस्तार, किसानों के लिए कल्याणकारी योजनाएं और बेहतर अर्थव्यवस्था जैसे कई नए बदलाव का फायदा जम्मू-कश्मीर की अवाम को मिल रहा है. अब भ्रष्टाचार के उन मामलों को देख लीजिए जिनके आरोप नेशनल कांफ्रेस और पीडीपी की सरकारों पर लगे हैं.

25,000 करोड़ का रोशनी जमीन घोटाला

पिछले शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट ने रोशनी भूमि योजना को असंवैधानिक करार देते हुए कथित घोटाले की सीबीआई जांच का आदेश दिया है. आरोप है कि इस योजना से राज्य के खजाने को 25,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. 2001 में जब कानून बनाकर इस योजना को हरी झंडी दी गई तब राज्य में फारुक अब्दुल्ला की सरकार थी.

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जिसमें राज्य की भूमि को निजी स्वामित्व में बदलकर 25 हजार करोड़ रुपये उगाही की योजना थी. लेकिन जमीन कौड़ियों के भाव बेचे गए. सीएजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक राज्य सरकार को सिर्फ 76 करोड़ रुपये मिले. आरोप है कि कथित घोटाले में जम्मू कश्मीर के नेता, पुलिस अधिकारी, प्रशासनिक अधिकारी और भू-माफिया शामिल हैं.

जम्मू-कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन घोटाला

ये घोटाला 43 करोड़ रुपये का बताया जा रहा है. पूर्व सीएम फारूक अब्दुल्ला से पिछले साल प्रवर्तन निदेशालय इस मामले में लंबी पूछताछ कर चुकी है. क्योंकि अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष थे. आरोप है कि राज्य क्रिकेट संघ में वित्तीय अनियमितताएं हुईं. हालांकि पूछताछ के बाद फारूक अब्दुल्ला ने दावा किया था कि वो हर जांच के लिए तैयार हैं.

J&K बैंक भर्ती घोटाला

आरोप है कि जम्मू कश्मीर बैंक में पिछले दरवाजे से हजारों नियुक्तियां की गईं. मामले की जांच कर रही एंटी करप्शन ब्यूरो पूर्व सीएम महबूबा मुफ्ती को इस मामले में सवाल-जवाब के लिए नोटिस जारी कर चुकी है. एफआईआर की जांच से पता चला कि कई नियुक्तियों के लिए बैंक के चेयरमैन से महबूबा सरकार के मंत्रियों ने सिफारिश की.

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