Exclusive: सड़क पर भीड़ का होना इस बात का सबूत नहीं कि मांग जायज है: आरिफ मोहम्मद खान

केरल की राज्य सरकार ने हाल ही में नागरिकता कानून विरोधी रेजोल्यूशन पास किया है. इस पर आरिफ मोहम्मद ने कहा कि केरल में नागरिकता कानून कोई मुद्दा नहीं है, अगर कुछ लोग इस मुद्दे पर अपना समय और अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं तो इसका इतना नोटिस लेने की जरूरत नहीं है.
Arif Mohammad Khan on CAA protest, Exclusive: सड़क पर भीड़ का होना इस बात का सबूत नहीं कि मांग जायज है: आरिफ मोहम्मद खान

कन्नूर यूनिवर्सिटी में इंडियन हिस्ट्री कांग्रेस में हुए विवाद के बाद केरल के गवर्नर आरिफ मोहम्मद खान ने टीवी9 भारतवर्ष से खास बातचीत में उस विवाद के बारे में खुलकर बातचीत की. उन्होंने कहा कि इरफान हबीब अपने तानाशाही अंदाज के लिए जाने जाते हैं. उनमें अपने से विरोधी मतों को सुनने का धैर्य नहीं है. आरिफ मोहम्मद ने बताया कि उस मंच पर नियमों का पालन नहीं किया गया था.

आरिफ मोहम्मद ने कहा कि वह मंच पर गवर्नर होने के अपने पद के नैतिक कर्तव्य को निभा रहे थे. उन्होंने बताया कि अगर मंच पर संसद द्वारा पारित किसी कानून की नामुनासिब आलोचना हो रही है तो मेरा ये संविधानिक कर्तव्य है कि मैं उसकी प्रतिरक्षा करूंगा. उन्होंने कहा कि उन्होंने इसी की शपथ ग्रहण की है.

कन्नूर यूनिवर्सिटी में हुए वाकये के बारे में कहते हुए आरिफ मोहम्मद ने कहा कि जब हबीब साहब ने एडीजे की शर्ट फाड़कर मेरी तरफ बढ़ रहे थे तब वहां मौजूद लोग चिल्ला रहे थे और गालियां दे रहे थे. आरिफ मोहम्मद ने कहा कि उन्होंने मंच से मौलाना आजाद के शब्द दोहराए थे, जिसका जनता में मौजूद लोगों ने गलत मतलब निकाला.

आरिफ मोहम्मद से जब सवाल किया गया कि इतनी बड़ी तादाद में लोग सड़कों पर निकलकर बिल का विरोध कर रहे हैं तो उनका विरोध जायज है या नहीं. इसपर आरिफ मोहम्मद ने कहा कि इससे बड़ी तादाद में लोग निकले थे देश का विभाजन कराने के लिए, शाहबानों केस में फैसले के बाद भी इससे बड़ी तादाद में लोग निकले थे. आरिफ मोहम्मद ने कहा कि सड़क पर भीड़ का होना इस बात का सुबूत नहीं है कि उनकी मांग जायज है.

केरल की राज्य सरकार ने हाल ही में नागरिकता कानून विरोधी रेजोल्यूशन पास किया है. इस पर आरिफ मोहम्मद ने कहा कि केरल में नागरिकता कानून कोई मुद्दा नहीं है, अगर कुछ लोग इस मुद्दे पर अपना समय और अपनी ऊर्जा लगा रहे हैं तो इसका इतना नोटिस लेने की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा कि विधायिका का काम कानून पास करना है, संवैधानिक वैधता पर फैसला देने का काम कोर्ट का है.

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