इंदौर: कोरोना से मरने वाले बुजुर्ग का शव चूहों ने कुतरा, 1 लाख रुपये लेने के बाद अस्पताल ने परिजनों को सौंपा

परिजनों के मुताबिक बुजुर्ग का कोरोना (Corona) वार्ड में इलाज चल रहा था. रविवार की रात 3 बजे उनकी मौत हो गई. अस्पताल ने कहा कि निगम की गाड़ी उन्हें अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाएगी. जब परिजन अस्पताल पहुंचे तो देखा शव को कई जगह से चूहों ने कुतरा था.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 10:57 pm, Mon, 21 September 20

इंदौर (Indore) में कोरोना हॉस्पिटल (Corona Hospital) में इलाज करने वाले एक और अस्पताल में लापरवाही देखने को मिली है जिससे मानवता शर्मशार हो गई है. अन्नपूर्णा इलाके में स्थित यूनीक अस्पताल में तीन दिन पहले भर्ती हुए 87 साल के बुजुर्ग की रविवार देर रात कोरोना वायरस (Corona Virus) से मौत हो गई. परिजनों का आरोप है कि अस्पताल ने शव को रखने में लापरवाही दिखाई, जिसके बाद चूहों ने उसे कुतर दिया.

परिजनों को शव तभी सौंपा गया, जब उन्होंने अस्पताल को एक लाख का बिल सौंप दिया. मामला सामने आने के बाद कलेक्टर मनीष सिंह ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिये हैं. जांच एडीएम अजय देव शर्मा करेंगे. इंदौर के नोडल ऑफिसर कोविड-19 डॉ. ए. मलाकर ने कहा कि इस मामले में जांच के आदेश दिए गए हैं.

इतवारिया बाजार के रहने वाले नवीन चंद जैन 87 साल को सांस लेने में तकलीफ हुई तो उन्हें 17 सितंबर को यूनीक अस्पताल में भर्ती करवाया गया था.

परिजनों के मुताबिक बुजुर्ग का कोविड वार्ड में इलाज चल रहा था. रविवार की रात 3 बजे उनकी मौत हो गई. कहा गया कि निगम की गाड़ी उन्हें अंतिम संस्कार के लिए लेकर जाएगी. परिजनों के मुताबिक जब वह दोपहर 12 बजे अस्पताल पहुंचे तो देखा कि शव को जगह-जगह चूहों ने कुतर रखा है. जब इस बारे में प्रबंधन से बात की गई तो उनका कहना था कि हमसे गलती हो गई.

अस्पताल ने थमाया एक लाख का बिल

परिजन प्राची जैन का कहना है कि ”जब अस्पताल पहुंचे तो एक लाख का बिल थमा दिया गया. बिल जमा करने के बाद शव दिया गया. शव देखा तो हमारे होश उड़ गए. चेहरे और पैर पर गंभीर घाव थे. ऐसा लग रहा था जैसै अस्पताल प्रशासन ने शव को कहीं ऐसी जगह रख दिया जहां चूहों ने उसे काट डाला. आंख पर भी गंभीर घाव था”.

आक्रोशित परिजनों ने शव अस्पताल के बाहर रख कर हंगामा किया. मौके पर पहुंची पुलिस ने समझाइश दी. हालांकि, काफी देर होने के बाद भी अस्पताल की तरफ से कोई जिम्मेदार नहीं आया, जो परिजन को पूरी जानकारी दे सके.

हमें मिलने नहीं दिया गया

परिजनों के मुताबिक अस्पताल वालों ने भर्ती करने के बाद हमें मिलने नहीं दिया. रविवार शाम 4 बजे फोन पर बात हुई तो वे अच्छे से बात कर रहे थे. रात साढ़े आठ बजे अस्पताल वालों ने हमें बुलाया और हालत गंभीर बताते हुए हमसे कागज पर साइन करवा लिया. देर रात साढ़े तीन बजे हमें बताया गया कि उनकी मौत हो गई. अगर अस्पताल कहता तो हम रात में ही शव को लेकर चले जाते. लेकिन डेड बॉडी को इस तरह से छोड़ कर अस्पताल वालों ने हमारे साथ अन्याय किया है.