, आखिर कैसे ममता के चहेते बन गए आईपीएस राजीव कुमार, जानिए पूरी कहानी…
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आखिर कैसे ममता के चहेते बन गए आईपीएस राजीव कुमार, जानिए पूरी कहानी…

, आखिर कैसे ममता के चहेते बन गए आईपीएस राजीव कुमार, जानिए पूरी कहानी…

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी रोज वैली और शारदा पोंजी घोटालों में पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से सीबीआई की पूछताछ के खिलाफ कोलकाता में धरने पर बैठ गयीं. सीबीआई की टीम कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार से पूछताछ करने आई थी, क्योंकि उन्होंने सीबीआई द्वारा भेजे गए समन की अनदेखी की थी.

2016 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनावों में भाजपा और कांग्रेस ने ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सरकार पर कोलकाता पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार का इस्तेमाल करके फोन टैप करने का आरोप लगाया था. 1989 बैच के आईपीएस अधिकारी राजीव कुमार उत्तर प्रदेश से हैं और आईआईटी रुड़की से कंप्यूटर साइंस में ग्रैजुएट हैं. 

2011 के चुनावों से पहले ममता बनर्जी ने भी तत्कालीन लेफ्ट सरकार पर फोन टैपिंग के आरोप लगाए थे हालांकि सत्ता में आने के बाद ममता बनर्जी राजीव कुमार को बाहर करना चाहती थीं लेकिन बड़े अधिकारियों की सलाह मानते हुए उन्होंने राजीव कुमार को बाहर नहीं किया.

मई 2016 तक राजीव कुमार ने ममता बनर्जी का भरोसा जीत लिया था और उन्हें कोलकाता पुलिस कमिश्नर बना दिया गया. भाजपा और कांग्रेस द्वारा राजीव कुमार पर फोन टैपिंग के आरोप लगने के बाद चुनाव आयोग ने राज्य सरकार से उन्हें हटाने के लिए कहा. राजीव कुमार को विधानसभा चुनावों के दौरान हटा दिया गया लेकिन बाद में उन्हें फिर से वापस बुला लिया गया.

राजीव कुमार का कद अब टीएमसी लॅाबी में काफी बढ़ चुका था. सूत्रों की मानें तो लोकसभा चुनाव से पहले ममता बनर्जी के करीबी रहे आईपीएस अधिकारियों के एक खेमे पर दबाव बनाने के लिए राज्य भाजपा दिल्ली में पार्टी नेतृत्व पर दबाव बना रही थी और राजीव कुमार का नाम भी उस सूची में शामिल था.

पिछले साल सितंबर में टीएमसी के पूर्व नेता और अब भाजपा में शामिल हो चुके मुकुल रॅाय और भाजपा के पश्चिम बंगाल प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय के बीच कथित टेलीफोन बातचीत का एक ऑडियो क्लिप बाहर आया था.  जिसमें मुकुल रॉय, विजयवर्गीय से यह कह रहे थे कि वे बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह से बात करके कोलकाता के कुछ आईपीएस अधिकारियों पर सीबीआई से दबाव डलवाएं.

कुछ आईपीएस अधिकारी जो शारदा चिट फंड मामले की जांच के लिए गठित टीम का हिस्सा थे वे सीबीआई के रडार पर हैं और उन्हें पूछताछ के लिए भी बुलाया गया था. इसी टीम के प्रमुख के रूप में राजीव कुमार को भी पूछताछ के लिए भी बुलाया गया था.

एसटीएफ की कमान संभालने के अलावा राजीव कुमार ने एसपी (बीरभूम), स्पेशल एसपी (प्रवर्तन शाखा), डिप्टी कमिश्नर (कोलकाता पुलिस) और उप महानिरीक्षक (सीआईडी) के पद भी संभाले हैं. राजीव कुमार ने उस समय अपनी क्षमता साबित की जब टीएमसी सरकार माओवादियों को निशाने पर ले रही थी. छत्रधर महतो और अन्य माओवादी नेताओं की गिरफ्तारी के पीछे राजीव कुमार की ही मेहनत थी. कोलकाता पुलिस के स्पेशल टास्क प्रमुख के रूप में आतंकवादियों की धरपकड़ और फेक करंसी रैकेट पर नकेल कसने में भी उनका योगदान था.  

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