महज़ 20 रुपए में पराली जलाने की समस्या से मिलेगी निजात! प्रदूषण से छुटकारा

पूसा में मौजूद भारतीय कृषि अनुसंधान (IARI) ने अब फसल अवशेषों (पराली) को प्रबंधित करने के समाधान के तौर कम लागत की एक तकनीक विकसित की है.

  • TV9 Hindi
  • Publish Date - 7:31 am, Tue, 29 September 20
Stubble-Burning
पराली से हो रहा प्रदूषण (फाइल फोटो)

पंजाब और हरियाणा (Punjab-Haryana) जैसे पड़ोसी राज्यों के पराली जलाने के चलते हर साल राजधानी (Capital of India) प्रदूषण की समस्या से दो-चार होती है. सर्दियों के दिनों में पड़ोसी राज्यों में जलने वाली पराली उनका दम घोंटने का काम करती है. दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का स्तर अचानक बड़े स्तर पर पहुंच जाता है.

पंजाब और हरियाणा के किसान कटी हुई फसलों के बच्चे हुए हिस्सों को जलाना पसंद करते हैं, क्योंकि इसकी वज़ह से दूसरी फसल के लिए खेत तैयार करना तो आसान होता ही है, साथ ही लागत भी इसमें न के बराबर है.

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वहीं पूसा में मौजूद भारतीय कृषि अनुसंधान (IARI) ने अब फसल अवशेषों (पराली) को प्रबंधित करने के समाधान के तौर कम लागत की एक तकनीक विकसित की है. संस्थान के वैज्ञानिकों ने डीकंपोजर कैप्सूल तैयार किए हैं. इन कैप्सूल्स को पूसा डीकंपोजर कैप्सूल भी कहा जाता है. ये 8 माइक्रोब्स के रूप में होते हैं जो अगली फसल बुआई से पहले खेत को तैयार करने में मदद करेंगे. इनके इस्तेमाल के बाद पराली जलाने की समस्या से छुटकारा मिलेगा.

गैस चैंबर नहीं बनेगी दिल्ली

लाल-हरे रंग के कैप्सूल दिल्ली-एनसीआर को प्रदूषण के चलते गैस चैंबर बनने से राहत दिला सकते है. पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश के किसान गर्मी की फसलों के बचे अवशेष (पुआल/पराली) से खेतों को खाली करने के लिए उन्हें जला देते हैं. पराली जलाने से निकलने वाले धुएं के चलते वायु की गुणवत्ता प्रभावित होती है. जिसमें दिल्ली को सबसे ज़्यादा परेशानी का सामना करना पड़ता है.

पूसा डीकंपोज़र कैप्सूल धान के पुआल को डीकंपोज करने में कम समय लगाएगा. साथ ही इससे मिट्टी की गुणवत्ता पर भी असर नहीं पड़ेगा. इस विकल्प के इस्तेमाल से भूमि उपजाऊ बनी रहेगी.

20 रुपए में इलाज, फसलों को जलाने से आज़ादी

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक एक पाउच में आने वाले 4 कैप्सूल को 25 लीटर घोल बनाने में इस्तेमाल किया जा सकता है. इस घोल को क़रीब 2.5 एकड़ या 1 हेक्टेयर खेत में इस्तेमाल में लाया जा सकता है. इनकी कीमत महज़ 20 रूपये है.

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल प्रदूषण के खिलाफ लड़ाई में इस साल शुरू कर रहे हैं. केजरीवाल ने कहा कि वह केंद्रीय पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर से आग्रह करेंगे कि वे पड़ोसी राज्यों से पूसा डिकम्पोजर का उपयोग करने को कहें. सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) के अनुसार, पिछले साल पंजाब और हरियाणा में जलने वाली पराली ने एनसीआर दिल्ली में 44 प्रतिशत प्रदूषण में योगदान दिया.

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इसके अलावा पंजाब सरकार बायोमास बिजली संयंत्रों को प्रोत्साहित कर रही है, जिसमें धान के पुआल का इस्तेमाल करके ऊर्जा पैदा की जा सकती है. इससे धान के किसानों की आय भी बढ़ेगी. राज्य में 97.50 मेगावाट के कुल 11 बायोमास पावर प्लांट काम कर रहे हैं.