थॉमस कुक, थॉमस कुक: क्‍यों दिवालिया हुई 178 साल पुरानी कंपनी? जानें भारत पर होगा क्‍या असर
थॉमस कुक, थॉमस कुक: क्‍यों दिवालिया हुई 178 साल पुरानी कंपनी? जानें भारत पर होगा क्‍या असर

थॉमस कुक: क्‍यों दिवालिया हुई 178 साल पुरानी कंपनी? जानें भारत पर होगा क्‍या असर

दुनिया के सबसे मशहूर ट्रेवल ब्रांड्स में से एक थॉमस कुक की स्थापना 1841 में हुई थी. कंपनी बंद होने से 22,000 नौकरियां खतरे में हैं.
थॉमस कुक, थॉमस कुक: क्‍यों दिवालिया हुई 178 साल पुरानी कंपनी? जानें भारत पर होगा क्‍या असर

ब्रिटेन की दिग्गज ट्रेवल कंपनी थॉमस कुक ने कारोबार बंद कर दिया है. 178 साल पुरानी के दिवालिया होने से दुनिया भर की 22,000 नौकरियां खतरे में हैं, जिसमें 9,000 नौकरियां ब्रिटेन में हैं. कंपनी पर ढाई बिलियन डॉलर से ज्‍यादा का कर्ज था.

बंद होने से बचने के लिए कंपनी 250 मिलियन डॉलर जुटाना चाहती थी, पर किसी प्राइवेट इनवेस्‍टर ने मदद नहीं की. ब्रिटिश सरकार ने दुनियाभर में फंसे डेढ़ लाख टूरिस्‍ट्स को मुफ्त में वापस लाने की पेशकश की है.

थॉमस कुक बंद होने से इंडिया पर असर क्‍यों?

Thomas Cook की ब्रिटेन, फ्रांस और जर्मनी जैसे उच्‍च आय वर्ग वाले देशों में अच्‍छी पैठ थी. वहां के रईसों को भारत में छुट्टियां बिताने भारत में भेजा जाता रहा है. आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, भारत आने वाले कुल विदेशी पर्यटकों में ब्रिटेन की हिस्सेदारी अगस्त 2019 में 8.01 फीसदी थी.

क्‍या और कितना पड़ेगा असर?

थॉमस कुक के बंद होने का सीधा असर भारत की फॉरेन करंसी इनकम पर पड़ेगा. विदेशी जब भारत आते हैं तो अपने साथ फॉरेन करंसी लेकर आते हैं. इससे देश का फॉरेक्‍स रिजर्व मजबूत होता है.

साथ ही टूरिज्‍म देश के कई हिस्‍सों में रोजगार का सबसे बड़ा साधन है. टूरिस्‍ट्स की संख्‍या में कोई भी गिरावट अप्रत्‍यक्ष रूप से बहुतों की आजीविका पर असर डालेगी.

गोवा टूरिज्‍म को करारी चपत

थॉमस कुक के बंद होने से गोवा के टूरिज्‍म पर खासा असर पड़ेगा. यहां आने वाले अधिकतर ब्रिटिश टूरिस्‍ट Thomas Cook के जरिए ही आते थे. कंपनी गोवा के लिए सातों दिन फ्लाइट चलाती थी. पिछले सीजन में 30-35 हजार टूरिस्‍ट्स ब्रिटेन से आए थे.

थॉमस कुक पर ताला लगने के बाद, गोवा की टूरिस्‍ट्स एसोसिएशन का अंदाजा है कि ब्रिटिश टूरिस्‍ट्स की संख्‍या में 50% तक की गिरावट हो सकती है. यह भी संभावना है कि गोवा के होटल्‍स अपने किराये में कटौती करें.

बंदी से थॉमस कुक (इंडिया) बेअसर

थॉमस कुक (इंडिया) पर इसका कोई असर नहीं होगा, क्‍योंकि 2012 में उसे कनाडा की फेयरफैक्‍स फायनेंशियल होल्डिंग्‍स ने अक्‍वायर कर लिया था. इसके बाद थॉमस कुक (यूके) उसकी प्रमोटर नहीं रह गई.

कंपनी ने कहा है कि वह पूरी तरह से अलग है और लाइसेंसिंग एग्रीमेंट के जरिए सिर्फ ब्रांड नेम शेयर करते हैं. थॉमस कुक (इंडिया) पर कोई कर्ज नहीं है. यह ग्रुप एनुअली 250 करोड़ का फ्री कैश फ्लो जेनरेट करता है.

क्‍यों धराशायी हो गई थॉमस कुक?

Thomas Cook के दिवालिया होने के पीछे ऑनलाइन एग्रीगेटर्स की बढ़ती पैठ रहा. 10 साल पहले जो कर्ज का सिलसिला शुरू हुआ, कंपनी को साल में 30 लाख हॉलिडे पैकेज सिर्फ ब्‍याज चुकाने के लिए बेचने पड़े. नई पीढ़ी के टूरिस्‍ट्स को लुभाने में कंपनी नाकाम रही.

ऑनलाइन टूर एंड ट्रेवल्‍स की सुविधा देने वाले एग्रीगेटर्स की बढ़त ने भी कंपनी के लिए मुश्किलें पैदा कीं. फ्री-स्‍टे, कॉम्प्लिमेंट्री फूड एंड व्‍हीकल, इंश्‍योरेंस जैसी सुविधाओं से ऑनलाइन एग्रीगेटर्स ने परंपरागत ट्रेवल बिजनेस मॉडल को चोट पहुंचाई.

कंपनी का एक बड़ा ठिकाना तुर्की था, जहां 2016 में तख्‍तापलट की कोशिश के बाद थॉमस कुक को करारा झटका लगा. 2018 में पूरे यूरोप में चले लू के थपेड़ों ने भी थॉमस कुक को वित्‍तीय रूप से कमजोर किया.

दुनिया के सबसे मशहूर ट्रेवल ब्रांड्स में से एक इस कंपनी की स्थापना 1841 में लीसेस्टरशायर में थॉमस कुक ने की थी. थॉमस कुक के सीईओ पीटर फंकहॉजर ने दिवालियापन पर बात करते हुए लाखों उपभोक्ताओं व हजारों कर्मचारियों से माफी मांगी है.

ये भी पढ़ें

दुनिया की सबसे पुरानी ट्रेवल फर्म Thomas Cook बंद, छह लाख लोग जहां-तहां फंसे

बोरिस जॉनसन को ब्रिटेन का विदेश मंत्री बता ट्रोल हो गईं पाकिस्तान की राजदूत

थॉमस कुक, थॉमस कुक: क्‍यों दिवालिया हुई 178 साल पुरानी कंपनी? जानें भारत पर होगा क्‍या असर
थॉमस कुक, थॉमस कुक: क्‍यों दिवालिया हुई 178 साल पुरानी कंपनी? जानें भारत पर होगा क्‍या असर

Related Posts

थॉमस कुक, थॉमस कुक: क्‍यों दिवालिया हुई 178 साल पुरानी कंपनी? जानें भारत पर होगा क्‍या असर
थॉमस कुक, थॉमस कुक: क्‍यों दिवालिया हुई 178 साल पुरानी कंपनी? जानें भारत पर होगा क्‍या असर