दिल्ली हिंसा : कोर्ट ने कहा- आरोपियों की डिजिटल पहचान पर कोई रोक नहीं

दिल्ली (Delhi) की अदालत ने यह देखते हुए दिल्ली हिंसा (Delhi violence) के आरोपी मोहम्मद आरिफ को जमानत देने से इनकार कर दिया कि एक तो उसके खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं और रिहा होने पर उसके द्वारा गवाहों को धमकाने या डराने की भी संभावना है.

Delhi Violence

दिल्ली की एक अदालत ने दिल्ली हिंसा (Delhi violence) के उन आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज करते हुए आगे की जांच करने के लिए तकनीकी चीजों की मदद लेने वाली जांच एजेंसी की कार्रवाई पर कोई रोक नहीं लगाई है, जिनकी गिरफ्तारी पुलिस के डिजिटली पहचान किए जाने के बाद हुई है.

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (Delhi Police Crime Branch) द्वारा की जा रही एक मामले की जांच में मोहम्मद आरिफ पर भारतीय दंड संहिता (IPC) की अलग-अलग धाराओं और शस्त्र अधिनियम (Arms Act) के तहत हत्या, दंगा करने, षड्यंत्र रचने के आरोप हैं.

‘जमानत देने पर धमका सकता है गवाहों को’

अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश (Additional Sessions Judge) विनोद यादव ने यह देखते हुए आरिफ को जमानत देने से इनकार कर दिया कि एक तो उसके खिलाफ लगे आरोपों की प्रकृति गंभीर हैं और रिहा होने पर उसके द्वारा गवाहों को धमकाने या डराने की भी संभावना है.

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सुनवाई के दौरान सरकारी वकील (Government lawyer) ने कहा कि घटनास्थल पर आरोपी की डिजिटल पहचान की गई है. हालांकि आरोपी के प्रतिनिधि ने इस आधार पर डिजिटली पहचान पर विरोध जताया कि चार्जशीट के दाखिल होने के बाद यह कानूनी रूप से वैद्य नहीं है.

‘आगे भी तकनीकी जांच पर कोई रोक नहीं’

सरकारी वकील ने इस बात पर जोर दिया कि मामले में कुछ भी नया नहीं जोड़ा गया है, लेकिन हां, टेक्नोलॉजी के इस्तेमाल के चलते आरोपी की पहचान करने की प्रक्रिया बदल गई है. इस पर कोर्ट ने कहा, “आगे की जांच में भी तकनीकी चीजों की मदद लेने में जांच एजेंसियों पर कोई रोक नहीं है.”

कोर्ट ने आगे कहा कि चांद बाग (Chand Bagh) में 24 फरवरी की रात के 12.06.35 बजे की CCTV फुटेज में आरोपी बिल्कुल स्पष्ट दिखाई पड़ रहा है. उसने सफेद रंग की टी-शर्ट और ब्लैक लोअर पहन रखा है. उसके हाथ में एक छड़ी दिखाई पड़ रही है और इससे वह सीसीटीवी को नुकसान पहुंचाते हुए भी दिख रहा है. (IANS)

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