burhan wani, बुरहान वानी की मौत के आज तीन साल पूरे, जानिए आतंक के पोस्टरब्वॉय की आखिरी शाम की कहानी
burhan wani, बुरहान वानी की मौत के आज तीन साल पूरे, जानिए आतंक के पोस्टरब्वॉय की आखिरी शाम की कहानी

बुरहान वानी की मौत के आज तीन साल पूरे, जानिए आतंक के पोस्टरब्वॉय की आखिरी शाम की कहानी

बुरहान वानी जितना बड़ा आतंकी नहीं था, उससे ज़्यादा बड़ी छवि उसने सोशल मीडिया के ज़रिए बना ली थी. यही उसकी ताकत थी मगर यही उसके अंत का कारण बना. सुरक्षाबलों ने उसके प्रति बढ़ते खतरनाक आकर्षण को खत्म करने की ठानी थी.
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बुरहान वानी का एनकाउंटर हुए आज तीन साल बीत चुके हैं. 8 जुलाई 2016 को 22 साल के बुरहान को उसके दो साथियों सरताज़ अहमद और परवेज़ अहमद के साथ मार गिराया गया था.

अपनी मौत से पहले ही बुरहान सोशल मीडिया के घोड़े पर सवार होकर आतंक का पोस्टरब्वॉय बन चुका था. उसके पूर्ववर्ती या तो सीमा पार पाकिस्तान से आए थे या फिर मुंह छिपाकर वारदातों को अंजाम देते थे. बुरहान इनके उलट कश्मीर के ही त्राल का रहनेवाला आम लड़का था. साथ ही वो अपनी पहचान छिपाने को कतई तैयार नहीं था. उसके वीडियोज़ इंटरनेट पर सैलाब की तरह फैल गए थे. क्रिकेट खेलने से लेकर खतरनाक हथियारों की संगत में बैठकर खून बहाने की धमकी देने तक बुरहान कश्मीरी नौजवानों के लिए जाना पहचाना चेहरा बन गया था.

ये घाटी में उसके नाम फैलने का ही नतीजा था कि मौत के छह महीने बाद चलनेवाले प्रदर्शनों में 110 लोगों ने अपनी जान खो दी जबकि सैकड़ों चोटें खाकर इलाज करा रहे थे.

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आज भी आतंकी बुरहान वानी के घर पर दूर-दराज़ से लोग आते हैं

देखते ही देखते पोस्टरब्वॉय बना था बुरहान
बुरहान 8 सालों से बंदूक और बम के सहारे आतंक फैला रहा था. 15 साल की उम्र में ही घर छोड़कर वो ऐसे बदलाव की तलाश में जुट गया जिसका कोई रोडमैप है ही नहीं. 2011 में उसने हिज्बुल मुजाहिद्दीन का परचम उठा लिया. वारदातों के मामले में वो किसी दुर्दांत आतंकी से कम ही होगा लेकिन घाटी में उसकी लोकप्रियता सबसे अधिक थी. बुरहान के तौर तरीकों ने उसके आकाओं को खुश कर दिया. वो कई सालों से किसी युवा चेहरे का इंतज़ार कर रहे थे. बुरहान ने उनकी इच्छा पूरी कर दी लेकिन ये सिलसिला लंबा नहीं चलना था. जम्मू-कश्मीर पुलिस और सेना उसकी हर आहट पर नज़रें रखे हुए थे.

साल 2013 में एक एनकाउंटर के दौरान उसकी मौत का समाचार उड़ा जिसने उसकी शोहरत बढ़ा दी. दिनों दिन बुरहान के हौसले बढ़ते जा रहे थे. सरकार ने उस पर 10 लाख रुपए का इनाम रख दिया. 1 जुलाई 2015 को 10 साथियों समेत खड़े बुरहान की एक फोटो फेसबुक पर आई और देखते ही देखते वायरल हो गई. सेना ने भी ये तस्वीर देखी और ठान लिया कि सभी को ठिकाने लगाया जाएगा.

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जून 2016 में बुरहान का एक वीडियो आया जिसमें वो अमरनाथ यात्रियों को आश्वस्त कर रहा था कि उन पर आतंकी हमले नहीं होंगे. उसने कश्मीरी पंडितों को भी घाटी में लौटने की दावत दी. हालांकि सैनिक कॉलोनियों पर धावा बोलने की उसने खुलकर धमकी दी थी. वर्दी वालों की जान लेने पर भी बुरहान आमादा था. अपने इरादे भी ज़ाहिर कर रहा था. जम्मू-कश्मीर पुलिस को अपने रास्ते से हट जाने की नसीहतें दे रहा था. इतने खतरनाक इरादों के साथ बुरहान को घाटी में खुलेआम घूमने देना मुमकिन नहीं था. अलगाववाद के रास्ते पर भटकने वाले नौजवान भी उससे आकर्षित होकर आतंकी संगठनों में जुड़ रहे थे.

कैसे आतंकी बना बुरहान वानी
अनंतनाग में बुरहान वानी की मौत के बाद उसके त्राल स्थित घर पर अचानक भीड़ बढ़ गई. एक साल बाद तक लोग बुरहान के घर आते और उसके पिता से मिलते. भीड़ भले आज थोड़ी छंट चुकी है लेकिन ये कोई नहीं कह सकता कि बुरहान वानी को भुला दिया गया है. वो आज भी सुरक्षाबलों के लिए सिरदर्द है.  जब उसे ढेर किया गया था तब जम्मू-कश्मीर के ही नहीं बल्कि दिल्ली के पत्रकार भी त्राल में डेरा डालने पहुंचे थे.

बुरहान के पिता मुज़फ्फर वानी ने तब अपने बेटे के आतंकी बनने का किस्सा सबसे साझा किया. वो बताते हैं कि एक दिन जब उनके इलाके में रुटीन चेकअप के दौरान सेना के कुछ लोग पहुंचे तो उनमें से एक ने बुरहान से पूछा कि वो बड़ा होकर क्या बनना चाहता है? उसने तुरंत जवाब दिया- मैं सोल्जर बनना चाहता हूं.

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सोल्जर बनने की चाहत रखनेवाला बुरहान आतंकी बनकर मरा

फिर 2010 की गर्मियां आईं.15 साल का बुरहान अपने बड़े भाई खालिद के साथ नई मोटरसाइकिल पर पिकनिक के लिए निकला था. रास्ते में उन्हें सुरक्षाकर्मियों ने रोक लिया जिनमें सेना के कुछ जवान भी थे (हालांकि बाद मीडिया रिपोर्ट्स में पता चला कि वो राज्य की पुलिस की एसओजी थी जिसके पास आतंकियों से लड़ने का ज़िम्मा था). मुज़फ्फर वानी बताते हैं कि सुरक्षाकर्मियों ने भाइयों की पिटाई कर दी. ये वाकया बुरहान के ज़हन में घर कर गया. मुज़फ्फर वानी के मुताबिक बुरहान बेहद गुस्सा था और पिटाई के बाद डिस्टर्ब हो गया. वो अपमानित महसूस कर रहा था. अपने बेटे की हालत देख मुज़फ्फर वानी ने उसे कश्मीर छोड़कर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी या लंदन चले जाने की सलाह दी, पर बुरहान नहीं माना.

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बुरहान के बूढ़े पिता उसकी कहानी सुनाने के लिए पीछे छूट गए

मुज़फ्फर वानी की बातों पर यकीन करें तो बुरहान अक्सर उनसे पूछता था कि आखिर बिना गलती के उनसे ऐसा बर्ताव क्यों किया गया. कुछ महीने ही गुज़रे कि बुरहान घर छोड़कर निकल गया. फिर एक दिन पुलिस ने मुज़फ्फर वानी को बुलाकर सूचित किया कि उनका बेटा आतंकियों के साथ जा मिला है और अब उसकी तलाश जारी है.

बुरहान वानी की वो आखिरी शाम
बुरहान वानी ने बंदूक उठाने को ज़िंदगी की नई शुरूआत माना था लेकिन वो शायद नहीं जानता था कि ये ज़िंदगी बहुत छोटी होनेवाली है. हिज्बुल से जुड़ने के बाद वो सिर्फ एक बार घर आया. अप्रैल 2015 में वानी परिवार को एक बुरी खबर मिली. बड़े बेटे 25 साल के खालिद वानी को त्राल के जंगलों से भरे पहाड़ में मार दिया गया. बताया गया कि बुरहान से मिलने के लिए निकला था. पिता मुज़फ्फर वानी इल्ज़ाम लगाते हैं कि उनके बेटे को तब तक पीटा गया था जब तक उसकी जान नहीं निकल गई. सुरक्षाबलों का मानना था कि खालिद छिपकर आतंकियों की मदद कर रहा था. हालांकि वानी परिवार उसके आतंकी होने से आज तक इनकार करता है.

एक ही साल से कुछ ज़्यादा वक्त बीता कि मौत बुरहान के सिर पर नाचने लगी. 8 जुलाई 2016 को बुरहान दो साथियों के साथ कोकरनाग के बमडूरा गांव में पहुंचे थे. वो नहीं जानते थे कि करीब एक महीने पहले से सुरक्षाबलों को उनकी भनक पड़ गई थी. हालांकि जिस जगह एनकाउंटर हुआ वहां बुरहान के होने की उम्मीद की नहीं गई थी. शाम साढ़े 4 बजे शुरू हुआ ऑपरेशन करीब सवा 6 बजे खत्म हुआ. अधिकतर बार ऐसा हुआ था कि मौत सामने देखकर आतंकी घरवालों से फोन करके बात कर लेते थे लेकिन बुरहान ने अपने घर फोन नहीं किया.

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बुरहान के जनाजे पर 10 हजार से ज़्यादा लोग जुटे थे

जब तीनों आतंकियों के शव बाहर निकाले गए और उनमें से एक की पहचान बुरहान के तौर पर हुई तो हंगामा मच गया. कुछ स्थानीय लोगों ने सुरक्षाबलों पर हमला बोल दिया. अगले दिन जब बुरहान का शव उसके घरवालों को सौंपा गया तो करीब दस हज़ार लोग जनाजे में शामिल हुए थे. सुबह नौ बजे शव सुपुर्दे खाक होना था लेकिन इतनी भीड़ उमड़ी कि दोपहर तक के लिए अंतिम संस्कार टल गया. जो भीड़ बुरहान को आखिरी बार देखने आई थी और उसे अपना नायक मान रही थी उसकी खिदमत में पानी की बोतलें और खाना बंटने लगा. सुरक्षाबलों को भर कर चल रही सड़क पर व्यवस्था करने में पसीना छूट गया. कई जगह बवाल मचानेवालों को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग करना पड़ा. मीडिया की एंट्री भी प्रतिबंधित की गई. बाद में पुलिस की ओर से सूचना दी गई कि घाटी में कई जगहों पर बलवा हुआ जिनमें अलग-अलग जगहों पर 16 लोग मारे गए. क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के एडीजी ने बताया कि दक्षिण कश्मीर से तीन पुलिसकर्मी भी गायब हो गए.

आपको बता दें कि जिस घर में बुरहान और उसके साथी छिपे थे वहीं से उसकी मुखबिरी होने के शक में गुस्साई भीड़ ने खूब तांडव किया. वो घर एनकाउंटर में मारे गए एक आतंकी सरताज के चाचा फारुक का था. बुरहान की मौत का बदला लेने पर उतारू कुछ नकाबपोशों ने गांव के 12 घरों को आग के हवाले कर दिया था. जिस परिवार पर मुखबिर होने का शक था उसका साल भर तक सामाजिक बहिष्कार चलता रहा. परिवार ने बहुत मुसीबतों का सामना किया. आज गांव में कोई बुरहान का ज़िक्र करना नहीं चाहता क्योंकि हर ज़िक्र के साथ उन पर ये कहकर ताना मारा जाता है कि वो गद्दार हैं.

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