2020 के वो टॉप मुद्दे जिन पर केन्द्र सरकार को SC में देना होगा लिटमस टेस्ट

नए साल का आगाज हो चुका है. केंद्र सरकार ने 2019 में कई बड़े बिलों को अनुमति दी है. 2020 में कुछ ऐसे मुद्दे होंगे जिस पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में कड़ी परीक्षा पार करनी पड़ेगी.
Modi government narendra modi, 2020 के वो टॉप मुद्दे जिन पर केन्द्र सरकार को SC में देना होगा लिटमस टेस्ट

नई दिल्ली: नए साल का आगाज हो चुका है. केंद्र सरकार ने 2019 में कई बड़े बिलों को अनुमति दी है. 2020 में कुछ ऐसे मुद्दे होंगे जिस पर केंद्र सरकार को सुप्रीम कोर्ट में कड़ी परीक्षा पार करनी पड़ेगी.

1-CAA (Citizenship Amendment Act)
केंद्र सरकार ने वर्ष 2019 में नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) को लागू कर दिया है. इस बिल का विरोध पूरे देश में किया जा रहा है. पिछले दिनों दिल्ली, यूपी, मध्य प्रदेश समेत पूर्वोत्तर के राज्यों में बिल के विरोध में हिंसक प्रदर्शन भी किए गए. इस मसले को लेकर 60 से अधिक याचिकाएं सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई हैं. केंद्र सरकार को 2020 में सुप्रीम कोर्ट के लिटमस टेस्ट से गुजरना होगा.
2- NRC
देश की संसद में सिटिजनशिप एमेंडमेंट बिल (नागरिकता संशोधन विधेयक) पास होते ही NRC या नागरिकता रजिस्टर की चर्चा शुरू हो गयी थी. खास तौर पर देश के विपक्षी दलों में एनआरसी के मसले पर काफी चिंताएं देखी गयी थी. इस वक्त सिर्फ असम में एनआरसी की प्रक्रिया चल रही है. सुप्रीम कोर्ट में इस मामले पर भी बहस चल रही है.
3- 370
सुप्रीम कोर्ट अनुच्छेद-370 को हटाने व जम्मू व कश्मीर राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों में बांटने जैसे संवेदनशील मुद्दे का भी परीक्षण करेगा. वहीं आने वाले दिनों में सुप्रीम कोर्ट इस पर भी फैसला सुनाएगा कि अनुच्छेद-370 को हटाने के बाद कश्मीर घाटी में लगी पाबंदियां कहां तक जायज है?

4- ट्रिपल तलाक
25 जुलाई को लोकसभा ने मुस्लिम वुमेन (प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज) बिल को पारित कर दिया. यह बिल तीन तलाक के नाम से चर्चित है. एनडीए के सहयोगी दल जदयू ने बिल पर बहस में हिस्सा नहीं लिया था. 2017 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कानून मंत्री ने तुरंत यह बिल लोकसभा में पेश किया था. तीन तलाक के मामले में तीन साल की जेल का प्रावधान करते हुए इसे आपराधिक मामला बनाया था. इस मामले की सुनवाई भी कोर्ट में चल रही है.

5- निकाह हलाला
हलाला एक रस्म है. इसे ‘निकाह हलाला’ के नाम से भी जानते हैं. यह रस्म उन तलाकशुदा औरतों के लिए होती है, जो हालात के चलते दोबारा अपने पहले शौहर से निकाह करना चाहती हैं. इसके लिए उन्हें हलाला का पालन करना पड़ता है. शरिया के मुताबिक अगर किसी शख्स ने बीवी को तलाक दे दिया, तो उससे तब तक दोबारा निकाह नहीं कर सकता है जब तक वह किसी दूसरे से निकाह कर तलाक न ले ले. इस मामले की सुनवाई भी सुप्रीम कोर्ट में चल रही है.

6- Political parties under RTI
देश में राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार कानून के तहत लाने की मांग लंबे समय से की जाती रही है. अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. शीर्ष कोर्ट में याचिका दाखिल कर राजनीतिक पार्टियों को आरटीआई के दायरे में लागे की मांग की गई है. कोर्ट में सभी पंजीकृत और मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों को सूचना के अधिकार कानून के तहत ‘सार्वजनिक प्राधिकरण’ घोषित करने के निर्देश देने की मांग वाली एक याचिका दायर की गई है.

7- इलेक्टोरल बॉन्ड
सरकार ने साल 2018 में इस बॉन्ड की शुरुआत की थी. इसका मकसद था कि इससे राजनीतिक फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ेगी और साफ-सुथरा धन आएगा. इसमें व्यक्ति, कॉरपोरेट और संस्थाएं बॉन्ड खरीदकर राजनीतिक दलों को चंदे के रूप में देती हैं और राजनीतिक दल इस बॉन्ड को बैंक में भुनाकर रकम हासिल करते हैं. भारतीय स्टेट बैंक की 29 शाखाओं को इलेक्टोरल बॉन्ड जारी करने और उसे भुनाने के लिए अधिकृत किया गया. ये शाखाएं नई दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, गांधीनगर, चंडीगढ़, पटना, रांची, गुवाहाटी, भोपाल, जयपुर और बेंगलुरु की हैं. अब तक इलेक्टोरल बॉन्ड की बिक्री के 12 चरण पूरे हो चुके हैं. इलेक्टोरल बॉन्ड का सबसे ज्यादा 30.67 फीसदी हिस्सा मुंबई में बेचा गया. इनका सबसे ज्यादा 80.50 फीसदी हिस्सा दिल्ली में भुनाया गया. ये मामला भी अदालत की निगरानी में है.

8- आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण
उच्चतम न्यायालय समाज के आर्थिक रूप से दुर्बल वर्गो के लिये सरकारी नौकरियों और शिक्षण संस्थाओं में प्रवेश के लिये दस फीसदी आरक्षण का प्रावधान करने संबंधी केन्द्र के निर्णय को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही हैं.

Related Posts